LPG price hike news: रसोई गैस की कीमत में बढ़ोतरी को लेकर सरकार ने किया यह ऐलान, जाने क्या हुआ बदलाव
LPG price hike news: पिछले कुछ दिनों से मीडिया में यह चर्चा तेज है कि व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों के दाम में 111 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है। इस खबर के सामने आने के बाद आम लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा कि क्या घरेलू रसोई गैस भी महंगी हो सकती है। इसी भ्रम को दूर करने के लिए सरकार और संबंधित विभागों की ओर से स्थिति स्पष्ट की गई है। इसमें बताया गया है कि कमर्शियल और घरेलू एलपीजी की कीमत तय होने की प्रक्रिया अलग-अलग है और घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल किसी तरह की अतिरिक्त चिंता करने की जरूरत नहीं है।
कमर्शियल एलपीजी की कीमत क्यों बढ़ी
व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की कीमत पूरी तरह बाजार आधारित होती है। इनकी दरें अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी के भाव और उससे जुड़ी लागत पर निर्भर करती हैं। होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान जिन सिलेंडरों का उपयोग करते हैं, उनकी कीमतों में बदलाव वैश्विक स्तर पर होने वाले उतार-चढ़ाव के अनुसार किया जाता है। हालिया बढ़ोतरी भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है, न कि किसी घरेलू नीति परिवर्तन का नतीजा।
अंतरराष्ट्रीय बाजार से कैसे जुड़ी है एलपीजी की कीमत
भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का करीब 60 प्रतिशत आयात करता है। इस कारण घरेलू स्तर पर एलपीजी की कीमतें सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय दरों से प्रभावित होती हैं। वैश्विक बाजार में सऊदी अरब की प्रति मीट्रिक टन कीमत को एक अहम मानक माना जाता है। जुलाई 2023 में यह कीमत लगभग 385 अमेरिकी डॉलर प्रति मीट्रिक टन थी, जो नवंबर 2025 तक बढ़कर करीब 466 अमेरिकी डॉलर प्रति मीट्रिक टन हो गई। इस अवधि में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगभग 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
घरेलू एलपीजी की कीमत में क्या हुआ बदलाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगाई के बावजूद घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में राहत दी गई। अगस्त 2023 में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत करीब 1103 रुपये थी, जो नवंबर 2025 तक घटकर 853 रुपये हो गई। यानी जिस समय वैश्विक स्तर पर कीमतें बढ़ रही थीं, उसी दौरान घरेलू गैस की दरों में लगभग 22 प्रतिशत की कमी देखने को मिली। इससे साफ होता है कि सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय महंगाई से बचाने की कोशिश की।
पीएमयूवाई उपभोक्ताओं को अतिरिक्त राहत
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत आने वाले उपभोक्ताओं को घरेलू एलपीजी पर और ज्यादा राहत दी गई है। 14.2 किलोग्राम के घरेलू सिलेंडर की वास्तविक लागत करीब 950 रुपये होने के बावजूद दिल्ली में पीएमयूवाई लाभार्थियों को यह सिलेंडर 553 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है। अगस्त 2023 में यही कीमत करीब 903 रुपये थी। इस तरह पीएमयूवाई उपभोक्ताओं के लिए प्रभावी कीमत में लगभग 39 प्रतिशत की कमी आई है। इससे साफ होता है कि सरकार स्वच्छ ईंधन के उपयोग को लगातार प्रोत्साहित कर रही है।
सब्सिडी को लेकर सरकार का फैसला
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सरकार ने पीएमयूवाई उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर पर 300 रुपये की लक्षित सब्सिडी को मंजूरी दी है। यह सब्सिडी साल में अधिकतम नौ रिफिल तक दी जाएगी। इसके लिए करीब 12,000 करोड़ रुपये के खर्च को स्वीकृति दी गई है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को रसोई गैस आसानी से और किफायती दाम पर मिलती रहे।
तेल कंपनियों को क्यों हुआ नुकसान
साल 2024-25 के दौरान अंतरराष्ट्रीय एलपीजी कीमतों में तेजी बनी रही। इसके बावजूद घरेलू एलपीजी के दाम नहीं बढ़ाए गए। इसका सीधा असर तेल विपणन कंपनियों पर पड़ा और उन्हें करीब 40,000 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ा। इस स्थिति से निपटने और घरेलू गैस की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने के लिए सरकार ने हाल ही में इन कंपनियों को 30,000 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का फैसला किया है।
पड़ोसी देशों से तुलना में भारत की स्थिति
अगर घरेलू एलपीजी की कीमतों की तुलना पड़ोसी देशों से की जाए तो भारत में यह काफी सस्ती दिखाई देती है। 1 नवंबर 2025 की स्थिति के अनुसार दिल्ली में पीएमयूवाई लाभार्थियों के लिए घरेलू सिलेंडर की कीमत 553 रुपये है। वहीं पाकिस्तान के लाहौर में यही सिलेंडर करीब 902 रुपये, श्रीलंका के कोलंबो में लगभग 1227 रुपये और नेपाल के काठमांडू में करीब 1205 रुपये में मिलता है। यह तुलना दिखाती है कि भारतीय उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी अपेक्षाकृत अधिक किफायती है।
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सीएनजी और पीएनजी उपभोक्ताओं को भी राहत
नए साल की शुरुआत के साथ स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल करने वालों के लिए एक और अच्छी खबर सामने आई है। 1 जनवरी से कुछ शहरों में सीएनजी और पीएनजी की कीमतों में कटौती की गई है। दिल्ली-एनसीआर के कुछ इलाकों में पाइप से मिलने वाली गैस सस्ती हुई है। इसके अलावा गैस वितरण कंपनियों ने सीएनजी और घरेलू पीएनजी की कीमतों में एक रुपये प्रति यूनिट की कमी की है। यह कदम पाइपलाइन शुल्क में हुए बदलाव के बाद उठाया गया है।
कमर्शियल और घरेलू एलपीजी के उपभोक्ताओं में अंतर
कमर्शियल एलपीजी का उपयोग करने वालों की संख्या घरेलू उपभोक्ताओं की तुलना में बहुत कम है। देश में घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं की संख्या 33 करोड़ से अधिक है, जबकि व्यावसायिक एलपीजी का इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ता, जो सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों से जुड़े हैं, लगभग 30 लाख के आसपास हैं। कमर्शियल सिलेंडर मुख्य रूप से होटल, रेस्टोरेंट और बड़े संस्थानों में उपयोग होते हैं, जबकि घरेलू सिलेंडर आम परिवारों की रसोई का हिस्सा हैं।
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सरकार की क्या है प्राथमिकता
कमर्शियल एलपीजी की कीमतें भले ही अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुसार तय होती हों, लेकिन सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को इससे अलग रखने की नीति अपनाई है। घरेलू गैस की कीमतों को स्थिर रखना, सब्सिडी देना और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इन उपायों से यह संदेश साफ है कि आम लोगों पर महंगाई का बोझ न पड़े, इसके लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।
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