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Weird Indian Culture : इष्‍ट देव को प्रसन्‍न करने यहां कांटों पर लेटते हैं ग्रामीण, सालोंं से निभा रहे परम्‍परा, देखें वीडियो

Weird Indian Culture: बेर की कटीली झाड़ियों पर लेट कर किया इष्ट देव को प्रसन्न, रज्जड़ समाज ने परंपरागत रूप से मनाया भुडई पर्व

▪️ निखिल सोनी, आठनेर

Weird Indian Culture: मध्यप्रदेश के बैतूल जिले (Betul District In MP) में आज भी सालों पुरानी कई परंपराओं (Weird Indian Culture) का बड़ी निष्ठा के साथ निर्वहन किया जाता है। इनमें कई परंपराएं ऐसी हैं जो देखने में तकलीफदेह भी लगती हैं, लेकिन इनका निर्वहन करने वालों को न तो कोई तकलीफ होती है और न ही परेशानी होती है। वे खुशी-खुशी इस परंपरा का निर्वाह करते हैं। ऐसी ही एक परंपरा को निभाते हुए आठनेर ब्लॉक के ग्राम पांढुर्णा में भुडई का त्योहार मनाया गया।

ग्राम पांढुर्णा में 2 दिसंबर को रज्जड़ समाज के लोगों के द्वारा भुडई पर्व मनाया गया। ग्राम पंचायत के सरपंच सुखदेव माकोड़े ने बताया कि इस पर्व में बेर की कंटीली झाड़ियों और पत्तों पर अर्धनग्न होकर समाज के सदस्य लेटते हैं। ऐसा वे अपने इष्ट देव को प्रसन्न करने के लिए करते हैं। इस पर्व को देखने बड़ी संख्या में यहां पर ग्रामीणजन भी जुटे। आप ग्रामीणों की इस परम्‍परा का वीडियो नीचे देख सकते है।

ग्राम के उप सरपंच कृष्णा दंवडे के द्वारा विस्तार पूर्वक जानकारी देकर बताया गया कि समाज के शादी समारोह एवं अन्य प्रकार के कार्यक्रम इसी पर्व के बाद धूमधाम से मनाए जाते हैं। उन्हें कठिन परीक्षा देकर अपने इष्ट देव को प्रसन्न करना आवश्यक है। हर वर्ष दिसंबर महीने में यह पर्व मनाया जाता है। कटीली झाड़ियों और पत्तों पर लेटने के बाद सभी भगवान से सुख समृद्धि हेतु कामना करते हैं।

यहां देखें (Weird Indian Culture) वीडियो…

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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