Betul News Today: झल्लार पेट्रोल पंप प्रकरण: रिश्वतखोरी के आरोप में कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी निलंबित
Betul News Today: बैतूल जिले के झल्लार क्षेत्र में एक पेट्रोल पंप से जुड़ा विवाद सुर्खियों में आ गया है। यह विवाद उस समय सामने आया था जब पेट्रोल पंप संचालक ने आरोप लगाया कि निरीक्षण के बहाने उनका पंप सील कर दिया गया। बाद में उसे दोबारा खोलने के लिए रिश्वत की मांग की गई। मामला सीधे तौर पर भ्रष्टाचार से जुड़ा था। जिस पर जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए आरोपी अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
पेट्रोल पंप पर हुई थी कार्रवाई
झल्लार में स्थित रूद्रानी किसान सेवा केंद्र पेट्रोल पंप की जांच 29 जुलाई 2025 को कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी धरमदास द्वारा की गई थी। इस जांच के दौरान कई बिंदुओं पर सवाल उठाए गए और पेट्रोल पंप को सील कर दिया गया।
पंप संचालक नयन कुमार आर्य का आरोप है कि सील करने की कार्रवाई पूरी तरह अनुचित थी और इसके बाद अधिकारी ने पंप को डी-सील करने के नाम पर उनसे रिश्वत मांगी।

संचालक की शिकायत और सबूत
पेट्रोल पंप संचालक ने मामला दबाने की बजाय इसकी जानकारी सीधे कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी को दी। शिकायत के साथ ही उन्होंने एक ऐसा वीडियो भी प्रस्तुत किया, जिसमें रिश्वत मांगने और लेने की बात साफ दिखाई दे रही थी। वीडियो सामने आने के बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया और जिला प्रशासन हरकत में आ गया।
कलेक्टर की सख्त कार्रवाई
कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने शिकायत और वीडियो को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जांच कराई। प्रारंभिक स्तर पर आरोपों की पुष्टि होते ही उन्होंने कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी धरमदास को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया।
कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। किसी भी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा रिश्वत लेने जैसी हरकत की जाएगी तो उस पर तुरंत सख्त कदम उठाए जाएंगे।
ग्रामीणों और आम जनता की प्रतिक्रिया
इस मामले ने स्थानीय लोगों में भी हलचल पैदा कर दी है। ग्रामीणों का कहना है कि आमतौर पर पेट्रोल पंप पर कार्रवाई की वजह से उन्हें ही दिक्कतें उठानी पड़ती हैं। लेकिन अगर अधिकारी ही भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाएं तो यह जनता के विश्वास को तोड़ने वाली स्थिति है।
लोगों ने जिला प्रशासन की इस कार्रवाई की सराहना की और उम्मीद जताई कि भविष्य में भी इस तरह के मामलों में बिना किसी दबाव के कठोर कदम उठाए जाएंगे।
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भ्रष्टाचार पर प्रशासन का सख्त संदेश
यह प्रकरण केवल एक पेट्रोल पंप या एक अधिकारी तक सीमित नहीं है। यह पूरे जिले के लिए एक बड़ा संदेश है कि अगर कोई अधिकारी भ्रष्टाचार करेगा तो उसे परिणाम भुगतने होंगे। कलेक्टर द्वारा की गई इस कार्रवाई को प्रशासनिक सख्ती का उदाहरण माना जा रहा है, जो अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों को भी चेतावनी देता है।
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खाद्य विभाग की छवि पर सवाल
इस घटना ने खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर इस विभाग के अधिकारी निरीक्षण और जांच के नाम पर पेट्रोल पंप संचालकों पर दबाव डालते हैं। कई बार यह दबाव भ्रष्टाचार का रूप ले लेता है। झल्लार प्रकरण ने यह साफ कर दिया है कि अब ऐसे मामलों को हल्के में नहीं लिया जाएगा।
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कार्रवाई से लोगों में गया सकारात्मक संदेश
इस कार्रवाई से लोगों में एक सकारात्मक संदेश गया है। जनता को लगने लगा है कि अगर वे सही तरीके से शिकायत करेंगे और सबूत देंगे तो प्रशासन उनके साथ खड़ा होगा। पेट्रोल पंप संचालक के साहस ने भी यह उदाहरण पेश किया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने से बदलाव संभव है।
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