Blood Cancer Treatment : बड़ी सफलता, कीमोइम्युनोथेरैपी से सात साल की मासूम के ब्लड कैंसर का सफल इलाज, डॉक्टर ने ही जुटाई राशि
Blood Cancer Treatment: Big success, successful treatment of blood cancer of a seven-year-old child with chemoimmunotherapy, the doctor raised the amount

Blood Cancer Treatment: मध्यप्रदेश के बैतूल जिले की रहने वाली सात वर्षीय दीपाली साठे (परिवर्तित नाम) अक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्युकेमिया (एएलएल-ब्लड कैंसर) से पीड़ित हो गई थी। डॉक्टरों ने उसका सफलतापूर्वक इलाज कर उसे एक नई जिंदगी प्रदान की है। खास बात यह है कि उसका इलाज नई तकनीक कीमोइम्युनोथेरैपी से किया गया। बच्ची की जान बचाने डॉक्टर ने अपने चिकित्सीय कौशल के साथ पूरी संवेनशीलता और मानवता भी दिखाई। यही कारण है कि इलाज पर होने वाली भारी भरकम राशि भी उन्होंने अपने स्टाफ के साथ मिलकर खुद ही जुटाई।
एएलएल ब्लड और बोन मैरो का एक प्रकार का कैंसर है, जो श्वेत रक्त कणिकाओं (व्हाइट ब्लड सेल्स) को प्रभावित करता है। यह बच्चों में उनके बचपन में होने वाला सबसे आम कैंसर है और यह जब बोन मैरो की कोशिका के डीएनए में खराबी होती है तब यह रोग प्रकट होता है।
परिवार के लोगों को जब पता चला कि दीपाली को ब्लड कैंसर है तो उसे फौरन मेडिकल सहायता दिए जाने की जरूरत थी। उसकी स्थिति की गंभीरता और परिवार की आर्थिक मुश्किलों को समझते हुए हीमैटो ऑन्कोलॉजिस्ट एवं बीएमटी विशेषज्ञ डॉ. शैलेश बांबोर्डे ने एओआई के स्टाफ के साथ मिलकर इलाज के खर्च के लिए फंड जुटाने का एक अभियान शुरू किया, ताकि दीपाली को सबसे बेहतरीन उपचार मिल सके।
नई तकनीक से किया उपचार
मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसके परिवार के साथ परामर्श करने के बाद डॉ. शैलेश बांबोर्डे ने कीमोइम्युनोथेरैपी करने की सलाह दी। कीमोइम्युनोथेरैपी कैंसर के इलाज में एक नई खोज है, जो कैंसर की कोशिकाओं से लड़ने के लिये इम्यून सिस्टम की ताकत का इस्तेमाल करती है और पारंपरिक कीमोथेरैपी से जुड़े साइड इफेक्ट्स को कम करती है। इसमें इम्युनिटी बढ़ाने वाली दवाओं के साथ कीमोथेरैपी की दवाएं दी जाती हैं और कैंसर की कोशिकाओं को ज्यादा प्रभावी तरीके से लक्ष्य बनाकर नष्ट किया जाता है।
एओआई नागपुर के बीएमटी विशेषज्ञ डॉ. शैलेश बांबोर्डे ने कहा कि “अक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्युकेमिया यह ब्लड कैंसर का प्राथमिक और प्रमुख प्रकार है। जिसमें व्हाइट ब्लड सेल की मात्रा रेड ब्लड सेल की तुलना में काफी ज्यादा हो जाती है। ल्यूकेमिया में मरीज को बार-बार थकान, बुखार, संक्रमण, सांस लेने में तकलीफ, त्वचा का पीला पड़ना, वजन कम होना, जोड़ों में दर्द, ब्लीडिंग, लिम्फ नोड्स में सूजन आदि की शिकायत होगी। ‘ब्लड कैंसर के अलग-अलग टाइप के अनुसार इनका ट्रीटमेंट भी अलग-अलग है, लेकिन मुख्य रूप से कीमोथेरपी का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा इम्युनोथेरपी, टारगेटेड थेरपी का उपयोग किया जाता है। उन्होंने बताया कि जिस स्थिति में कीमोथेरपी काम नहीं करती है, वहां बोन मैरो ट्रांसप्लांट का उपयोग किया जाता है।
सहयोग राशि जुटाकर किया उपचार (Blood Cancer Treatment)
धनराशि जुटाने की कोशिशों को एओआई के स्टाफसे बहुत अच्छा समर्थन मिला। स्टाफ के सहयोग और योगदान से मरीज की कीमोइम्युनोथेरैपी और रोजमर्रा की जरूरतों के खर्च के लिये आवश्यक धन प्राप्त हुआ। मरीज का छह महीनों तक व्यापक उपचार किया गया। उपचार के दौरान दीपाली और उसके परिवार को एओआई नागपुर की संवेदनशील हेल्थकेयर टीम से बेजोड़ देखभाल और सहयोग मिला। अब दीपाली फिर से स्कूल जाने लगी है और कैंसर से मुक्त जीवन जी रही है। अमेरिकन ऑन्कोलॉजी इंस्टिट्यूट, नागपुर के रीजनल सीओओ, डॉ. अमित धवन ने लगातार समर्थन के लिये आभार जताते हुए कहा, “हम एओआई नागपुर के स्टाफ और डॉक्टरों के बहुत आभारी हैं, जिन्होंने इस महान काम में योगदान दिया है। उनकी उदारता से हम इस मरीज को अत्याधुनिक उपचार दे सके और उसके ठीक होने की संभावना को बढ़ा सके।
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हम अपने मरीजों को श्रेणी में सबसे बेहतरीन चिकित्सीय विशेषज्ञता, अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी और उत्कृष्ट सेवा देने के लिये प्रतिबद्ध हैं। अमेरिकन ऑन्कोलॉजी इंस्टिट्यूट नागपुर की व्यापक कैंसर इकाइयों में से एक है, जहाँ कैंसर विशेषज्ञों की एक बहु-विषयक टीम कैंसर केयर और उपचार से सम्बंधित अंतर्राष्ट्रीय दिशा-निर्देशों के आधार पर मेडिकल ऑन्कोलॉजी, हीमैटो-ऑन्कोलॉजी, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी और कैंसर सर्जरी के सभी पद्धतियों की सेवा एक ही छत के नीचे प्रदान करती है। अत्याधुनिक बीएमटी और हीमैटोलॉजी यूनिट द्वारा खून की जटिल बीमारियों और ब्लड कैंसर के सभी प्रकार के मरीजों, जैसे कि एनीमिया, मैरो फेलियर सिन्ड्रोम्स, कोग्युलेशन डिसऑर्डर्स, अक्यूट और क्रॉनिक ल्युकेमिया, मीलोमास और लिम्फोमास (हॉजकिन्स और नॉन-हॉजकिन्स), थैलसीमिया आदि का इलाज किया जाता है।



