Ladli Behna Yojana: लाड़ली बहनों के लिए बड़ा फैसला, कैबिनेट ने दी मंजूरी, नवंबर माह की तारीख भी तय
Ladli Behna Yojana: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में सोमवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में महिलाओं को आर्थिक रूप से और मजबूत बनाने के उद्देश्य से चलाई जा रही मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना को लेकर बड़ा फैसला लिया गया। नवंबर माह में योजना की राशि ट्रांसफर करने की तारीख भी तय कर दी गई है। इसके साथ ही अन्य कई महत्वपूर्ण फैसले भी लिए गए।
कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की मासिक सहायता राशि बढ़ाने का निर्णय लिया गया। अब लाड़ली बहनों को हर महीने 1250 रुपये की जगह 1500 रुपये दिए जाएंगे। मंत्रि-परिषद ने इस प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है। नवंबर माह की योजना की राशि 12 नवंबर को सिवनी में आयोजित कार्यक्रम में लाड़ली बहनों को ट्रांसफर की जाएगी। इस महीने लगभग 1 करोड़ 26 लाख हितग्राहियों को योजना का लाभ मिलेगा।
एक हजार रुपये से हुई थी शुरूआत
यह योजना मार्च 2023 में शुरू की गई थी। शुरुआत में पात्र बहनों को प्रतिमाह 1000 रुपये सहायता दी जाती थी। इसके बाद सितंबर 2023 में इसमें 250 रुपये की बढ़ोतरी करते हुए राशि 1250 रुपये की गई। अब एक बार फिर 250 रुपये और जोड़े जा रहे हैं। नई सहायता राशि नवंबर 2025 से लागू होगी।

राज्य सरकार पर इतना अतिरिक्त खर्च
इस बढ़ोतरी के बाद राज्य सरकार पर वित्तीय वर्ष 2025-26 में मौजूदा बजट के अलावा करीब 1,793 करोड़ 75 लाख रुपये का अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ेगा। अगले वित्तीय वर्ष में इस योजना पर कुल संभावित व्यय 20,450 करोड़ 99 लाख रुपये तक पहुंच सकता है।
सरकारी भवनों पर लगेंगे सोलर रूफटॉप
बैठक में ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर भी निर्णय लिया गया। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत अब प्रदेश के सभी सरकारी भवनों पर रेस्को पद्धति से सोलर रूफटॉप संयंत्र लगाए जाएंगे। इस मॉडल में किसी भी सरकारी विभाग को अपने बजट से निवेश करने की जरूरत नहीं होगी। ऊर्जा उपयोग के आधार पर विभागों को रेस्को विकासक को प्रति यूनिट राशि देनी होगी, जो स्थानीय डिस्कॉम की दरों से कम रहने की अपेक्षा है। इससे सरकारी विभागों को बिजली खर्च में बचत होने की संभावना है।
25 साल तक कंपनी ही करेगी मेंटेनेंस
रेस्को मॉडल में स्थापित संयंत्रों का संचालन और रखरखाव 25 वर्ष तक विकासक कंपनी द्वारा किया जाएगा। पहले यह व्यवस्था थी कि हर जिले के सरकारी भवनों के लिए अलग-अलग निविदाएं जारी होंगी, लेकिन अब मंत्रि-परिषद ने निर्णय लिया है कि पूरे प्रदेश के लिए संयुक्त निविदा जारी की जाएगी। वहीं जिन भवनों की बिजली क्षमता 20 किलोवाट से कम है, वहां भी रेस्को पद्धति से स्थापना होगी। साथ ही वन क्षेत्रों और दूरदराज के इलाकों में जहां ग्रिड नहीं है, वहां कैपेक्स मॉडल पर संयंत्र लगाने की अनुमति दी गई।
जिलों की बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ेगी
बैठक में प्रदेश के प्रमुख जिलों में सोलर रूफटॉप संयंत्र स्थापित किए जाने की कुल क्षमता भी बढ़ाई गई। भोपाल में 211 स्थानों पर 15 हजार 695 किलोवाट की क्षमता के संयंत्र लगाए जाएंगे। बुरहानपुर की 14 साइट्स पर 348 किलोवाट, छिंदवाड़ा की 31 साइट्स पर 1661 किलोवाट, देवास की 14 साइट्स पर 284 किलोवाट, ग्वालियर की 97 साइट्स पर 5267 किलोवाट, इंदौर की 106 साइट्स पर 3128 किलोवाट लगाए जाएंगे।
इसी तरह जबलपुर में 49 स्थानों पर 1432 किलोवाट, कटनी में 14 स्थानों पर 383 किलोवाट, खंडवा में 16 स्थानों पर 311 किलोवाट, मुरैना में 14 साइट्स पर 364 किलोवाट, रतलाम में 29 स्थानों पर 1229 किलोवाट, रीवा में 20 साइट्स पर 535 किलोवाट, सागर में 35 साइट्स पर 847 किलोवाट, सतना में 11 साइट्स पर 444 किलोवाट, सिंगरौली में 15 साइट्स पर 413 किलोवाट और उज्जैन में 24 स्थानों पर 714 किलोवाट क्षमता के सोलर संयंत्र स्थापित किए जाएंगे।
मांधाता में नए न्यायिक पदों को मंजूरी
खण्डवा जिले की मांधाता तहसील में न्याय व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए भी मंजूरी दी गई। यहां व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खण्ड के न्यायालय के लिए एक नए पद का सृजन किया जाएगा। साथ ही तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कुल छह पद और स्वीकृत किए गए। इस प्रकार कुल सात नए पदों की स्थापना होगी। इन पदों पर नियुक्ति से न्यायालय की कार्यक्षमता बढ़ने की उम्मीद है। इन पदों पर वेतन और अन्य खर्चों सहित कुल 52 लाख 76 हजार रुपये प्रतिवर्ष का अनुमानित वित्तीय भार आएगा।
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आचार्य शंकर से जुड़े संग्रहालय को नई मंजूरी
बैठक के दौरान ओंकारेश्वर में चल रही एकात्म धाम परियोजना को लेकर भी बड़ा निर्णय लिया गया। इस परियोजना के अंतर्गत बनाए जा रहे आचार्य शंकर संग्रहालय अद्वैत लोक और अन्य निर्माण कार्यों की पुनरीक्षित लागत को मंजूरी दी गई। मंत्रि-परिषद द्वारा 2424 करोड़ 369 लाख रुपये की संशोधित लागत को स्वीकृति प्रदान की गई है।
संस्कृति विभाग की इस महत्वपूर्ण परियोजना में आचार्य शंकर की 108 फीट ऊंची बहुधातु से बनी प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इसके अलावा आचार्य शंकर के जीवन और अद्वैत दर्शन पर आधारित अद्वैत लोक संग्रहालय, आचार्य शंकर अंतर्राष्ट्रीय वेदांत संस्थान और अद्वैत निलयम जैसे कई प्रमुख निर्माण कार्य शामिल हैं। इन सभी कार्यों का क्रियान्वयन मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम यानी एमपीटीसी के माध्यम से किया जाएगा।
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पहले इतनी राशि की थी मंजूरी
इस परियोजना के लिए वर्ष 2025 के जून माह में 2195 करोड़ 54 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई थी। बढ़ती लागत को देखते हुए अब संशोधित स्वीकृति दी गई है, जिससे इन सभी कार्यों को तेजी से पूरा किया जा सके।
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