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Bhagwat Katha Live: श्रीमद्भागवत कथा सुनना मात्र नहीं, कथा को श्रवण करके जीवन में आत्मसात करना श्रेष्ठ : कान्हा जी महाराज

Bhagwat Katha Live: श्रीमद्भागवत कथा सुनना मात्र नहीं, कथा को श्रवण करके जीवन में आत्मसात करना श्रेष्ठ : कान्हा जी महाराज

Bhagwat Katha Live: बैतूल जिला मुख्यालय के समीप ग्राम मलकापुर में चल रही श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह में दूसरे दिन की कथा में श्रीधाम वृंदावन से पधारे कथा प्रवक्ता परम पूज्य कान्हा जी महाराज ने बताया कि भागवत स्वयं कृष्ण है। श्रीमद्भागवत की कथा मानव जीवन को सदमार्ग में लाने वाली कथा है। श्रीमद् भागवत कथा सुनना भर श्रेष्ठ नहीं है, बल्कि श्रेष्ठ है श्रीमद् भागवत महापुराण की कथा को श्रवण करके जीवन में आत्मसात करना। भागवत हमारे जीवन में आचरण में आहार में व्यवहार में विचार में आ जाए, भागवत कथा सार्थक तभी होती है। पूज्य श्री कान्हा जी महाराज ने कुंती चरित्र श्रवण कराया। भक्त का भगवान के लिए जब समर्पण होता है तो उससे कई गुना ज्यादा भगवान का भक्त के ऊपर समर्पण होता है, बस स्मरण इतना रखें कि हमारे भक्ति में स्वार्थ कम जगत कल्याण का भाव ज्यादा हो यही भक्ति की सार्थकता है।

मनुष्य से गलती हो जाना बड़ी बात नहीं पर समय रहते सुधार आवश्यक

पूज्य कान्हा जी ने राजा परीक्षित का चरित्र श्रवण करते कराते हुए बताया कि मनुष्य से गलती हो जाना बड़ी बात नहीं। लेकिन, ऐसा होने पर समय रहते सुधार और प्रायश्चित जरूरी है। ऐसा नहीं हुआ तो गलती पाप की श्रेणी में आ जाती है। कथा का श्रवण कर रहे बद्रीप्रसाद वर्मा ने बताया कि पूज्य कान्हा जी ने राजा परीक्षित का चरित्र बड़े ही सुंदर ढंग से बताया।

Bhagwat Katha Live: श्रीमद्भागवत कथा सुनना मात्र नहीं, कथा को श्रवण करके जीवन में आत्मसात करना श्रेष्ठ : कान्हा जी महाराज

भक्ति एक उत्तम निवेश है

कथा व्यास कन्हा जी महाराज ने पांडवों के जीवन में होने वाली श्रीकृष्ण की कृपा को बड़े ही सुंदर ढंग से दर्शाया। कहा कि परीक्षित कलियुग के प्रभाव के कारण ऋषि से श्रापित हो जाते हैं। उसी के पश्चाताप में वह शुकदेव जी के पास जाते हैं। भक्ति एक ऐसा उत्तम निवेश है, जो जीवन में परेशानियों का उत्तम समाधान देती है। साथ ही जीवन के बाद मोक्ष भी सुनिश्चित करती है।

कथा में तुलसी पूजा महोत्सव मनाया गया (Bhagwat Katha Live)

कान्हा महाराज ने कहा कि गलती करने के बाद क्षमा मांगना मनुष्य का गुण है, लेकिन जो दूसरे की गलती को बिना द्वेष के क्षमा कर दे, वो मनुष्य महात्मा होता है। जिसके जीवन में श्रीमद्भागवत की बूंद पड़ी, उसके हृदय में आनंद ही आनंद होता है। भागवत को आत्मसात करने से ही भारतीय संस्कृति की रक्षा हो सकती है। भगवान को कहीं खोजने की जरूरत नहीं, वह हम सबके हृदय में मौजूद हैं। अगर जरूरत है तो सिर्फ महसूस करने की। हमारे जीवन में किए गए किसी भी धर्म या पुण्य कर्म के बदले भगवान से अगर कुछ मांगने का भाव बने तो भगवान से सारे विश्व का मंगल सारे जगत का मंगल सभी प्राणियों का मंगल भाव कामना अगर हम करते हैं तो हमारी भक्ति निश्चित है श्रेष्ठ है। (Bhagwat Katha Live)

Bhagwat Katha Live: श्रीमद्भागवत कथा सुनना मात्र नहीं, कथा को श्रवण करके जीवन में आत्मसात करना श्रेष्ठ : कान्हा जी महाराज

सुंदर भजनों की प्रस्तुति पर भक्त हुए भाव विभोर (Bhagwat Katha Live)

श्रीमद् भागवत कथा में कृपा करो हे मदन मुरारी, तेरे दरबार जैसा कोइ दरबार नहीं…. मेरी गाड़ी है तेरे हवाले तू जाने तेरा काम जाने… जैसे भजनों को सुनकर सभी भक्त भावविभोर हो गए। पूज्य कान्हा जी के साथ भोले शास्त्री, किशन जी, राजा जी, मोहन जी, विप्र देव शास्त्री, दीपक शास्त्री जी ने इन सभी सुन्दर भजनों की प्रस्तुति देकर समा बांधाकर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर किया। कथा आयोजक महतो परिवार के मुख्य यजमान राकेश महतो ने बताया कि सोमवार की कथा में ध्रुव चरित्र, प्रहलाद चरित्र की कथा होगी। नवनीत महतो ने अधिक से अधिक संख्या में पधार कर कथा का श्रवण करने की अपील की।

यहांं देखें कथा 

उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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