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Rakshabandhan Celebrate: यहां पेड़ों को राखी बाँधकर मनाया रक्षाबन्धन पर्व, प्रकृति से जुड़ी है अनूठी परंपरा

Rakshabandhan Celebrate: Rakshabandhan festival celebrated here by tying rakhi to trees, unique tradition related to nature

धर्म संस्कृति व प्रकृति रक्षा का पर्व है रक्षाबन्धन: मोहन नागर

Rakshabandhan Celebrate: यहां पेड़ों को राखी बाँधकर मनाया रक्षाबन्धन पर्व, प्रकृति से जुड़ी है अनूठी परंपरा

Rakshabandhan Celebrate: (बैतूल)। भारत भारती आवासीय विद्यालय में रक्षाबन्धन अवकाश पर अपने घर जाने के पूर्व विद्यार्थियों व आचार्यों ने परिसर में लगे वृक्षों को राखी बाँधकर प्रकृति की रक्षा के संकल्प के साथ रक्षाबन्धन का पर्व मनाया। परिसर में स्थित अधिकांश वृक्ष पूर्व छात्रों द्वारा रोपित हैं। इन्हीं वृक्षों का पूजन कर छात्रों ने प्रकृति रक्षा का संकल्प लिया। इसके पूर्व सरस्वती मण्डपम में आयोजित समारोह में विद्यालय में अध्ययनरत बहिनों ने अपने सहपाठी विद्यार्थियों भैयाओं को राखी बाँधी।

Rakshabandhan Celebrate: यहां पेड़ों को राखी बाँधकर मनाया रक्षाबन्धन पर्व, प्रकृति से जुड़ी है अनूठी परंपराइस अवसर पर रक्षाबंधन पर्व का महत्व बताते हुए संस्था के सचिव मोहन नागर ने कहा कि रक्षाबन्धन का पर्व केवल भाई-बहिन का पर्व न होकर यह हमारे धर्म, संस्कृति, राष्ट्र व प्रकृति की रक्षा करने का संकल्प लेने का पर्व है। उन्होंने देश-धर्म व प्रकृति की रक्षा के लिए बलिदान देने वाले अनेक महापुरुषों की कथाएँ विधार्थियों को सुनाई।

कार्यक्रम में विद्यालय के प्राचार्य जितेन्द्र परसाई, प्रधानाचार्य वैभव जोशी सहित आचार्यगण व विद्यार्थियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का संचालन बहिन प्रतिष्ठा जोशी ने किया व आभार छात्रावास अधीक्षक मुकेश दवन्डे ने माना।

Rakshabandhan Celebrate: यहां पेड़ों को राखी बाँधकर मनाया रक्षाबन्धन पर्व, प्रकृति से जुड़ी है अनूठी परंपराअनेक स्थानों पर होते ऐसे आयोजन

उल्लेखनीय है कि बैतूल जिला हरियाली से आच्छादित है। यहां प्रचुर मात्रा में वन की उपलब्धता है। इसकी एक वजह यह भी है कि जिलेवासी प्रकृति प्रेमी हैं। वे वनों की रक्षा और हरियाली को बनाए रखने को लेकर बेहद गंभीर हैं। यही वजह है कि रक्षाबंधन जैसे पर्व भी प्रकृति से सहज ही जुड़ गए हैं। इसी कारण जिले में कई स्थानों पर रक्षाबंधन का पर्व पेड़ों को राखी बांध कर मनाया जाता है। इससे बच्चों का बचपन से ही प्रकृति से गहरा जुड़ाव हो जाता है।

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