IAS Success Story: हादसे में चली गई आंखों की रोशनी, फिर भी बिना कोचिंग की तैयारी और पाई 124वीं रैंक, जानें देश की पहली नेत्रहीन आईएएस अफसर के बारे में…
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IAS Success Story: देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को क्रैक करने में उम्मीदवारों को कई सालों तक कड़ी मेहनत और लगन के साथ तैयारी करनी पड़ती है। उसके बावजूद भी किसी को सफलता हासिल होती है तो कई लोगों को निराशा मिलती है। इसके अलावा परीक्षा को पास करने के लिए दृढ़ता, धैर्य और कभी हार न मानने का रवैया ही इस परीक्षा में सफलता दिला सकता है।
कुछ कर दिखाने की चाह आपके रास्ते में आने वाली हर बड़ी से बड़ी कठिनाइयों को छोटा बना देती है। आंखों के बिना जीवन अंधकारमय हो जाता है। लेकिन, सपने देखने के लिए और उन सपनों को साकार करने के लिए आंखों की रोशनी की जरूरत नहीं होती, बल्कि बुलंद हौसला चाहिए होता है।
देश और दुनिया में ऐसे कई नेत्रहीन हैं जिन्होंने अपने सपनों को पूरा कर दिखाया। इसमें उनकी खुद की भी कड़ी मेहनत और बुलंद हौसला काम आया। आज हम आपको भारत की एक ऐसी पहली नेत्रहीन आईएएस अफसर के बारे में बताने जा रहे हैं, जो बचपन में ही अपनी आंखों की रोशनी खो चुकी थीं लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और एक महिला, जो देख भी नहीं सकती, वह देश की अफसर बन गई। तो आइए जानते हैं आईएएस प्रांजल पाटिल के बारे में……

कौन हैं प्रांजल पाटिल (IAS Success Story)
प्रांजल पाटिल महाराष्ट्र के उल्हास नगर की मूल निवासी हैं। दुर्भाग्यवश, बचपन में ही उनकी आँखों की रोशनी चली गई। हालाँकि, प्रांजल ने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा मुंबई के कमला मेहता दादर स्कूल फॉर द ब्लाइंड से पूरी की और फिर सेंट जेवियर्स कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। बाद में, उन्होंने पीएचडी और एमफिल पूरा करने से पहले दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में स्नातकोत्तर की डिग्री भी प्राप्त की।
आंखों की रोशनी खोने के बाद ऐसे की पढ़ाई
दरअसल, प्रांजल जब 6 साल की थीं तो स्कूल में किसी बच्चे ने उनकी आंख में पेंसिल मार दी, जिससे उनकी एक आंख खराब हो गई। वह इस हादसे से उभरती उससे पहले ही उनकी दूसरी आंख में भी अंधेरा छा गया। उनके माता-पिता ने प्रांजल को कमजोर नहीं पड़ने दिया।
हादसे के बाद प्रांजल का दाखिला मुबंई के दादर स्थित श्रीमती कमला मेहता स्कूल में कराया गया है। यहां प्रांजल जैसे ही खास बच्चे पढ़ते हैं। उन्होंने यहां से 10वीं की पढ़ाई की। बाद में चंदाबाई कॉलेज से आर्ट्स में 12वीं किया। उस समय उनके 12वीं में 85 फीसदी अंक आए थे। आगे की पढ़ाई प्रांजल ने मुंबई के सेंट जेवियर कॉलेज से की।

बिना कोचिंग की यूपीएससी की तैयारी (IAS Success Story)
जब प्रांजल स्नातक की पढ़ाई कर रही थीं, तब उन्होंने प्रशासनिक सेवा के बारे में जाना और यूपीएससी की परीक्षा से जुड़ी जानकारियां जुटानी शुरू कीं। उन्होंने आईएएस बनने की तो तभी ठान ली, लेकिन किसी को इस बारे में बताया नहीं। ग्रेजुएशन के बाद प्रांजल दिल्ली आ गईं और जेएनयू से एमए किया। इसके बाद प्रांजल ने यूपीएससी की तैयारी की ओर रुख किया। साल 2015 में तैयारी शुरु की। उस दौरान प्रांजल एमफिल भी कर रही थीं।
प्रांजल ने यूपीएससी की तैयारी के लिए नेत्रहीन लोगों के लिए बने एक खास सॉफ्टवेयर का सहारा लिया। उनकी दोस्त ने भी प्रांजल का साथ दिया। बाद में प्रांजल की शादी ओझारखेड़ा में रहने वाले पेशे से केबल ऑपरेटर कोमल सिंह पाटिल से हुई। प्रांजल अपनी कामयाबी का श्रेय अपने माता पिता के अलावा दोस्तों और पति को देती हैं।
बनी भारत की पहली नेत्रहीन IAS ऑफिसर (IAS Success Story)
आईएएस ऑफिसर प्रांजल पाटिल (IAS Officer Pranjal Patil) की प्रेरणा भरी कहानी हैं, जो अपने जीवन की कई बाधाओं को पार कर भारत की पहली नेत्रहीन IAS अधिकारी बनीं। उनकी प्रेरणादायक सफलता की कहानी उन संघर्षों से भरी हुई है, जिनसे उन्होंने अपने लक्ष्य को हासिल किया है। प्रांजल 2016 में पहली बार और 2017 में दूसरी बार यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में शामिल हुईं थी। 2016 में, उनकी रैंक 744 थी, जिसके बाद उन्होंने अगले साल दूसरा अटेंप्ट दिया और इस बार उन्होंने ऑल इंडिया 124वीं रैंक हासिल की।
उनकी कड़ी मेहनत ने असर दिखाया और उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में 124वीं रैंक के साथ परीक्षा पास की और वह भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल हो गईं। उन्होंने तिरूवनंतपुरम के उप-कलेक्टर के रूप में कार्यभार संभालने से पहले केरल के एर्नाकुलम में एक सहायक कलेक्टर के रूप में कार्य किया था।



