Shrimad Bhagwat Katha : कान्हा जी महाराज बोले- दुनिया की प्रथम पाठशाला मां का गर्भ होती है, कथा में खेली गई फूलों की होली
▪️ लोकेश वर्मा, मलकापुर
बैतूल जिला मुख्यालय के समीप ग्राम मलकापुर में गौलोक वासी रामेश्वर महतो की स्मृति में चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह के सप्तम व विराम दिवस की कथा में वृंदावन से पधारे कान्हा जी महाराज ने भगवान श्री कृष्ण के सोलह हजार एक सौ आठ विवाह का वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि दिव्य ज्ञान से मानव अपने जीवन का कल्याण कर सकता है। ज्ञान के बिना इंसान अपने जीवन के सर्वोच्च स्थान को नहीं प्राप्त कर सकता है। इसके लिए जरूरी है कि वह धर्म का अनुसरण करें, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि व्यक्ति का आचरण भी उच्च हो। बिना इसके ज्ञान की प्राप्ति संभव नहीं। कथा में फूलों की होली खेली गई। वृंदावन से आए संगीत के कलाकारों ने आज बिरज में होली रे रसिया… जैसे सुंदर गीतों की प्रस्तुति देकर पूरे पांडाल को झूमने पर मजबूर कर दिया।
अभिमन्यु तथा राजा परीक्षित की कथा सुनाई
कान्हा जी महाराज वीर अभिमन्यु तथा राजा परीक्षित की कथा सुना रहे थे। आगे कहा कि माता-पिता के जीवित रहते पुत्र को शनि का प्रभाव नहीं पड़ता बशर्त प्रात: काल उठकर पुत्र माता-पिता के नित्य चरण स्पर्श करें महाराज श्री ने स्यमंतक मणि की कथा सुनाते हुए बताई।

सुदामा चरित्र का मार्मिक वर्णन
कथा के अंतिम दिन कान्हा जी महाराज ने सुदामा चरित्र का वर्णन अत्यंत मार्मिक और भावपूर्ण ढंग से वर्णन किया। सुदामा चरित्र के माध्यम से लोगों को निस्वार्थ भाव से मित्रता निभाने का संदेश दिया। आगे कथा में श्री सुखदेव जी ने राजा परीक्षित को भागवत महापुराण सात दिन के अंदर सुना कर उन्हें भगवत धाम का अधिकारी बनाया।
मरने वाले व्यक्ति को क्या करना चाहिए? इस प्रश्न के उत्तर में ही श्री सुखदेव जी ने राजा परीक्षित को सात दिन तक भागवत सुनाई। जब तक्षक नाग राजा परीक्षित को डसने आया, उससे पहले राजा परीक्षित भगवान के धाम में मन लगा कर बैठ गए और तक्षक का स्पर्श होने से केवल शरीर नष्ट हुआ आत्मा को कोई कष्ट नहीं। इतना दिव्य ज्ञान श्री सूतजी महाराज ने ऋषियों को दिया।
भागवत महापुराण का सदा श्रवण करना चाहिए
महाराज श्री ने आगे कहा की भागवत महापुराण का श्रवण बार-बार करना चाहिए यह भगवान की अनंत कथा है, जो कभी समाप्त नहीं होती है। यह निरंतर चलती रहती है। मनुष्य के अंदर परोपकार का भाव आ जाएं, सभी जीवों के प्रति दया का भाव आ जाएं, मनुष्य कुमार्ग से सद्मार्ग की ओर अग्रसर हो जाएं, यही भागवत कथा का फल है। भागवत कथा की यही सार्थकता है।

समापन पर हुई भारत माता की आरती
श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के समापन पर भारत माता की आरती की गई जो कि धर्म के साथ राष्ट्र को लेकर के चलने की प्रेरणा देता है। भागवत के साथ भारत माता की आरती होना अपने आप में एक अलौकिक विषय है। कथा पंडाल का अलौकिक नजारा था। अंत में महाराज श्री ने कहा कि जिसकी कहीं तुलना ना की जाए वही बैतूल है। यहां के जैसे सागौन वृक्ष और गुड़ की मिठास पूरे देश में प्रसिद्ध है, वैसे ही यहां के लोग भी बड़े अद्भुत हैं। इनकी मिठास भी पूरे देश में प्रसिद्ध है।
कल होगा हवन और महाप्रसाद वितरण
सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण के समापन पर कल भंडारे का आयोजन किया गया है। कथा के यजमान राकेश महतो, नवनीत महतो, अनित महतो ने सभी भक्तों को पधार कर भागवत जी की महाप्रसाद ग्रहण करने की अपील की। नीचे क्लिक कर सुनें आज की कथा…
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