MP High Speed Corridor: हाई-स्पीड कॉरिडोर नेटवर्क से जुड़ेगा मध्यप्रदेश, हर कोने तक पहुंच होगी आसान, विकास को मिलेगी रफ्तार
MP High Speed Corridor: मध्यप्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा है कि मध्य प्रदेश को देश के राष्ट्रीय हाई-स्पीड कॉरिडोर नेटवर्क से जोड़ने के लिए राज्य सरकार योजनाबद्ध और तेज गति से काम कर रही है। सरकार का उद्देश्य ऐसा सड़क नेटवर्क तैयार करना है, जिससे उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम भारत के बीच सीधा और तेज संपर्क बने। इससे न केवल यात्रा में लगने वाला समय कम होगा, बल्कि उद्योग, निवेश और रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे।
मंत्री श्री सिंह ने बताया कि राज्य में प्रस्तावित ये हाई-स्पीड कॉरिडोर भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए जा रहे हैं। इन मार्गों से मध्य प्रदेश की आर्थिक और औद्योगिक क्षमता को मजबूती मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण पर बराबर ध्यान दिया जा रहा है, जिसका उदाहरण देश का पहला राज्य-स्तरीय टाइगर कॉरिडोर है।
मप्र से गुजरने वाले प्रस्तावित हाई-स्पीड कॉरिडोर
लोक निर्माण मंत्री ने जानकारी दी कि सरकार ने कई ऐसे हाई-स्पीड कॉरिडोर की योजना बनाई है, जो मध्य प्रदेश से होकर गुजरेंगे और देश के अलग-अलग हिस्सों को आपस में जोड़ेंगे। इन कॉरिडोर से राज्य के भीतर और बाहर आवागमन अधिक तेज और सुगम होगा।
पहला प्रमुख हाई-स्पीड कॉरिडोर दिल्ली, आगरा, ग्वालियर, भोपाल, बैतूल होते हुए नागपुर तक प्रस्तावित है। इस मार्ग की मध्य प्रदेश में लंबाई लगभग 600 किलोमीटर होगी। इसकी अनुमानित लागत करीब 30 हजार करोड़ रुपये बताई गई है। यह कॉरिडोर उत्तर भारत और दक्षिण भारत के बीच तेज़ सड़क संपर्क उपलब्ध कराएगा, जिससे यात्रियों और व्यापारिक गतिविधियों को सीधा लाभ मिलेगा।
दूसरा महत्वपूर्ण हाई-स्पीड कॉरिडोर फेज दो के तहत प्रस्तावित है, जो वाराणसी, इलाहाबाद, रीवा, जबलपुर होते हुए नागपुर तक जाएगा। इस कॉरिडोर की कुल लंबाई लगभग 700 किलोमीटर होगी और इस पर करीब 30 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यह मार्ग पूर्वी भारत को मध्य और दक्षिण भारत से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा और क्षेत्रीय विकास को गति देगा।
तीसरा प्रमुख कॉरिडोर अहमदाबाद, इंदौर, भोपाल, जबलपुर, लखनादौन होते हुए रायपुर तक प्रस्तावित है। इसकी कुल लंबाई लगभग 900 किलोमीटर होगी और अनुमानित लागत करीब 45 हजार करोड़ रुपये है। इस परियोजना के अंतर्गत जबलपुर से भोपाल के बीच का हिस्सा फिलहाल डीपीआर चरण में है, जिसकी लागत लगभग 15 हजार करोड़ रुपये आंकी गई है। भोपाल से इंदौर के बीच एलाइनमेंट को अंतिम रूप दिया जा चुका है और इसे स्वीकृति की प्रक्रिया में रखा गया है। वहीं इंदौर से अहमदाबाद के बीच के हिस्से के लिए योजना तैयार की जा रही है।

राज्य सड़क विकास निगम की एक्सप्रेस-वे योजनाएं
इन राष्ट्रीय स्तर के कॉरिडोर के अलावा मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम भी कई हाई-स्पीड कॉरिडोर और एक्सप्रेस-वे की योजना पर काम कर रहा है। इनमें भोपाल से मंदसौर तक प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे एक महत्वपूर्ण परियोजना है। इस एक्सप्रेस-वे के माध्यम से राजधानी भोपाल को सीधे दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा, जिससे औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
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देश का पहला राज्य-स्तरीय टाइगर कॉरिडोर
मंत्री श्री सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और राज्य लोक निर्माण विभाग के संयुक्त प्रयास से मध्य प्रदेश में देश का पहला राज्य-स्तरीय टाइगर कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना इस सोच पर आधारित है कि सड़क निर्माण और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ आगे बढ़ाया जा सकता है।
इस टाइगर कॉरिडोर के अंतर्गत राज्य के प्रमुख हाईवे नेटवर्क को उन्नत किया जा रहा है और साथ ही ऐसे संपर्क मार्गों को भी बेहतर बनाया जा रहा है, जो प्रदेश के चार प्रमुख टाइगर रिजर्व पेंच, कान्हा, बांधवगढ़ और पन्ना को आपस में जोड़ेंगे। इससे वन्यजीवों के आवागमन के साथ-साथ लोगों के लिए भी यात्रा आसान होगी।
अगस्त 2025 में मध्य प्रदेश को इस महत्वाकांक्षी परियोजना की स्वीकृति मिली, जिसकी कुल लागत लगभग 5,500 करोड़ रुपये है। यह टाइगर कॉरिडोर करीब 250 किलोमीटर लंबा होगा। इसमें टाइगर रिजर्व के प्रवेश द्वारों तक जाने वाली कनेक्टिंग सड़कों और स्पर्स के उन्नयन का कार्य भी शामिल है।
टाइगर कॉरिडोर के तहत सड़क उन्नयन
पेंच से कान्हा के बीच पेंच-सिवनी राष्ट्रीय राजमार्ग 44 पर मौजूदा चार लेन और पक्के शोल्डर को यथावत रखा जाएगा। सिवनी से नैनपुर, चिरईडोंगरी और मंडला तक के हिस्से को दो लेन से बढ़ाकर चार लेन किया जाएगा। चिरईडोंगरी से कान्हा तक की सड़क दो लेन के रूप में ही रहेगी।
कान्हा से बांधवगढ़ के बीच मंडला से चाबी, चाबी से शाहपुरा और शाहपुरा से उमरिया तक के हिस्सों को दो लेन से चार लेन में बदला जाएगा। उमरिया से ताला, जो बांधवगढ़ का प्रवेश मार्ग है, वहां मौजूदा दो लेन और पक्के शोल्डर को बनाए रखा जाएगा।
बांधवगढ़ से पन्ना के बीच उमरिया से बरही और बरही से मैहर तक दो लेन सड़क बनी रहेगी। मैहर से सतना और सतना से पन्ना तक के मार्गों पर दो लेन और पक्के शोल्डर यथावत रखे जाएंगे।
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यात्रा समय में होगी खासी कमी, विकास भी होगा
इन सभी उन्नयन कार्यों को 5,500 करोड़ रुपये की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के तहत पूरा किया जा रहा है। इसके पूरा होने से विभिन्न टाइगर रिजर्व के बीच आवागमन आसान होगा और यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी। साथ ही इन क्षेत्रों की स्थानीय अर्थव्यवस्था, पर्यटन और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलेगा। टाइगर कॉरिडोर का निर्माण चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है और कई हिस्सों में काम पहले से ही प्रगति पर है।
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