Cruel System: परिवार के आधा दर्जन सदस्य मूक-बधिर, फिर भी पंचायत नहीं मानती उन्हें दिव्यांग, आज तक मंजूर नहीं की पेंशन

■ मनोहर अग्रवाल, खेड़ी सांवलीगढ़
केंद्र (central) और मध्यप्रदेश की सरकार (MP Govt) गरीब, दिव्यांग (Handicapped) और अन्य सभी जरूरतमंद वर्गों के लिए कई योजनाएं (Schemes) चला रही है। इन योजनाओं का लाभ हर जरूरतमंद को मिले, यह सुनिश्चित करने समय-समय पर समीक्षा भी की जाती है। सीधे शासन स्तर पर शिकायतों के लिए कई माध्यम भी मुहैया कराए गए हैं। योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत जानने कलेक्टर अमनबीर सिंह बैंस और जिला प्रशासन द्वारा ग्राम संवाद जैसे कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं।
शासन और प्रशासन स्तर पर इतना संवेदनशील रवैया अपनाए जाने के बाद भी योजनाओं के क्रियान्वयन में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला हमारा मैदानी अमला आज भी जरा भी संवेदनशील नहीं हो पाया है। यहां अभी भी पूरी मनमानी कार्यशैली में ही कार्य किया जा रहा है। योजनाओं का लाभ जिन्हें देना है, दे देंगे और जिन्हें नहीं देना है, उन्हें नहीं देंगे। उन्हें ना किसी शिकायत का डर है ना कार्यवाही का खौफ।
‘बैतूल अपडेट’ ने कुछ समय पहले खेड़ी सांवलीगढ़ क्षेत्र के ही एक गांव की बालिका का मामला सामने लाया था। उसे बचपन से पूरी तरह दिव्यांग होने के बावजूद पेंशन स्वीकृत नहीं की गई थी। हालांकि कलेक्टर श्री बैंस की संवेदनशीलता के चलते अगले ही दिन उसे सभी योजनाओं का लाभ मिल गया था। अब एक ऐसा ही मामला और सामने आया है जो कि मैदानी अमले की लापरवाह ही नहीं बल्कि क्रूर कार्यशैली का जीवंत प्रमाण है।
यह मामला है बैतूल जनपद पंचायत के अंतर्गत और ताप्ती नदी के किनारे बसे ग्राम पंचायत सांवगा के सिहार गांव के पांढरा भुरू ढाना का। इस गांव में एक ही परिवार के आधा दर्जन सदस्य मूक-बधिर (deaf mute) हैं। आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। बांस-बल्ली से बनी झोपड़ी में रहते हैं। मजदूरी करके गुजारा करते हैं। इसके बावजूद पंचायत को यह परिवार आज तक दिव्यांग पेंशन के लिए पात्र नजर नहीं आया। परिवार के सदस्य दर्जनों बार इसके लिए पंचायत के चक्कर काट चुके हैं, गुहार लगा चुके हैं। लेकिन इसके बावजूद किसी पर असर नहीं हुआ।
सिहार के पांढरा भुरु में रामसु उइके के परिवार में मौजूद परिवारिक सदस्य गुंटू उइके (30), सत्तो बाई झापु (35), दीनू पंचम, सन्ति उइके, सकिया धन्नू और इनका 6 वर्षीय पुत्र सभी मूक बधिर हैं। पूरा परिवार आपस में सांकेतिक भाषा का उपयोग करने को विवश है। गरीबी के चलते मजदूरी करके इनका गुजारा होता है। लेकिन ग्राम पंचायत ने इतने सालों में कभी भी इन्हें दिव्यांग पेंशन का लाभ नहीं दिया।
यह मूक-बधिर इसके लिए कई बार ग्राम पंचायत से पेंशन के लिए गुहार लगा चुके हैं। लेकिन सिस्टम की घोर लापरवाही से एक ही परिवार के यह गरीब आधा दर्जन मूक-बधिर सरकार की योजनाओं से वंचित हैं। अब इन सदस्यों ने कलेक्टर श्री बैंस से योजनाओं का लाभ दिलाए जाने की गुहार लगाई है।



