प्रकृति का यौवन है बसंत, इसलिए कहलाता है ऋतुओं का राजा

युगों-युगों से पृथ्वी पर वसंत के आगमन के उपरांत यानी हिंदू नववर्ष चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तक विद्यमान ऋतुगत सौंदर्य ब्रह्मांड का अप्रतिम सौंदर्य होता है। जिस प्रकार मनुष्य जीवन में यौवन आता है, उसी प्रकार बसंत इस प्रकृति का यौवन है। इसीलिए बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा कहा जाता है।
इस समय पेड़ों के सूखे पत्ते झड़ जाते हैं और नए पत्ते आने लगते हैं। चारों और रंग-बिरंगे फूल ही फूल दिखाई देते हैं। भारत में किसानी मुख्य आय का स्रोत है। उस हिसाब से बसंत को महत्वपूर्ण माना गया है। खेतों में नई फसलें पक जाती है। जिसे देखकर किसान गदगद होता है।
ये लौटती हुई सर्दियां, बड़े होते दिन, गुनगुनी धूप धीरे-धीरे तेज होती हुई, मनुष्य को आकर्षित करती है। कोयल की मधुर आवाज गुंजायमान होती है। एक ओर जहां आम के बौर वातावरण में मंद मंद खुशबू घोलते हैं तो वहीं खेतों में सरसों के फूल सहज ही अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
दो-दो महीने की छह ऋतु होती है। जिसमें वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत, और शिशिर ऋतु शामिल हैं। प्रकृति इस ऋतु में चहुंओर संपन्न होने से जगत का हर एक जीव वसंत ऋतु में खुशहाल होता है। यही कारण है कि इन दिनों हर तरफ माहौल बड़ा खुशनुमा नजर आता है।



