Wheat and Barley New Varieties: किसानों को गेहूं-जौ की नई किस्मों की सौगात, कम लागत में बंपर उत्पादन, होंगे मालामाल

Wheat and Barley New Varieties: किसानों को जल्द ही गेहूं और जौ की नई किस्में मिलने वाली हैं। यह किस्में न केवल भरपूर पोषक तत्वों वाली है बल्कि इनका बंपर उत्पादन भी होगा। इससे किसान भी मालामाल हो सकेंगे। अगले साल तक यह किस्में उन्हें उपलब्ध करा दी जाएंगी।

यह खुलासा राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर में आयोजित तीन दिवसीय 64वीं अखिल भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान कार्यकर्ता गोष्ठी में हुआ। इस राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला में देशभर से वैज्ञानिक, शोधकर्ता और कृषि विशेषज्ञ जुटे।

कार्ययोजना को दिया अंतिम रूप (Wheat and Barley New Varieties)

कार्यशाला के दौरान कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा हुई और नई किस्मों के विकास से लेकर भविष्य की कार्ययोजना तक को अंतिम रूप दिया गया। इस आयोजन ने किसानों और वैज्ञानिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का अवसर दिया।

गेहूं और जौ की 18 नई किस्में तैयार (Wheat and Barley New Varieties)

इस सम्मेलन का सबसे बड़ा आकर्षण रहा गेहूं और जौ की 18 नई किस्मों का लोकार्पण, जिन्हें अगले वर्ष तक किसानों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।

गेहूं की 14 किस्में

  • इन किस्मों में आयरन, जिंक और प्रोटीन की उच्च मात्रा पाई जाती है। औसतन 45 पीपीएम जिंक व आयरन और लगभग 13.5′ प्रोटीन इनमें मौजूद है। यह किस्में उन किसानों और उपभोक्ताओं के लिए वरदान साबित होंगी, जहां पोषण की कमी एक बड़ी समस्या है।

जौ की 4 किस्में

  • नई जौ किस्मों में भी पोषण तत्वों की प्रचुरता है। खासतौर पर डीडब्ल्यूआरबी-223 किस्म ऐसी है, जिसमें छिलका नहीं होता। इसे गेहूं में मिलाकर उपयोग किया जा सकता है, जिससे भोजन और अधिक पौष्टिक बनता है।

किसानों के लिए क्षेत्रवार अनुकूल किस्में (Wheat and Barley New Varieties)

नई किस्मों को इस तरह विकसित किया गया है कि वे अलग-अलग राज्यों और इलाकों की जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप हों।

  • महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक- एआरएस निफाड की एनआईएडब्ल्यू-4114 और हिसार की डब्ल्यूएच-1306
  • मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और बुंदेलखंड क्षेत्र- कानपुर की केबी-2031, इंदौर की एचआई-1669, एचआई-1674, एचआई-8840
  • पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश- करनाल की डीबीडब्ल्यू-386, डीबीडब्ल्यू-443, लुधियाना की पीबीडब्ल्यू-891
  • राजस्थान और उदयपुर क्षेत्र- विजापुर की जीडब्ल्यू-543 और अकोला की एकेएडब्ल्यू-5100
  • बिहार, बंगाल और पूर्वी उत्तर प्रदेश- पंतनगर की यूपीबी-1106, नुजिवीडु सीड्स की एनडब्ल्यूएस-2222

इन किस्मों से किसानों को उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ बेहतर पोषण भी मिलेगा।

नई किस्मों की विशेषताएं (Wheat and Barley New Varieties)

  1. उच्च पोषण मूल्य- प्रोटीन, आयरन और जिंक की प्रचुरता।
  2. जलवायु सहनशीलता- सूखा और गर्मी झेलने की क्षमता।
  3. उच्च उत्पादन क्षमता- पारंपरिक किस्मों की तुलना में अधिक पैदावार।
  4. कम रोग-प्रभावित- रस्ट और अन्य बीमारियों से सुरक्षा।
  5. छिलका रहित जौ- भोजन में उपयोग के लिए आसान और स्वास्थ्यवर्धक।

नई किस्मों को लेकर वैज्ञानिकों की राय (Wheat and Barley New Varieties)

वैज्ञानिक डॉ. रतन तिवारी ने कहा कि गेहूं और जौ अनुसंधान में यह नई उपलब्धि किसानों के जीवन में बड़ा बदलाव लाएगी। वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि आने वाले समय में अनुसंधान का फोकस जैविक खेती, जल संरक्षण और जलवायु-संवेदनशील फसलों पर होगा।

किसानों के लिए बड़ा लाभ (Wheat and Barley New Varieties)

इन नई किस्मों से किसानों को न सिर्फ अधिक उत्पादन मिलेगा बल्कि उनके उत्पाद की बाजार में बेहतर कीमत भी मिल सकेगी। पोषणयुक्त अनाज की मांग बढ़ रही है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी।

पोषण सुरक्षा की दिशा में अहम कदम (Wheat and Barley New Varieties)

आज के समय में कुपोषण और एनीमिया जैसी समस्याएं बड़ी चुनौती हैं। इस मौके पर वैज्ञानिकों ने बताया कि इन किस्मों के माध्यम से आहार में जिंक, आयरन और प्रोटीन की कमी को दूर किया जा सकेगा। इन पोषक अनाजों के सेवन से बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।

रिकॉर्ड उत्पादन पर वैज्ञानिकों को बधाई (Wheat and Barley New Varieties)

डॉ. एस.के. प्रधान ने बताया कि बीते वर्ष भारत ने 117.5 मिलियन टन गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन हासिल किया है। यह कृषि वैज्ञानिकों और किसानों की कड़ी मेहनत का परिणाम है। उन्होंने सभी शोधकर्ताओं को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी और आगे और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई।

वर्ष 2025-26 के लिए नई कार्ययोजना (Wheat and Barley New Varieties)

गोष्ठी के तीसरे दिन विशेष सत्र में अगले दो वर्षों की अनुसंधान कार्ययोजना पर चर्चा हुई। प्रस्तुतिकरण में यह तय किया गया कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ती खाद्य मांग और पोषण की चुनौतियों को ध्यान में रखकर अनुसंधान को नई दिशा दी जाएगी।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ) (Wheat and Barley New Varieties)

1. किसानों को नई गेहूं और जौ की किस्में कब तक उपलब्ध होंगी?

👉 वैज्ञानिकों के अनुसार गेहूं और जौ की 18 नई किस्में अगले वर्ष तक किसानों को उपलब्ध करा दी जाएंगी।

2. इन नई किस्मों की खासियत क्या है?

👉 इनमें आयरन, जिंक और प्रोटीन की भरपूर मात्रा होगी, जिससे अनाज न केवल ज्यादा उत्पादन देगा बल्कि पोषण भी बढ़ाएगा।

3. जौ की नई किस्मों में क्या विशेष है?

👉 जौ की डीडब्ल्यूआरबी-223 किस्म बिना छिलके की है, जिसे गेहूं में मिलाकर आसानी से खाने योग्य बनाया जा सकता है।

4. गेहूं की किस्मों में पोषण स्तर कितना होगा?

👉 नई किस्मों में जिंक और आयरन 45 पीपीएम तक और प्रोटीन 13.5% तक पाया जाएगा।

5. कौन-कौन से राज्यों के किसान इन किस्मों से लाभान्वित होंगे?

👉 मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तरप्रदेश, बिहार, बंगाल और उत्तराखंड जैसे राज्यों के मैदानी क्षेत्रों के किसान इनसे लाभ उठा पाएंगे।

6. गेहूं और जौ की नई किस्मों से किसानों को क्या फायदा होगा?

👉 इनसे किसानों को कम लागत में ज्यादा पैदावार, पोषणयुक्त फसल, और बाजार में बेहतर दाम मिलेगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी।

7. इस गोष्ठी का आयोजन कहाँ हुआ था?

👉 यह आयोजन राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में किया गया।

देश-दुनिया की ताजा खबरें (Hindi News Madhyapradesh) अब हिंदी में पढ़ें | Trending खबरों के लिए जुड़े रहे betulupdate.com से | आज की ताजा खबरों (Latest Hindi News) के लिए सर्च करें betulupdate.com

Leave a Comment