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जापान के साथ पाढर अस्पताल का 43.74 लाख की सहायता का हुआ करार

  • उत्तम मालवीय, बैतूल © 9425003881
    मुंबई स्थित जापान के महा वाणिज्यदूत डॉ. फुकाहोरी यासुकाता ने 21 फरवरी, 2022 को बैतूल के पाढर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजीव चौधरी के साथ अनुदान अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। इसमें जापान सरकार अपनी स्वास्थ्य परियोजना के तहत 4373324 रुपये (US$ 58.781) की सहायता पाढर अस्पताल को मुहैया करा रही है। यह सहायता चिकित्सा उपकरण के लिए दी जा रही है।

    पाढर अस्पताल में आयोजित हस्ताक्षर समारोह में जापान के काउंसल जनरल डॉ. यासुकाता फुकाहोरी एवं काउंसल फॉर कल्चर एंड इनफार्मेशन के नोरिताका ताउची उपस्थित हुए। इस कार्यक्रम में सांसद डीडी उइके भी उपस्थित हुए।

    डॉ. यासुकाता फुकाहोरी ने अपने उद्बोधन में पाढर चिकित्सालय के कार्य तथा मानव जाति के लिए अपनी सेवाएँ, विशेष करके गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले बीमारों की मदद को सराहा तथा भविष्य में निरंतर सहायता प्रदान करते रहने का भरोसा दिया। उन्होंने इस भारतीय-जापानी संबंध पर अपनी उत्सुकता जताई।

    वहीं नोरीताका ताउची ने कहा कि वह हमेशा इस प्रकार के सहयोग के लिए तत्पर रहते हैं। भारत में इस प्रकार के सहयोग के चयन एवं अंतिम रूप प्रदान करने के लिए विभिन्न क्राइटेरिया भी उन्होंने बताए। संसद श्री उइके ने रक्त के विभिन्न घटकों की महत्वपूर्णता तथा जरुरत के समय उनकी आवश्यकता पर जानकारी दी।

    उन्होंने इस पाढर अस्पताल की भारतीय-जापानी संबंध को बहुत सराहा तथा जापानी अतिथियों को इस सराहनीय योगदान के लिय धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि भारत के इस हिस्से के गरीब एवं जरुरतमंदों के लिए यह एक बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर के भारतीय-जापानी राजनयिक सम्बन्धों के बारे में भी चर्चा की।

    मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. राजीव चौधरी ने पाढर अस्पताल की ओर से उपस्थित अतिथियों को इस सहायता हेतु अपना धन्यवाद प्रेषित किया। इस सहायता के द्वारा बहुत से गरीब एवं जरुरतमंदों की जानें बचाई जा सकेंगी। उन्होंने अपने उद्बोधन में सात वर्ष पूर्व जापानी दूतावास द्वारा ऑक्सीजन प्लांट, ICU तथा NICU के नवीनीकरण में सहायता का भी उल्लेख किया और बताया कि किस प्रकार इससे बहुत से मरीजों की जान बच सकी।

    कार्यक्रम में पूर्व में प्रदान किए गए ऑक्सीजन प्लांट तथा इससे गरीब एवं जरुरतमंदों की सहायता, रक्त के विभिन घटकों एवं उनकी महत्वपूर्णता, ठाठ हर्मोनिक्स-स्काल्पल का महत्वूर्ण उपयोग तथा उससे शल्यक्रिया में सहायता आदि पर प्रेजेंटेशन और पर विचार प्रस्तुत किए गए।

    अंत में अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए एवं फाइलों का आदान प्रदान डॉ. यासुकाता फुकाहोरी तथा डॉ. राजीव चौधरी के बीच किया गया। अंत में संदीप परमार्थ के द्वारा प्रर्थना के साथ यह कार्यक्रम सम्पादित हुआ।

    इधर जापान के मुंबई स्थित दूतावास से जारी प्रेस नोट में बताया गया है कि इस अनुदान से पाढर अस्पताल हार्मोनिक्स के साथ इलेक्ट्रोसर्जिकल यूनिट (1unit), ब्लड कंपोनेंट बैंक इक्विपमेंट (1unit) जैसे चिकित्सा उपकरण खरीदेगा। जिसका उपयोग सर्जरी और रक्त आधान के लिए किया जाएगा। परियोजना न्यूनतम रक्त हानि और रक्त घटक आधान के साथ सुरक्षित सर्जरी प्रदान करने में मदद करेगी।

    जापान की मदद से पाढर अस्पताल को मिलेगी हर्मोनिक्स स्काल्पल मशीन व अन्य उपकरण

    वर्ष 1991 से मुंबई में जापान के महावाणिज्य दूतावास ने महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गोवा के पांच राज्यों में ग्रासरूट प्रोजेक्ट्स (जीजीपी) योजना के लिए अनुदान सहायता के तहत लगभग 7.12 मिलियन अमेरिकी डॉलर की कुल 104 परियोजनाओं को लागू किया है।

    जापान सरकार ने आधिकारिक विकास सहायता (ODA) के एक भाग के रूप में ‘ग्रासरूट प्रोजेक्ट्स के लिए अनुदान सहायता’ (GGP) योजना के तहत इस अनुदान को बढ़ाया है। जीजीपी योजना गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के साथ-साथ गैर-लाभकारी संगठनों को लचीली और समय पर सहायता प्रदान करती है। हालांकि, इसके मुख्य दायरे में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल, प्राथमिक शिक्षा, गरीबी उन्मूलन, पर्यावरण संरक्षण, लोक कल्याण, महिला सशक्तिकरण आदि शामिल हैं।

  • उत्तम मालवीय

    मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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