Kapaas Kharidi 2025: समर्थन मूल्य पर कपास बेचने किसानों को करना होगा यह काम, वर्ना नहीं मिलेगा लाभ
Kapaas Kharidi 2025: कपास किसान अगर अपनी उपज एमएसपी पर बेचना चाहते हैं तो उन्हें सबसे पहले आधार के जरिए पंजीकरण करना होगा। यह पंजीकरण ‘कपास-किसान’ मोबाइल ऐप से या फिर खरीद केंद्र पर जाकर किया जा सकता है। पंजीकरण के समय किसान को अपने बैंक खाते का विवरण भी देना होगा ताकि भुगतान सीधे खाते में जा सके।
यदि किसान पंजीकरण नहीं कराते हैं तो उन्हें एमएसपी पर उपज बेचने का लाभ नहीं मिलेगा। इस वजह से मंत्रालय ने पहले ही किसानों को सलाह दी है कि वे समय रहते पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करें। इसी तारतम्य में नई दिल्ली में केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में कपास किसानों से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। यह बैठक आगामी खरीफ विपणन सीजन 2025-26 की तैयारियों को लेकर बुलाई गई थी।
बिना किसी बाधा के हो Kapaas Kharidi 2025
बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि 1 अक्टूबर 2025 से शुरू होने वाले कपास खरीद सीजन में न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी पर किसानों की उपज की खरीद बिना किसी बाधा के हो और किसानों को समय पर उचित भुगतान मिले।

Kapaas Kharidi 2025 को लेकर यह आश्वासन
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने स्पष्ट किया कि सरकार कपास किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि एमएसपी दिशा-निर्देशों के तहत आने वाली सारी कपास की खरीद पारदर्शी तरीके से की जाएगी। सरकार का ध्यान यह सुनिश्चित करने पर होगा कि किसानों को अपनी उपज का लाभकारी मूल्य मिले और भुगतान की प्रक्रिया तेज, सुरक्षित और सरल रहे।
Kapaas Kharidi 2025 प्रक्रिया पूर्णत: पेपरलेस
उन्होंने यह भी बताया कि सरकार डिजिटल इंडिया अभियान के अनुरूप कपास की खरीद प्रक्रिया को पूरी तरह फेसलेस और पेपरलेस बना चुकी है। इसका मतलब है कि किसान को अपनी उपज बेचने और भुगतान प्राप्त करने के लिए अब बिचौलियों या कागजी कार्रवाई पर निर्भर नहीं रहना होगा।
Kapaas Kharidi 2025 के लिए रिकॉर्ड खरीद केंद्र
इस साल पहली बार कपास खरीद केंद्रों की स्थापना के लिए समान मानक तय किए गए हैं। इन मानकों में कपास उत्पादन क्षेत्र, कार्यशील एपीएमसी यार्ड की उपलब्धता और कपास खरीद केंद्र के पास कम से कम एक प्रसंस्करण कारखाना होना शामिल है। इन आधारों पर देशभर में 550 खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं, जो अब तक की सबसे बड़ी संख्या है।

Kapaas Kharidi 2025 की तारीखें राज्यों के हिसाब से
खरीद की तारीखें भी राज्यों के हिसाब से तय की गई हैं। उत्तरी राज्यों में 1 अक्टूबर से, मध्य राज्यों में 15 अक्टूबर से और दक्षिणी राज्यों में 21 अक्टूबर 2025 से कपास की खरीद शुरू होगी। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए पहले से तैयारी का मौका मिलेगा।
Kapaas Kharidi 2025 के लिए मोबाइल ऐप से पंजीकरण
कपास किसानों के लिए एक नया मोबाइल ऐप शुरू किया गया है, जिसका नाम ‘कपास-किसान’ रखा गया है। इस ऐप के माध्यम से किसान अपना आधार-आधारित पंजीकरण कर सकेंगे। इतना ही नहीं, वे सात दिनों का स्लॉट भी बुक कर पाएंगे कि किस दिन और किस समय वे अपनी उपज खरीद केंद्र पर लेकर जाएं।
Kapaas Kharidi 2025 ऐप का यह उद्देश्य
इस ऐप का उद्देश्य है कि खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़े और भीड़भाड़ से बचा जा सके। किसान को तय तारीख और समय पर ही अपनी उपज लानी होगी, जिससे लंबी कतारें और अव्यवस्था से बचाव होगा। इसके अलावा, इस डिजिटल प्रणाली से किसानों को भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में राष्ट्रीय स्वचालित समाशोधन गृह यानी एनएसीएच के जरिए मिलेगा।
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Kapaas Kharidi 2025 भुगतान की पूरी पारदर्शिता
सरकार ने आश्वासन दिया है कि किसानों को भुगतान सीधे उनके बैंक खाते में किया जाएगा। पिछले साल शुरू की गई एसएमएस-आधारित सूचना प्रणाली इस बार भी जारी रहेगी। यानी जैसे ही किसान का भुगतान होगा, उसे मोबाइल पर संदेश आ जाएगा। इससे किसान को बैंक या मंडी के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं रहेगी और लेन-देन पूरी तरह पारदर्शी रहेगा।
Kapaas Kharidi 2025 की शिकायतों के लिए नई व्यवस्था
किसानों की समस्याओं और शिकायतों को तुरंत सुलझाने के लिए इस बार मंडी स्तर पर स्थानीय निगरानी समितियां बनाई जाएंगी। इन समितियों में स्थानीय प्रतिनिधियों और अधिकारियों को शामिल किया जाएगा।
इसके अलावा, प्रत्येक राज्य में एक हेल्पलाइन शुरू होगी जहां किसान अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। साथ ही भारतीय कपास निगम यानी सीसीआई की एक केंद्रीय हेल्पलाइन भी पूरी खरीदी अवधि के दौरान सक्रिय रहेगी।
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Kapaas Kharidi 2025 से पहले पूरी तैयारी
बैठक में तय किया गया कि कपास सीजन शुरू होने से पहले सभी राज्यों में पर्याप्त जनशक्ति तैनात की जाएगी। इसके साथ ही खरीद केंद्रों पर बुनियादी ढांचे जैसे गोदाम, तौल मशीन, प्रसंस्करण कारखाने और परिवहन सुविधा की व्यवस्था की जाएगी। सरकार चाहती है कि जब किसान अपनी उपज लेकर पहुंचे तो उसे किसी भी तरह की परेशानी न हो।
एमएसपी व्यवस्था से नहीं होता नुकसान
कपास किसानों की आय अक्सर बाजार में कीमत घटने से प्रभावित होती है। ऐसे में एमएसपी व्यवस्था उनके लिए सुरक्षा कवच का काम करती है। अगर बाजार में कीमत गिर भी जाती है, तो सरकार किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उनकी उपज खरीद लेती है। इससे किसानों को नुकसान नहीं होता और उनकी आय स्थिर रहती है।
डिजिटल व्यवस्था से अब किसानों को यह भरोसा भी मिला है कि उनकी उपज का पैसा समय पर मिलेगा और कोई बिचौलिया उन्हें परेशान नहीं कर पाएगा।
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