Chandur Bazar RailLine : गजब हो गया! जिस प्रोजेक्ट को मिल चुकी मंजूरी, बजट में राशि भी स्वीकृत, उसकी मांग कर आए हमारे माननीय
Chandur Bazar RailLine: Amazing! The project which has been approved, the amount has also been sanctioned in the budget, our honorable people came demanding it

▪️उत्तम मालवीय, बैतूल
पिछले दो दिनों से महाराष्ट्र के अमरावती जिले की मीडिया में वहां की सक्रिय, जागरूक और दमदार सांसद नवनीत राणा की खूब वाहवाही हो रही है। यह वाहवाही उनके द्वारा अमरावती जिले के लिए रेलवे के विभिन्न प्रोजेक्टों के लिए मंजूर कराए गए 6200 करोड़ रुपए के बजट को लेकर हो रही है।
कहा जा रहा है कि उनके प्रयासों से पहली बार इतने प्रोजेक्ट अमरावती जिले को रेलवे से मिले हैं। पहले तो सोचा कि इसमें अपना क्या फायदा, वे तो उनके क्षेत्र के लिए कुछ ना कुछ करती ही रहती हैं। इसके बावजूद उनके द्वारा मंजूर कराए गए प्रोजेक्ट्स पर एक सरसरी निगाह मार ही ली।
उनमें एक प्रोजेक्ट पर मेरी निगाहें अटक गईं। वजह यह थी कि उसमें बैतूल भी लिखा था। वह प्रोजेक्ट था बैतूल-चांदूर बाजार नई रेल लाइन। इसके बाद उस खबर को विस्तार से पढ़ा। उसमें अमरावती सांसद श्रीमती राणा ने मीडिया को बताया है कि इस रेल लाइन के सर्वे और आगामी कार्यों के लिए 1125 करोड़ का प्रावधान बजट में किया जा चुका है। इसी बीच एक और बात याद आई। वह यह कि हमारे बैतूल-हरदा-हरसूद संसदीय क्षेत्र के सांसद डीडी उईके की ओर से इसी बुधवार मतलब 8 फरवरी को पार्टी ने एक प्रेस नोट जारी किया था।

इस प्रेस नोट के साथ बकायदा फोटोग्राफ भी था जिसमें सांसद श्री उइके कुछ अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ रेल मंत्री से मुलाकात करते हुए उन्हें ज्ञापन सौंप रहे हैं। उस प्रेस नोट में लिखा था…
“चांदूर बाजार रेल्वे शुरू करने सहित ट्रेनों के स्टॉपेज को लेकर रेलमंत्री से मिले सांसद
अमृत योजना में पांच स्टेशन शामिल करने पर माना आभार
बैतूल। बैतूल-हरदा-हरसूद संसदीय क्षेत्र के भाजपा सांसद दुर्गादास उइके ने रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर जिले में ट्रेनों के स्टापेज, चांदूरबाजार रेल्वे परियोजना शुरू करने और कोरोना काल के दौरान बंद की गई नागपुर-रीवा एक्सप्रेस, नागपुर-जयपुर एक्सप्रेस, नागपुर-भुसावल इंटरसिटी (दादाधाम एक्स) को पुनः शुरू करने की मांग की है। इस संबध में सांसद श्री उइके ने रेलमंत्री को लिखित पत्र भी सौंपा।
मुलाकात के दौरान सांसद श्री उइके ने रेल मंत्रालय द्वारा आजादी के अमृतकाल में शुरू की गई अमृत रेल स्टेशन योजना में जिले के पांच स्टेशन शामिल किए जाने पर रेलमंत्री का आभार भी माना।
सांसद श्री उइके ने रेलमंत्री से कहा कि उनके संसदीय क्षेत्र में बैतूल-चांदूर बाजार रेल्वे परियोजना शुरू की जाना थी, जिसका सर्वे भी किया गया था। इस परियोजना से आदिवासी बैतूल जिला महाराष्ट्र के अमरावती, मुबंई से सीधा जुड़ जाता। परंतु किन्हीं कारणों से यह परियोजना अभी तक शुरू नहीं की गई है। मीडिया में परियोजना बंद करने की खबरें आ रही है। श्री उइके ने इस परियोजना पर शीघ्र काम शुरू करने की आवश्यकता बताई।”
अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बजट एक फरवरी को ही प्रस्तुत हो गया था। यदि बजट में राशि का प्रावधान हो चुका तो जाहिर है कि उसकी प्रक्रिया काफी पहले से चल ही रही होगी। इन सबके दो मायने निकलते हैं। पहला यह कि हमारे सांसद को अधिकारी उनके क्षेत्र के प्रोजेक्ट के बारे में ही जानकारी देना उचित नहीं समझते हैं। यह एक तरह से प्रचंड मतों से जीते जनप्रतिनिधि के साथ उपेक्षित व्यवहार है। दूसरा यह कि उनकी ही पार्टी के मंत्रियों का भी उनके साथ यही रवैया है। यदि ऐसा नहीं होता तो जब हमारे सांसद श्री उइके ने रेल मंत्री से इस परियोजना को लेकर चर्चा की कम से कम तब उन्हें इसकी जानकारी जरूर दी जाती।

नई बात नहीं है बैतूल की उपेक्षा
वैसे बैतूल और बैतूल जिले के जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा कोई पहली बार नहीं हो रही है। इससे पहले भी हमारे सांसद श्री उइके दर्जनों बार दिल्ली जाकर जिले के विभिन्न ट्रेनों के विभिन्न स्टेशनों पर स्टॉपेज की मांग कर चुके हैं। इसके बावजूद आज तक एक भी ट्रेन का स्टॉपेज उनकी बार-बार मांग के बावजूद नहीं हुआ। दूसरी ओर अमरावती सांसद श्रीमती राणा ने अमरावती-जबलपुर एक्सप्रेस को नागपुर की जगह अमरावती से चलाए जाने की मांग का केवल एक पत्र भर लिखा था। उनकी यह मांग मात्र 15 दिनों में पूरी हो गई थी और ट्रेन अमरावती से चलने लगी। दूसरी ओर जिले की मांगों को लगातार अनसुना किया जा रहा है।
उनका शुक्रगुजार रहेगा बैतूल जिला
जाहिर है कि यह प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में डालने के बाद अमरावती सांसद श्रीमती राणा के प्रयासों से ही दोबारा मंजूर हुआ है पर जिले को इसका लाभ ही मिलेगा। डीआरयूसीसी की बैठक में अधिकारियों द्वारा यह जानकारी दी गई थी कि इस प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। इसके बाद तो किसी को उम्मीद ही नहीं थी कि यह प्रोजेक्ट अब जिंदा भी हो सकेगा। इसके लिए बैतूल जिला अमरावती सांसद का शुक्रगुजार रहेगा।
वहीं अमरावती की मीडिया से इस बात की जानकारी लगने से उन क्षेत्रों के लोगों के चेहरे भी खिल उठे हैं जो प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चले जाने की खबर सुनकर मायूस हो चुके थे।
यह है इस प्रोजेक्ट का इतिहास
बैतूल से चांदूर बाजार (महाराष्ट्र) के लिए सीधी रेलवे लाईन बिछाने के लिए वर्ष 2016 में रेल बजट में रेल लाईन के लिए प्रारंभिक सर्वे कराए जाने का निर्णय लिया गया था। सालों की मशक्कत के बाद सर्वे का काम शुरू हुआ था। करीब 11 करोड़ रूपए की राशि सर्वे के लिए खर्च की गई थी। इस 75 किलोमीटर लम्बी लाईन को बिछाने के लिए 10 करोड़ रूपए प्रति किलोमीटर का खर्च एवं पहाड़ी क्षेत्रों के लिए 15 करोड़ रूपए प्रति किलोमीटर का खर्च आने की संभावना है। इस रेलवे लाईन को बिछाने के काम में पहाड़ी क्षेत्रों में सुरंग भी बनाया जाना है। इसकी परियोजना लागत 3692.93 करोड़ है।
इसलिए जरूरी है चांदूर बाजार लाइन
दरअसल यह रेलवे लाईन बिछाने की इस क्षेत्रवासियों की मांग लम्बे समय से है। बैतूल, आठनेर होते हुए यह रेल लाईन चांदूर बाजार तक जाना है। वहीं मुम्बई, अमरावती के लिए भी यह सीधी रेल लाईन होगी जिसका फायदा जिलेवासियों को मिलेगा। अभी मुम्बई के लिए नागपुर, इटारसी से ट्रेन पकड़ना पड़ती है। इस ट्रेक से मुम्बई के लिए सीधी ट्रेन उपलब्ध हो जाएगी।
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