IAS Success Story: पिता ने गांव-गांव जाकर बेचे कपड़े, बेटे ने की ऐसी तैयारी कि बन गए IAS अफसर, जानें अनिल बसाक की संघर्ष की कहानी
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IAS Success Story: प्रतिवर्ष संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सिविल सर्विस एग्जाम (Civil Service Exam) में लाखों उम्मीदवार शामिल होते हैं, लेकिन सफलता का प्रतिशत बहुत कम होता है। इनमें से ज्यादातर ऐसे होते हैं, जो कोचिंग पर लाखों रुपये खर्च देते हैं, लेकिन इसके बाद भी उन्हें सफलता नहीं मिलती है। आज ऐसे ही बात करते है यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2021 के सफल उम्मीदवार आईएएस अनिल बसाक की जिन्होंने बिना कोचिंग के सिविल सेवा परीक्षा पास कर आईएएस बन गए। आइए जानते है अनिल बसाक की कामयाबी की कहानी….
अनिल का परिचय (IAS Success Story)
अनिल मूलरूप से बिहार के किशनगंज के रहने वाले हैं। अनिल ने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी होने के बाद जेईई मेंस की तैयारी की और इसके बाद एडवांस परीक्षा देकर उन्होंने आईआईटी दिल्ली में सिविल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया।

परिवार की आर्थिक हालत
बिहार के किशनगंज के रहने वाले अनिल ने अपने शुरुआती जीवन में ढेरों संघर्ष का समाना किया, उन्होंने एक ऐसा समय भी देखा, जब उनके पिता विनोद बसाक गांव-गांव घूमकर कपड़े बेचा करते थे। अनिल ने अपने परिवार की आर्थिक हालत सुधारने के लिए दिन-रात मेहनत कर की परीक्षा की तैयारी में जुट गए।

असफलता के आगे नहीं मानी हार (IAS Success Story)
अनिल ने जब पहली बार सिविल सेवा की परीक्षा दी तो वे सफल नहीं हो पाए। यहां तक कि वे प्रीलियम्स भी क्लियर नहीं कर पाए। अनिल के पास इतने पैसे नहीं थे कि वे कोचिंग ले पाते। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और फिर से कोशिश की। दूसरी बार उन्हें 616 वीं रैंक मिली लेकिन वे इससे खुश नहीं थे, इसलिए उन्होंने अपनी तैयारी को जारी रखा और तीसरे प्रयास के लिए तैयारी की। हालांकि, दूसरी सफलता के बाद घर की जिम्मेदारियों को संभालने के लिए वे बतौर आयकर आयुक्त काम करने लगे। लेकिन उन्हें अपना सपना पूरा करना था। उनका यह सपना अब जुनून बन गया था।
अनिल ने बिना कोचिंग के पास की परीक्षा (IAS Success Story)
अनिल की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी, जिसकी वजह से उनके लिए कोचिंग की महंगी फीस भरना मुश्किल था। ऐसे में उन्होंने 2018 के बाद कोचिंग नहीं ली, बल्कि खुद से ही तैयारी की। अनिल ने अपने तीसरे प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा दी और इस बार उन्होंने सफलता प्राप्त की। अपने तीसरे प्रयास में अनिल ने 45वीं रैंक प्राप्त कर आईएएस बनने का सपना पूरा किया।



