MP Urban Tax Hike: मध्यप्रदेश के शहरों में बढ़ने वाले हैं टैक्स, सरकार ने निकायों को दिए यह पॉवर
MP Urban Tax Hike: मध्यप्रदेश में नगरीय निकायों की यह आम समस्या है कि उन्हें शहरों से जरुरत के अनुसार रेवेन्यू नहीं मिल पाता है। ऐसे में प्रदेश सरकार ने नगरीय निकायों की आय बढ़ाने के लिए बड़ा निर्णय लिया है। अब प्रदेश के सभी नगरीय निकाय जलकर और अन्य उपभोक्ता प्रभारों में हर साल बढ़ोतरी कर सकेंगे। इससे नगरीय निकाय जरुरत के अनुसार इनमें वृद्धि करके राजस्व प्राप्त कर सकेंगे।
इसके लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने मध्यप्रदेश नगर पालिका जल प्रदाय, मलजल तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सेवाओं से संबंधित प्रभार नियम 2020 में संशोधन कर दिया है। इस संशोधन का गजट नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है। संशोधन के अनुसार अब नगरीय निकाय अपने क्षेत्र में जल प्रभार, कचरा कलेक्शन और अन्य सेवाओं से जुड़े शुल्कों को सालाना अधिकतम 25 प्रतिशत तक बढ़ा सकेंगे। इससे नगर पालिकाओं और नगर निगमों को अतिरिक्त राजस्व उपलब्ध हो सकेगा। जिससे वे बेहतर सुविधाएं मुहैया करा सकेंगे।
टैक्स बढ़ोतरी के लिए यह शर्त भी रखी
नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि वही नगरीय निकाय शुल्कों में बढ़ोतरी कर सकेंगे जहां पिछले पांच वर्षों से जलकर या अन्य उपभोक्ता शुल्कों में किसी प्रकार का इजाफा नहीं हुआ है। ऐसे निकायों को यह अधिकार दिया गया है कि वे उपभोक्ता प्रभार की मौजूदा दरों में किसी एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 25 प्रतिशत तक वृद्धि कर सकें।

इन कारणों से नहीं बढ़ाए जाते थे शुल्क
पूर्व में कई बार प्रशासन की ओर से जलकर और अन्य सेवाओं के शुल्क बढ़ाने के प्रस्ताव नगर परिषद या नगर निगम की बैठकों में लाए गए, लेकिन अधिकांश मामलों में ये प्रस्ताव पास नहीं हो पाए। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही इस तरह की बढ़ोतरी का विरोध करते रहे हैं। जनप्रतिनिधियों का मानना रहता है कि करों और शुल्कों में बढ़ोतरी से लोग नाराज हो जाते हैं और इसका असर सीधे चुनावों पर पड़ सकता है।
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सेवाओं की गुणवत्ता पर भी सवाल
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश के अधिकांश नगरीय निकायों में जल प्रदाय और कचरा प्रबंधन जैसी मूलभूत सेवाओं की गुणवत्ता पहले से ही संतोषजनक नहीं है। यदि इनमें सुधार किए बिना ही शुल्क बढ़ा दिए जाते हैं तो विरोध होना तय है। आम लोगों की यह राय है कि जब तक पानी की आपूर्ति नियमित और पर्याप्त नहीं होगी या कचरे का प्रबंधन समय पर और व्यवस्थित नहीं होगा, तब तक अतिरिक्त पैसा देना उचित नहीं लगता।
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अच्छी सुविधा मिले तो क्यों करेंगे इंकार
जानकार मानते हैं कि यदि नगरीय निकाय अपनी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करें और नागरिकों को समय पर तथा बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराएं, तो लोग शुल्क बढ़ोतरी का विरोध नहीं करेंगे। वे स्वेच्छा से बढ़ा हुआ शुल्क चुकाने के लिए तैयार रहेंगे। बेहतर और नियमित सेवाएं सीधे नागरिकों के जीवन की सुविधा से जुड़ी होती हैं।

निकायों को मिलेंगे अतिरिक्त संसाधन
राज्य सरकार की सोच है कि इस संशोधन से नगरीय निकायों को वित्तीय रूप से अधिक सक्षम बनाया जाए। अभी तक उन्हें कई योजनाओं और सेवाओं के लिए सीमित बजट पर निर्भर रहना पड़ता था। शुल्क बढ़ोतरी से उनके पास अतिरिक्त संसाधन आएंगे, जिन्हें जल आपूर्ति, मलजल प्रबंधन और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में खर्च किया जा सकेगा। इससे नगरीय निकायों की कार्यप्रणाली में सुधार होगा और लोगों को सेवाएं भी पहले से बेहतर मिलेंगी।
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