नववर्ष पर आओ बनाएं नया बैतूल : बैतूल विधायक निलय डागा ने जिले वासियों को भेजे शुभकामना संदेश में किया आह्वान

आदरणीय बैतूलवासी,
जिले के सभी आदरणीय बैतूल वासियों को मेरा नमन, वंदन और हिंदू नववर्ष यानी विक्रम संवत 2079 में स्वागतम। इस नववर्ष की शुरुआत आज शनिवार 2 अप्रैल से होने जा रही है। मुझे पंचाग की ज्यादा जानकारी तो नहीं है, लेकिन कहा यही जाता है कि ब्रह्मा जी ने पृथ्वी की रचना चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के दिन आज की थी। हम भले ही किसी भी उपासना पद्धति को मानते हो, लेकिन इस बात से इंकार नहीं कर सकते कि हजारों सालों पहले जो पंचाग बिना कंम्प्यूटर और टेलीस्कोप के हमारे पूर्वजों ने बनाया था वो आज इस राकेट साइंस के युग में भी उतना ही कारगर है। इसलिए उसकी तिथियां हर संप्रदाय के लिए किसी न किसी तरह से विशेष है।
शनिवार को हिन्दू नववर्ष और मातारानी का नवरात्र का 9 दिनी पर्व आरंभ हो रहा है तभी मुस्लिम भाइयों का पवित्र माह रमजान का भी शुभारंभ हो रहा है। हिन्दू भाई जहां व्रत रखेंगे वहीं मुस्लिम भाई रोजा रखेंगे। हमारे सिंधी भाइयों का पवित्र दिन भगवान झूलेलाल जी की जयंती और गुड़ी पड़वा भी आज 2 अप्रैल को ही है।
जहां तक बात व्रत या रोजा की है तो यह अकेले भोजन न करने का त्यौहार नहीं है बल्कि पेट के साथ-साथ मन को भी शांत और विकार रहित रखने का है। थोड़ा सा त्याग हमारे अंदर देने या देवत्व का भाव लाता है और यदि हम किसी को इस दौरान कुछ दे सकते हैं तो वो सकारात्मकता (पॉजीटिविटी) ही है। यही सकारात्मकता हम सभी के बीच परस्पर प्रेम, एक-दूसरे के विचार-व्यवहार का सम्मान करना सिखाती है। राजनीति, व्यापार-नौकरी, पढ़ाई या परिवार में जैसे ही हम एक-दूसरे के संपर्क में आते हैं, हम सामने वाले पर अपने विचार थोपना चाहते हैं।
भले ही ईश्वर ने हमें सात इंद्रधनुषीय रंग दिए हो, लेकिन हम सामने वाले पर वही रंग पसंद करने का दबाव प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से डालते हैं जो रंग हमें पसंद होता है। यही चाहत एक वैमनस्य और नकारात्मकता (नेगिटिविटी) पैदा करती है। हमारे आसपास के बहुत सारे लोगों से हमारा जमीन-जायदाद या मार-पीट आदि का कोई झगड़ा नहीं होता है, लेकिन फिर भी एक वैमनस्यता हम एक-दूसरे के प्रति पाले रखते हैं। मैं स्वयं भी इससे इतर नहीं हूं, लेकिन इंसान होने के नाते स्वयं को पहले से बेहतर करने की चाहत जरूर रखता हूं और उसकी कोशिश करता रहता हूं। इसमें हमारा जैन धर्म और उसका क्षमावाणी पर्व हमारे अंदर के इस अनजाने अहंकार को मारने में बहुत योगदान देता है।
एक जनप्रतिनिधि के नाते हम अपने क्षेत्र के भौतिकीय विकास के लिए सतत प्रयास करते ही हैं, लेकिन जिस जनता ने हमें चुना है उनके बीच आपसी प्रेम-प्यार रहे, उसके लिए एक सकरात्मक माहौल बनाने का कर्तव्य भी हमारा है। कहा यही जाता है कि हम मकान कितना भी सुंदर बना लें लेकिन जब तक उसमें रहने वालों में आपसी प्रेम और विश्वास न हो तो वह मकान घर नहीं बन पाता।
हमने बीते दो साल कोरोना के चलते बड़े तनाव में गुजारे। बहुत से लोगों ने अपनों को खो दिया। अब दो साल बाद यह नया वर्ष तब आया जब लग रहा है कि हम शायद कोरोनाकाल से निकल गए हैं। निसंदेह हम सभी सौभाग्यशाली हैं।
इसलिए वर्ष 2022 के इस 2 अप्रैल के इस अति विशेष दिन हम सभी को अपने अपने आराध्य के सामने यही संकल्प लेना है कि हम बैतूल में विकास और व्यवहार के लिए एक सकरात्मक माहौल बनाएंगे। हर जाति, समाज, संप्रदाय के बीच आपसी प्रेम-भाइचारे को बनाए रखेंगे। मैं भी आज भगवान महावीर के दर पर यही सकरात्मक संकल्प लूंगा। प्रेम, समर्पण और कर्तव्य के प्रतीक हनुमान जी के मंदिरों पर ध्वज अर्पण भी इसलिए कर रहा हूं कि हम सभी पर उनके इन गुणों की कृपा बरसती रहे।
एक बार पुन: आपको हिन्दू नववर्ष, पवित्र रमजान और झूलेलाल जयंती, गुड़ी पड़वा की बधाई, शुभकामनाएं…!
जय बैतूल
आपका सेवक
निलय डागा
विधायक, बैतूल



