EPS Pension Calculation Formula: रिटायरमेंट के बाद कितनी मिलेगी पेंशन? आसान भाषा में समझें EPS पेंशन कैलकुलेशन फॉर्मूला
EPS Pension Calculation Formula: नौकरी करने वाले हर व्यक्ति के मन में यह सवाल जरूर होता है कि रिटायरमेंट के बाद उसका गुजारा कैसे चलेगा। सालों तक सैलरी से कटने वाली रकम आखिर कहां जाती है और उससे भविष्य में कितना फायदा मिलेगा, यह बात बहुत कम लोग साफ तौर पर समझ पाते हैं। प्रोविडेंट फंड और पेंशन योजना को लेकर अक्सर भ्रम बना रहता है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के नियमों के तहत EPF और EPS दोनों अलग-अलग भूमिकाएं निभाते हैं। इन्हीं नियमों के आधार पर आपकी पेंशन तय होती है और परिवार को सुरक्षा मिलती है।
EPF और EPS क्या हैं
नौकरीपेशा कर्मचारियों की सैलरी से हर महीने एक निश्चित हिस्सा भविष्य के लिए बचत के रूप में जमा किया जाता है। इसे प्रोविडेंट फंड कहा जाता है। EPF यानी कर्मचारी भविष्य निधि वह राशि होती है, जिसे कर्मचारी अपनी नौकरी के दौरान जमा करता है और जरूरत पड़ने पर या रिटायरमेंट के समय निकाल सकता है। इसके उलट EPS यानी कर्मचारी पेंशन योजना का मकसद रिटायरमेंट के बाद हर महीने तय आय उपलब्ध कराना होता है।
वेतन से कटने वाली रकम का ऐसा बंटवारा
कर्मचारी की बेसिक सैलरी और डीए का 12 प्रतिशत हिस्सा सीधे EPF खाते में जमा होता है। वहीं, नियोक्ता भी कर्मचारी के लिए 12 प्रतिशत योगदान देता है, लेकिन यह रकम दो हिस्सों में बांटी जाती है। नियोक्ता के योगदान का 8.33 प्रतिशत कर्मचारी पेंशन योजना में जाता है, जबकि शेष 3.67 प्रतिशत EPF खाते में जमा होता है। पेंशन के लिए अधिकतम वेतन सीमा 15,000 रुपये तय की गई है। अगर किसी कर्मचारी का वेतन इससे ज्यादा भी है, तो भी पेंशन की गणना इसी सीमा के आधार पर की जाती है।
कैसे तय होती है पेंशन की राशि
पेंशन की रकम इस बात पर निर्भर नहीं करती कि खाते में कुल कितना पैसा जमा हुआ है। इसके लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने एक तय फॉर्मूला बना रखा है। पेंशन योग्य वेतन और पेंशन योग्य सेवा के आधार पर मासिक पेंशन तय होती है। इसका फार्मूला है, पेंशन योग्य वेतन को पेंशन योग्य सेवा से गुणा करके 70 से भाग दिया जाता है। इसी के आधार पर हर महीने मिलने वाली पेंशन तय होती है।
रिटायरमेंट के बाद पेंशन का लाभ
आमतौर पर कर्मचारी को 58 वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद पेंशन मिलनी शुरू होती है। यह पेंशन जीवनभर दी जाती है और बुढ़ापे में नियमित आय का सहारा बनती है। सरकार ने यह भी तय किया है कि न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपये से कम नहीं होगी, ताकि कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों को भी आधारभूत सुरक्षा मिल सके।
मृत्यु के बाद परिवार को सुरक्षा
EPS की सबसे अहम खासियत परिवार को मिलने वाली पेंशन है। अगर किसी कर्मचारी की सेवा के दौरान या पेंशन शुरू होने के बाद मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार को पेंशन मिलती है। नियमों के अनुसार, कर्मचारी की पत्नी या पति को उसकी पेंशन का 50 प्रतिशत हिस्सा जीवनभर मिलता है। इससे परिवार को आर्थिक सहारा बना रहता है।
बच्चों को मिलने वाली पेंशन
पेंशन योजना के तहत परिवार के दो बच्चों को भी पेंशन का लाभ दिया जाता है। प्रत्येक बच्चे को सदस्य की पेंशन का 25 प्रतिशत हिस्सा बाल पेंशन के रूप में मिलता है। यह पेंशन बच्चों को 25 वर्ष की उम्र तक दी जाती है। अगर बच्चे अनाथ हो जाते हैं, तो पेंशन की यह राशि बढ़ाकर 75 प्रतिशत तक कर दी जाती है, ताकि उनकी देखभाल में कोई कमी न रहे।
अर्ली और हायर पेंशन का विकल्प
कर्मचारी चाहें तो 58 वर्ष से पहले भी पेंशन ले सकते हैं। 50 साल की उम्र के बाद अर्ली पेंशन का विकल्प मौजूद है, लेकिन इसमें हर साल 4 प्रतिशत की कटौती होती है। वहीं, अगर कर्मचारी 58 साल के बाद भी काम जारी रखता है और पेंशन लेने में देरी करता है, तो उसकी पेंशन में हर साल 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रावधान है।
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