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sowing of rabi crops : देश में पांच सालों में सबसे ज्यादा हुई बुआई, धान का रकबा सबसे ज्यादा बढ़ा, होगा बंपर उत्पादन

sowing of rabi crops: highest sowing in the country in five years, paddy area increased the most, bumper production will happen

sowing of rabi crops : देश में पांच सालों में सबसे ज्यादा हुई बुआई, धान का रकबा सबसे ज्यादा बढ़ा, होगा बंपर उत्पादन

sowing of rabi crops : देश में तिलहन व दलहन जैसी सीमित उपज वाली वस्तुओं के उत्पादन को बढ़ाने के लिए कई राष्ट्रीय कार्यक्रमों को लागू कर रही है। खाद्य सुरक्षा को बनाए रखना, आयात पर निर्भरता कम करना और कृषि निर्यात को बढ़ाना सरकार की रणनीति के प्रमुख स्तंभ हैं। उच्च उपज वाली किस्मों (एचवाईवी) के गुणवत्तापूर्ण बीजों की समय पर आपूर्ति, निवेश, नवीनतम उत्पादन तकनीकें, ऋण, फसल बीमा, सूक्ष्म सिंचाई एवं फसल कटाई के बाद की सुविधाएं कृषि पैदावार तथा उत्पादकता बढ़ाने के लिए किए गए ऐसे ही कुछ प्रमुख उपाय हैं। इन सभी हस्तक्षेपों के कारण इस वर्ष रबी फसलों के अंतर्गत आने वाले बुवाई क्षेत्र में भारी वृद्धि हुई है।

फसल सत्र की शुरुआत से ही रबी की बुवाई पर नजर रखी जा रही थी और 3 फरवरी 2023 को आए अंतिम आंकड़े से पता चलता है कि रबी फसलों की बुवाई में तेजी सीजन के अंत तक जारी रही है। पिछले वर्ष (2021-22) और सामान्य बोए गए क्षेत्र (पिछले 5 वर्षों का औसत क्षेत्र) के साथ तुलना की जाती है। रबी फसलों के तहत बोया गया कुल क्षेत्रफल 2021-22 में 697.98 लाख हेक्टेयर से 3.25 प्रतिशत बढ़कर 2022-23 में 720.68 लाख हेक्टेयर हो गया है। यह 2021-22 की इसी अवधि में हुई बीजों की बुआई की तुलना में इस वर्ष 22.71 लाख हेक्टेयर अधिक है। सामान्य बोए गए क्षेत्र की तुलना में, 633.80 से 720.68 लाख हेक्टेयर तक 13.71 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

सभी फसलों के क्षेत्र में बढ़त हुई है, लेकिन सर्वाधिक तेजी धान में दर्ज की गई है। सभी रबी फसलों में 22.71 लाख हेक्टेयर में वृद्धि हुई है। धान के क्षेत्र में 2021-22 में 35.05 लाख हेक्टेयर से 2022-23 में 46.25 लाख हेक्टेयर तक 11.20 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, यह 47.71 लाख हेक्टेयर के सामान्य बुवाई क्षेत्र से कुछ कम है। चावल के तहत क्षेत्र में अधिकतम वृद्धि तेलंगाना और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में है। चावल की उपज वाले इलाकों को कम पानी की खपत वाली अन्य तिलहनों, दलहनों तथा पोषक अनाज वाली फसलों की ओर प्रोत्साहित किया जा रहा है।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने की वृद्धि की सराहना (sowing of rabi crops)

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने रबी फसलों की खेती में पर्याप्त वृद्धि की सराहना करते हुए कहा है कि यह हमारे मेहनतकश किसान भाइयों एवं बहनों, कृषि वैज्ञानिकों और मोदी सरकार की किसान हितैषी नीतियों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। खाद्य तेलों में आयात निर्भरता को कम करने के लिए भारत सरकार का पूरा ध्यान तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर है। 2021-22 में देश को 1.41 लाख करोड़ रुपए की लागत से 142 लाख टन खाद्य तेलों का आयात करना पड़ा था।

तिलहन का अब इतना हो गया क्षेत्र

तिलहन पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करने के कारण तिलहन के तहत आने वाला क्षेत्र 2021-22 के दौरान 102.36 लाख हेक्टेयर से 7.31 प्रतिशत बढ़कर इस वर्ष 109.84 लाख हेक्टेयर तक हो गया है। यह 78.81 लाख हेक्टेयर के सामान्य बोए गए क्षेत्र की तुलना में 31.03 लाख हेक्टेयर की उच्चतम बढ़त है। 7.31 प्रतिशत की दर से तिलहन के तहत क्षेत्र में तेजी सभी फसलों में एक साथ 3.25 प्रतिशत की वृद्धि दर के दोगुने से भी अधिक है। तिलहन के क्षेत्र में बड़े विस्तार के लिए प्रमुख रूप से योगदान राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ का है।

क्षेत्र विस्तार में सरसो का सर्वाधिक योगदान (sowing of rabi crops)

इस रबी सीजन में तिलहन का क्षेत्र विस्तारित करने में सफेद सरसो और काली सरसो का सर्वाधिक योगदान रहा है। सरसों का क्षेत्रफल 2021-22 के 91.25 लाख हेक्टेयर से 6.77 लाख हेक्टेयर बढ़कर 2022-23 में 98.02 लाख हेक्टेयर हो गया। इस प्रकार, 7.49 लाख हेक्टेयर में तिलहन, सफेद सरसो और काली सरसो के क्षेत्र में अकेले 6.44 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है। सफेद सरसो और काली सरसो की खेती के तहत लाया गया क्षेत्र 63.46 लाख हेक्टेयर के सामान्य बोए गए क्षेत्र की तुलना में 54.51 प्रतिशत अधिक रहा है।

विगत 2 वर्षों से विशेष सरसों मिशन के क्रियान्वयन से प्रमुख क्षेत्रों में विस्तार हुआ है। रबी 2022-23 के दौरान, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन-तिलहन के तहत 18 राज्यों के 301 जिलों में 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से अधिक उपज क्षमता वाले एचवाईवी के 26.50 लाख बीज मिनी किट किसानों को वितरित किए गए। 2500-4000 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की सीमा में उपज क्षमता वाली नवीनतम किस्मों के बीजों को बांटा गया था। इससे बढ़त वाले क्षेत्र तथा उत्पादकता तिलहन उत्पादन में भारी उछाल आएगी और आयातित खाद्य तेलों की मांग में कमी आएगी।

मिशन के तहत चलाया गया विशेष कार्यक्रम (sowing of rabi crops)

इन जिंसों में देश को आत्मनिर्भर बनाने पर दलहन उत्पादन पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत विशेष कार्यक्रम (एनएफएसएम टीएमयू370) अच्छे बीज तथा तकनीकी हस्तक्षेप की कमी के कारण दलहन की राज्य औसत उपज से कम वाले 370 जिलों की उत्पादकता बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। दलहन का क्षेत्रफल 0.56 लाख हेक्टेयर वृद्धि के साथ 167.31 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 167.86 लाख हेक्टेयर हो गया है। दलहन के रकबे में मूंग और मसूर की बढ़त हुई है। टीएमयू370 के तहत किसानों को मसूर के लिए लगभग 4.04 लाख बीज मिनी किट एचवाईवी का नि:शुल्क वितरण किये गए। महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान और कर्नाटक जैसे राज्यों ने दलहन की खेती के तहत विस्तार वाले क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाई है।

उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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