PM SVANidhi Scheme: प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना में बड़े बदलाव, हितग्राहियों को वापस होगा काटा गया पैसा, ब्याज दर भी तय
PM SVANidhi Scheme: कोविड-19 महामारी के बाद सबसे ज्यादा असर जिन लोगों पर पड़ा, उनमें शहरों की सड़कों पर मेहनत से रोज़ी कमाने वाले रेहड़ी-पटरी वाले सबसे आगे रहे। छोटा सा कारोबार, सीमित पूंजी और रोज़ की आमदनी पर निर्भर जीवन अचानक ठहर गया। ऐसे समय में केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना शुरू की थी, ताकि छोटे व्यापारियों को दोबारा खड़ा होने का सहारा मिल सके। अब इस योजना में किए गए अहम बदलावों से मध्यप्रदेश के स्ट्रीट वेंडर्स को वास्तविक राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना का उद्देश्य
प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना एक माइक्रो-क्रेडिट योजना है, जिसे खास तौर पर रेहड़ी-पटरी लगाने वाले छोटे व्यापारियों के लिए तैयार किया गया था। इसका मूल मकसद उन्हें बिना किसी गारंटी के कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपना काम दोबारा शुरू कर सकें या आगे बढ़ा सकें। इस योजना के जरिए छोटे दुकानदारों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा गया, जिससे वे साहूकारों पर निर्भर न रहें।
योजना के तहत ऐसी है लोन की व्यवस्था
योजना को तीन चरणों में लागू किया गया है। पहले चरण में पात्र हितग्राही को 10 हजार रुपये का लोन दिया जाता था। इस राशि को समय पर चुकाने पर दूसरे चरण में 20 हजार रुपये और उसके बाद तीसरे चरण में 50 हजार रुपये तक का लोन मिलने का प्रावधान था। इसका उद्देश्य यह था कि जो व्यापारी समय पर भुगतान करता है, उसकी क्रेडिट हिस्ट्री मजबूत हो और उसे ज्यादा राशि मिल सके।
केंद्र से ब्याज सब्सिडी का प्रावधान
इस योजना की सबसे खास बात ब्याज सब्सिडी है। केंद्र सरकार लोन पर 7 प्रतिशत की ब्याज सब्सिडी देती है। इसके अलावा बैंक द्वारा लगाए गए अतिरिक्त ब्याज का भार राज्य सरकार उठाती है। इस तरह यह योजना व्यवहार में लगभग शून्य ब्याज वाली बन जाती है। सब्सिडी की राशि सीधे हितग्राही के लोन खाते में डीबीटी के माध्यम से जमा की जाती है।
डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा
डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के लिए योजना में कैशबैक की व्यवस्था भी की गई। पात्र हितग्राही को सालाना 1200 रुपये तक का कैशबैक दिया जाता है, जिससे वे यूपीआई, क्यूआर कोड और अन्य डिजिटल माध्यमों से लेन-देन करने के लिए प्रेरित हों।
पुराना लोन चुकाने पर नए अवसर
योजना के नियमों के अनुसार यदि कोई हितग्राही तीन महीने के भीतर लोन की मूल राशि चुका देता है, तो वह अगली बड़ी राशि के लोन के लिए पात्र हो जाता है। यही कारण है कि यह योजना केवल सहायता नहीं, बल्कि छोटे व्यापारियों को आगे बढ़ाने का माध्यम भी बनी।
मध्यप्रदेश में बैंकों की मनमानी
मध्यप्रदेश में इस योजना के तहत 32 सरकारी और निजी बैंक लोन वितरित कर रहे थे। नियम यह था कि बैंक हर तीन महीने में सरकार से ब्याज सब्सिडी का दावा करें और यह राशि सीधे हितग्राही के खाते में पहुंचे। लेकिन व्यवहार में कई बैंकों ने इस प्रक्रिया का सही तरीके से पालन नहीं किया।
ब्याज कटौती से पैदा हुई समस्या
कई बैंकों ने आसान रास्ता अपनाते हुए लोन देते समय ही अनुमानित ब्याज की राशि काट ली। इसके बाद सरकार से सब्सिडी का दावा करने में भी देरी की गई। कई मामलों में छह महीने या उससे ज्यादा समय तक क्लेम नहीं किया गया। इस दौरान कुछ हितग्राहियों के लोन खाते बंद हो गए और सब्सिडी की रकम उन्हें मिल ही नहीं पाई।
हितग्राहियों पर बेवजह बढ़ा बोझ
इस व्यवस्था का सीधा नुकसान रेहड़ी-पटरी वालों को हुआ। उन्हें तय राशि से कम लोन मिला और जिस ब्याज को सरकार को वहन करना था, वह भी उन्हें चुकाना पड़ा। इससे योजना के प्रति नाराजगी बढ़ी। कई लोग पहला 10 हजार रुपये का लोन चुकाने के बाद दूसरे चरण के लोन के लिए आगे आने से हिचकने लगे।
केंद्र की सहमति से हुए अहम बदलाव
केंद्र सरकार की सहमति के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना में कई बड़े सुधार किए हैं। इन बदलावों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि योजना का पूरा लाभ सीधे स्ट्रीट वेंडर्स तक पहुंचे।
14 प्रतिशत ब्याज दर की सीमा तय
अब कोई भी बैंक इस योजना के तहत 14 प्रतिशत से अधिक ब्याज नहीं वसूल सकेगा। इससे बैंकों की मनमानी पर रोक लगेगी और हितग्राहियों को राहत मिलेगी।
अब नहीं की जा सकेगी अग्रिम ब्याज कटौती
नई व्यवस्था के तहत बैंक अब लोन देते समय ब्याज की रकम पहले से नहीं काट सकेंगे। हितग्राही को पूरी स्वीकृत राशि मिलेगी और ब्याज सब्सिडी तय समय पर उसके खाते में पहुंचेगी।
पहले वसूले गए पैसे की वापसी
जिन हितग्राहियों से पहले ब्याज की राशि काटी गई थी, उनकी पहचान कर लगभग 120 करोड़ रुपये की रकम उनके खातों में वापस की जाएगी। इससे हजारों छोटे व्यापारियों को सीधा फायदा मिलेगा।
लोन राशि में की गई बढ़ोतरी
योजना को और प्रभावी बनाने के लिए लोन की रकम भी बढ़ाई गई है। अब पहले चरण में 10 हजार की जगह 15 हजार रुपये, दूसरे चरण में 20 हजार की जगह 25 हजार रुपये और तीसरे चरण में 50 हजार रुपये का लोन मिलेगा।
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क्रेडिट कार्ड की सुविधा
जो हितग्राही समय पर लोन चुकाते हैं, उन्हें क्रेडिट कार्ड की सुविधा भी दी जा रही है। इससे उन्हें भविष्य में वित्तीय जरूरतों के लिए अतिरिक्त सहारा मिलेगा।
डिजिटल कैशबैक जारी रहेगा
डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए कैशबैक की व्यवस्था जारी रहेगी। फुटकर व्यापार करने वालों को सालाना 1200 रुपये और थोक व्यापारियों को 400 रुपये तक का कैशबैक मिलेगा।
इन योजनाओं से भी जोड़े जा रहे हितग्राही
प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के साथ-साथ स्ट्रीट वेंडर्स और उनके परिवारों को जन-धन योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, जीवन ज्योति बीमा योजना, श्रम योगी मानधन, वन नेशन वन राशन कार्ड और मातृ वंदना जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से भी जोड़ा जा रहा है।
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