groom king on bullock cart : बैलगाड़ी से अपनी दुल्हनियां को लेने बारात लेकर निकले डॉक्टर दूल्हे राजा, बन गए सबके आकर्षण का केंद्र
• उत्तम मालवीय, बैतूल
आधुनिकता, फैशन और आलीशान शादियों की होड़ से दूर बैतूल जिले के आदिवासी समाज के एमबीबीएस डॉक्टर एवं अग्रणी कोचिंग संस्थान के संचालक डॉ. राजा धुर्वे ने अपनी परम्पराओं एवं रीति रिवाजों के प्रति अनूठी आस्था दिखाई। इस समय जहां हाई प्रोफाईल परिवारों और धनाढ्य लोगों में डेस्टीनेशन एवं थीम मैरिज का आकर्षण है, ऐसे में इस युवा डॉक्टर एवं शिक्षक द्वारा बैलगाड़ी से अपनी बारात ले जाई गई।
राजा की 20 से अधिक बैलगाड़ियों से निकली बारात पूरे क्षेत्र में उत्सुकता और आकर्षण का केंद्र बन गई। दूल्हे की बैलगाड़ी से लेकर बारातियों की बैलगाड़ी को भी आकर्षक रुप दिया गया था। मूलत: चिचोली ब्लॉक के असाड़ी ग्राम के रहवासी डॉ. राजा धुर्वे के विवाह की बारात 20 अप्रैल की शाम को बारात ने असाड़ी से दुधिया ग्राम के लिए प्रस्थान किया।
करीब 20 बैलगाड़ियां और लोक नृत्य एवं लोकगीत कलाकारों के दल बारात में शामिल थे। जिले में वर्षों बाद ऐसी बारात जिलेवासियों ने देखी जिसमें डीजे पर सिर्फ आदिवासी लोकगीतों की धूम थी। परम्परागत वेशभूषा में आदिवासी समाज के लोग विवाह समारोह में शामिल हुए।

यूथ आईकान हैं राजा
राजा धुर्वे आदिवासी युवाओं के ही नहीं अपितु जिले एवं प्रदेश के हर वर्ग के युवाओं के लिए यूथ आईकान हैं। श्री धुर्वे का कहना है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और समाजसेवा के लिए वे हमेशा सक्रिय रहते हैं। वर्तमान पीढ़ी अपने रीति-रिवाजों को भूलती जा रही है। हजारों युवा उनको फॉलो करते हैं।
इसलिए उन्होंने अपनी संस्कृति के अनुरुप ग्राम से बैलगाड़ी से बारात निकालकर और परम्परा के अनुरूप विवाह करने का निर्णय लिया। उनके इस विवाह समारोह में हजारों युवा शामिल हुए। वे भी इस विवाह को देखकर प्रेरित हुए। आज 21 अप्रैल को असाड़ी में आयोजित आशीर्वाद समारोह में भी आदिवासी संस्कृति की झलक देखने मिलेगी।
इसलिए लिया यह फैसला
राजा के मुताबिक महंगाई के इस दौर में बैलगाड़ी सबसे सस्ता सुलभ और प्रदूषणमुक्त साधन है। साथ ही ये बैलगाड़ी ग्रामीण सभ्यता संस्कृति की पहचान है। इसलिए अपनी संस्कृति को पुनर्जीवित करने उन्होंने बैलगाड़ी पर बारात ले जाने का फैसला किया।



