Betul Proof Range: बैतूल प्रूफ रेंज का मामला पहुंचा राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, पेसा कानून की अनदेखी के आरोप
Betul Proof Range: बैतूल। मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में प्रूफ रेंज का मामला अब फिर तूल पकड़ रहा है। जल, जंगल और जमीन को बचाने के लिए अब आदिवासी समाज सीधा मैदान में उतर आया है। इससे अब एक बार फिर प्रूफ रेंज को लेकर विरोध के स्वर तेज होने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं।
जिले के समाजसेवी कमलेश यादव ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग नई दिल्ली पहुंचकर बैतूल जिले में हो रहे कथित अवैध भूमि अधिग्रहण और विस्थापन के खिलाफ आदिवासी समाज की पीड़ा को मजबूती से प्रस्तुत किया। उन्होंने आयोग को दिए विस्तृत आवेदन में साफ कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार और बैतूल जिला प्रशासन पेसा कानून, संविधानिक अधिकारों और ग्रामसभा की सहमति की पूरी तरह अनदेखी कर रहा है।
11 गांवों की जमीन का अधिग्रहण
कमलेश यादव ने आयोग को अवगत कराया कि शीतलझीरी बांध निर्माण और प्रूफ रेंज विस्तार के नाम पर अनुसूचित जनजाति क्षेत्र के लगभग 10 से 11 गांवों की जमीनों का जबरन अधिग्रहण शुरू कर दिया गया है। प्रभावित गांवों में शीतलझीरी, सेहरा, ढप्पा, टेमरा, रामपुर, झाइकुंड, मलाजपुर, चिंचोली, खदरा सहित अन्य गांव शामिल हैं।

विरोध पर भी नहीं हुई कोई कार्रवाई
ग्रामीणों ने कई बार जिला प्रशासन और राज्य सरकार को आवेदन देकर विरोध जताया, धरना-प्रदर्शन किए, लेकिन शासन-प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। आवेदन में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि प्रभावित गांवों में बिना ग्रामसभा की अनिवार्य सहमति के सर्वे और भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई की जा रही है।
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बिना अधिग्रहण नोटिस के आपात कार्यवाही
यहां तक कि किसी भी प्रकार की वैध सूचना और परिपत्र जारी किए बिना अधिग्रहण नोटिस और आपात कार्यवाही शुरू कर दी गई है। यह सीधे-सीधे पेसा अधिनियम 1996 और वनाधिकार अधिनियम (एफआरए) 2006 का उल्लंघन है।
कमलेश यादव ने आयोग के सामने कहा कि यह ग्रामसभा की शक्ति और अधिकारों की अवहेलना है, संविधान के अनुच्छेद 244(1), पांचवी अनुसूची और अनुच्छेद 21 (जीवन व आजीविका के अधिकार) पर भी आघात है।

भूमि हस्तांतरण तत्काल रोकने की मांग
कमलेश यादव ने आयोग से मांग की कि तत्काल प्रभाव से शीतलझीरी बांध और प्रूफ रेंज विस्तार से संबंधित किसी भी तरह का सर्वे, भूमि सुधार या भूमि हस्तांतरण रोका जाए। पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करवाई जाए।
जांच में यदि पेसा कानून, एफआरए या अन्य संवैधानिक प्रावधानों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो दोषी अधिकारियों पर अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
प्रभावित परिवारों को उपलब्ध कराएं सहायता
उन्होंने आयोग से यह भी आग्रह किया कि प्रभावित परिवारों को तत्काल मानवीय सहायता उपलब्ध कराई जाए। सभी प्रभावित गांवों में आयोग की निगरानी में स्वतंत्र ग्रामसभा बैठकों का आयोजन कराया जाए, जिनमें ग्रामसभा की लिखित सहमति या असहमति दर्ज की जाए।
इसके साथ ही स्थायी पुनर्वास, मुआवजा और आजीविका संरक्षण की विस्तृत योजना तैयार कर उसके पालन की निगरानी के लिए एक सक्षम टीम तैनात की जाए।
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जनप्रतिनिधि नहीं दे रहे समस्याओं पर ध्यान
कमलेश यादव ने कहा कि बैतूल जिले से भाजपा के पांच विधायक, एक केंद्रीय मंत्री और प्रदेश अध्यक्ष हैं, फिर भी आदिवासी समाज की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते आदिवासियों की आवाज नहीं सुनी गई तो आने वाली पीढ़ियां उजड़ जाएंगी।
तुरंत स्थान परीक्षण का किया अनुरोध
आयोग से निवेदन किया गया है कि वह इस मामले में तुरंत स्थान-परीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन करे और आवश्यक सख्त निर्देश जारी करे, ताकि भविष्य में ऐसी अवैध कार्रवाइयां दोबारा न हो।
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