MP Promotion Latest Update: प्रमोशन को लेकर बड़ा अपडेट, हाई कोर्ट में केस का इन पर नहीं होगा कोई असर, जल्द मिलेगी पदोन्नति
MP Promotion Latest Update: सरकारी सेवा में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए पदोन्नति सिर्फ एक पद का बदलाव नहीं, बल्कि सम्मान, जिम्मेदारी और बेहतर भविष्य की उम्मीद होती है। मध्य प्रदेश में नए साल के करीब आते-आते पदोन्नति नियम 2025 को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। हाई कोर्ट में मामला लंबित होने के कारण जहां लाखों अधिकारी-कर्मचारी आगे बढ़ने की राह देख रहे हैं, वहीं कुछ चुनिंदा संवर्ग ऐसे भी हैं, जिन पर इस विवाद का कोई असर नहीं पड़ेगा। यह स्थिति प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे में असमानता की नई बहस को जन्म दे रही है।
हाई कोर्ट जबलपुर में लंबित है पदोन्नति नियम 2025
मध्य प्रदेश में पदोन्नति नियम 2025 से जुड़ा मामला इस समय हाई कोर्ट जबलपुर में विचाराधीन है। इस मामले (MP Promotion Latest Update) में अनारक्षित वर्ग और अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग, दोनों ने अपने-अपने तर्क न्यायालय के सामने रख दिए हैं। अब अगला कदम सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने का है। सरकार का पक्ष सामने आने के बाद ही अदालत इस पर कोई निर्णय दे सकेगी। जब तक न्यायिक प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक प्रदेश में पदोन्नतियों पर रोक बनी रहेगी।

लाखों अधिकारी-कर्मचारियों की तरक्की रुकी
पदोन्नति नियम को लेकर चल रही कानूनी प्रक्रिया का सीधा असर प्रदेश के लाखों अधिकारी और कर्मचारियों पर पड़ रहा है। कई विभागों में वर्षों से एक ही पद पर काम कर रहे लोग पदोन्नति की आस लगाए बैठे हैं। लेकिन जब तक अदालत से स्पष्ट फैसला नहीं आता, तब तक किसी भी संवर्ग में नियमित पदोन्नति (MP Promotion Latest Update) संभव नहीं है। इससे न केवल कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित हो रहा है, बल्कि प्रशासनिक कार्यों में भी ठहराव की स्थिति बन रही है।
छह संवर्गों पर नहीं पड़ेगा असर
हालांकि, इस पूरे विवाद के बीच कुछ ऐसे संवर्ग भी हैं, जिन्हें पदोन्नति नियम 2025 (MP Promotion Latest Update) के फैसले का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इनमें अखिल भारतीय सेवा, राज्य प्रशासनिक सेवा, कोष एवं लेखा सेवा, स्वास्थ्य विभाग, जनजातीय कार्य विभाग और स्कूल शिक्षा विभाग शामिल हैं। इन संवर्गों के अधिकारियों को एक जनवरी 2026 से उच्च पद का वेतनमान और पदनाम मिल जाएगा। यानी इन विभागों में काम कर रहे अधिकारियों को समयसीमा पूरी होने पर स्वतः लाभ मिल जाएगा।

निर्णय तक लागू रहेगी क्रमोन्नति की व्यवस्था
पदोन्नति के मामले में लंबे समय से चल रहे विवाद को देखते हुए पहले ही एक वैकल्पिक व्यवस्था बनाई गई थी। तत्कालीन कमल नाथ सरकार के कार्यकाल में इस विषय पर बैठकों का दौर चला था। इन बैठकों में यह तय किया गया कि जब तक अदालत से अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक सभी संवर्गों के लिए क्रमोन्नति (MP Promotion Latest Update) की व्यवस्था लागू की जाए। इसका मतलब यह था कि अधिकारी और कर्मचारी तय समयसीमा पूरी करने पर उच्च वेतनमान तो पाएंगे, भले ही औपचारिक पदोन्नति न हो।
सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी किया परिपत्र
क्रमोन्नति व्यवस्था को लागू करने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने एक परिपत्र भी जारी किया था। इस परिपत्र में साफ किया गया था कि पदोन्नति नियम पर निर्णय होने तक कर्मचारियों को समयमान वेतनमान का लाभ दिया जाएगा। इसके बाद कोष एवं लेखा, स्वास्थ्य, स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग ने अपने-अपने भर्ती नियमों में संशोधन कर यह प्रावधान कर लिया कि समयमान वेतनमान के साथ पदनाम (MP Promotion Latest Update) भी दिया जाएगा।
वेतन के साथ पदनाम मिलने से बढ़ी संतुष्टि
इन विभागों में नियम संशोधन के बाद कर्मचारियों को न केवल वेतन में बढ़ोतरी मिली, बल्कि उनके पदनाम में भी बदलाव हुआ। इससे कामकाज में स्पष्टता बनी और कर्मचारियों को यह महसूस हुआ कि उनकी सेवा अवधि और अनुभव का सम्मान किया जा रहा है। यह व्यवस्था इसलिए भी अहम मानी गई क्योंकि इसमें आरक्षण से जुड़ा कोई विवाद नहीं था और सभी को समान समयसीमा के आधार पर लाभ मिल रहा था।
मंत्रालय सेवा के कर्मचारियों को नहीं मिला लाभ
विडंबना यह है कि जिस सामान्य प्रशासन विभाग ने क्रमोन्नति का परिपत्र जारी किया, उसी विभाग के अंतर्गत आने वाली मंत्रालय सेवा के अधिकारी और कर्मचारी अब तक इस व्यवस्था का लाभ नहीं ले पाए हैं। मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक का कहना है कि यह स्थिति बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने बताया कि मंत्रालय सेवा के कर्मचारियों को अब तक न तो समयमान वेतनमान के साथ पदनाम मिला है और न ही पदोन्नति का कोई स्पष्ट रास्ता दिख रहा है।
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उच्च अधिकारियों को सौंपा गया ज्ञापन
मंत्रालय सेवा के कर्मचारियों की इस समस्या को लेकर हाल ही में अपर मुख्य सचिव संजय शुक्ल को ज्ञापन सौंपा गया है। ज्ञापन में मांग की गई है कि मंत्रालय सेवा के कर्मचारियों को भी वही लाभ दिया जाए, जो अन्य संवर्गों को मिल रहा है। संघ का कहना है कि क्रमोन्नति व्यवस्था पदोन्नति विवाद (MP Promotion Latest Update) का एक व्यावहारिक और सर्वमान्य समाधान है, जिसमें किसी भी वर्ग के अधिकारों पर असर नहीं पड़ता।
नियमों में उलझे कर्मचारी, असमानता का खतरा
वर्तमान स्थिति में खतरा यह है कि कुछ चुनिंदा संवर्गों के अधिकारी आगे बढ़ जाएंगे, जबकि बाकी लाखों अधिकारी-कर्मचारी नियमों और अदालती फैसले के इंतजार में फंसे रहेंगे। इससे प्रशासनिक ढांचे में असमानता पैदा हो सकती है। कर्मचारी संगठनों का मानना है कि अगर सभी विभागों में समान रूप से क्रमोन्नति व्यवस्था लागू कर दी जाए, तो जब तक अदालत का निर्णय नहीं आता, तब तक कर्मचारियों को राहत मिल सकती है।
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फैसले पर टिकी हैं सबकी निगाहें
अब सभी की नजरें हाई कोर्ट जबलपुर के निर्णय पर टिकी हुई हैं। सरकार के जवाब के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी कि पदोन्नति नियम 2025 का भविष्य क्या होगा। तब तक प्रदेश के लाखों अधिकारी-कर्मचारी उम्मीद और इंतजार के बीच अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं, इस आस में कि जल्द ही उनकी मेहनत और अनुभव को सही पहचान मिलेगी।
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