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Kheti Tips : सरसो और चने को कीटों से बचाने बुआई से पहले करें यह काम

Kheti Tips : फसलों में कीट प्रकोप होना आम बात है। कुछ कीट तो इतने खतरनाक होते हैं कि पूरी फसल को ही बर्बाद कर देते हैं। ऐसे में किसानों को तगड़ा नुकसान उठाना पड़ता है। कृषि से जुड़े सरकारी विभागों द्वारा समय-समय पर फसलों को कीट प्रकोप से बचाने के लिए जरुरी सलाह दी जाती है।

Kheti Tips : सरसो और चने को कीटों से बचाने बुआई से पहले करें यह काम

Kheti Tips : फसलों में कीट प्रकोप होना आम बात है। कुछ कीट तो इतने खतरनाक होते हैं कि पूरी फसल को ही बर्बाद कर देते हैं। ऐसे में किसानों को तगड़ा नुकसान उठाना पड़ता है। कृषि से जुड़े सरकारी विभागों द्वारा समय-समय पर फसलों को कीट प्रकोप से बचाने के लिए जरुरी सलाह दी जाती है।

राज्य कृषि मौसम विज्ञान केंद्र भोपाल ने भी इसे देखते हुए सरसो और चना की फसल को कीटों के प्रकोप से बचाने के लिए एडवायजरी जारी की है। केंद्र ने इन फसलों की बुआई से पहले ही कुछ कदम उठाने की सलाह दी है। जिससे कि इन फसलों में बाद में कीट प्रकोप से बचाया जा सकता है।

सरसो के लिए यह सलाह

केंद्र ने किसानों को सलाह दी है कि बुआई से पहले बीजों को थौरम या कैप्टान 2-2.5 ग्राम/किग्रा बीज की दर से उपचारित करना चाहिए। इसके अलावा कीटनाशक (इमिडाक्लोप्रिड) और कवकनाशी मेटालैक्सिल (31.8) 6.0 ग्राम किया से भी उपचारित कर सकते हैं।

बुआई से पहले मि‌ट्टी में सल्फर की जांच करानी चाहिए और कमी वाले क्षेत्रों में आखिरी जुताई के समय 20 किलोग्राम सल्फर प्रति हेक्टेयर मिलाना चाहिए। इससे कीटों के प्रकोप की सम्भावना कम हो जाती है। इसके अलावा बीज दर 1.5 से 2 किलोग्राम प्रति एकड़ रखना चाहिए। N:P:K और S (सल्फर) उर्वरकों का उपयोग 80:40:20:20 प्रति हेक्टेयर की दर से करें। पंक्ति में बुआई लाभदायक है।

न फैलने वाली किस्मों में पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30 सेमी और फैलने वाली किस्मों में पंक्ति से पंक्ति की दूरी 45-50 सेमी होनी चाहिए। अंकुरण के बाद पतला करके पौधे से पौधे की दूरी 12-15 सेमी रखनी चाहिए। सरसो के लिए अनुशंसित किस्में पूसा जय किसान, पूसा जगन्नाथ, पूसा सरसौ-25, पूसा सरसौ-26, पूसा अयनी, पूसा तारका, पूसा महक है।

चना की इस तरह करें खेती

राज्य कृषि मौसम विज्ञान केंद्र भोपाल के अनुसार चना बुआई के लिए खेत की तैयारी 2-3 जुताई करके करनी चाहिए तथा नमी बनाए रखने के लिए पाटा लगाना चाहिए। बीज जनित रोगों की रोकथाम के लिए बीज उपचार आवश्यक है। बीज को ट्राइकोडर्मा विरिडी 5 ग्राम/किलो बीज या थीरम 3 ग्राम/किलो बीज से उपचारित करें और उसके बाद 5 ग्राम राइजोबियम कल्चर और 5 ग्राम से बीज उपचार करें। पी.एस.बी. संस्कृति का।

यदि प्रत्येक वर्ष उकठा और कॉलर सड़न रोग का प्रकोप बार-बार होता है. तो किसानों को फसल चक्क अपनाने की सलाह दी जाती है। रबी मौसम में गेहूं, कुसुम और अलसी की फसले बोई जा सकती है।

कपास में गिरावट पर यह करें

यदि कपास में वर्गाकार गिरावट देखी जाए, तो NAA (नैप्थलिक एसिटिक एसिड) @ 2 से 2.5 मिलीलीटर प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।बेहतर उत्पादकता के लिए, कपास में फूल आने की अवस्था में 2% यूरिया (200 ग्राम यूरिया 10 लीटर पानी) और बीजकोष विकास अवस्था में 2% डीएपी का पर्णीय छिड़काव करें।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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