Electric Agriculture Tractor: अब खेतों में दौड़ेंगे इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर, कम खर्च में तेजी से बदलेगी खेती की तस्वीर
Electric Agriculture Tractor: अब खेतों में काम करते समय केवल डीजल इंजन की तेज आवाज और धुएं का सामना नहीं करना पड़ेगा। खेती के मैदान में एक नई तकनीक धीरे-धीरे अपनी जगह बना रही है, जिसे इलेक्ट्रिक कृषि ट्रैक्टर के नाम से जाना जा रहा है। बैटरी से चलने वाले ये ट्रैक्टर खेती को न सिर्फ सस्ता बनाएंगे, बल्कि पर्यावरण और किसानों की सेहत के लिए भी बेहतर साबित होंगे। इलेक्ट्रिक कृषि ट्रैक्टरों को लेकर हाल ही में एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मानक जारी किया गया है, जिससे इस नई तकनीक पर किसानों और उपभोक्ताओं का भरोसा और मजबूत होने की उम्मीद है।
भारतीय खेती में बदलाव कोई नई बात नहीं है। समय के साथ खेती के तरीकों और साधनों में लगातार सुधार हुआ है। बैलों से चलने वाली खेती से लेकर डीजल ट्रैक्टरों तक का सफर अब इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों की ओर बढ़ रहा है। इलेक्ट्रिक कृषि ट्रैक्टर बैटरी पैक और इलेक्ट्रिक मोटर के जरिए चलते हैं, जिससे इन्हें डीजल या पेट्रोल जैसे ईंधन की जरूरत नहीं होती। ये ट्रैक्टर जुताई, बुआई, ढुलाई और अन्य कृषि कार्यों के लिए तैयार किए जा रहे हैं। इनकी बनावट इस तरह की गई है कि किसान पारंपरिक ट्रैक्टर की तरह ही इन्हें इस्तेमाल कर सकें, लेकिन कम खर्च और कम प्रदूषण के साथ।
राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस पर हुआ अहम एलान
इलेक्ट्रिक कृषि ट्रैक्टरों के लिए यह नई पहल राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस 2025 के अवसर पर सामने आई। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने आईएस 19262: 2025 ‘इलेक्ट्रिक कृषि ट्रैक्टर – परीक्षण संहिता’ जारी की। इस मानक को भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा तैयार किया गया है। इस अवसर पर यह साफ किया गया कि इलेक्ट्रिक कृषि ट्रैक्टरों के लिए एक समान और वैज्ञानिक परीक्षण व्यवस्था समय की जरूरत बन चुकी थी। नया मानक इसी दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।
क्या है आईएस 19262: 2025 परीक्षण संहिता
आईएस 19262: 2025 एक ऐसी परीक्षण संहिता है, जो इलेक्ट्रिक कृषि ट्रैक्टरों के प्रदर्शन, सुरक्षा और विश्वसनीयता की जांच के लिए दिशा-निर्देश तय करती है। इसके तहत सभी हितधारकों के लिए एक समान शब्दावली और सामान्य नियम बनाए गए हैं, ताकि परीक्षण के दौरान किसी तरह का भ्रम न रहे। इस मानक में ट्रैक्टर की पीटीओ पावर, ड्रॉबार पावर और बेल्ट व पुली जैसे उपकरणों के प्रदर्शन से जुड़े परीक्षण शामिल हैं। इसके साथ ही कंपन मापन, तकनीकी विनिर्देशों की पुष्टि और ट्रैक्टर के विभिन्न हिस्सों व असेंबली का निरीक्षण भी इस प्रक्रिया का हिस्सा है।
तकनीकी मानकों से मिला मजबूत आधार
इलेक्ट्रिक कृषि ट्रैक्टरों के इस नए मानक को तैयार करते समय पहले से मौजूद तकनीकी दस्तावेजों से भी सहायता ली गई है। इसमें आईएस 5994: 2022 ‘कृषि ट्रैक्टर– परीक्षण संहिता’ और इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़े ऑटोमोटिव उद्योग मानकों को ध्यान में रखा गया है। इन्हें कृषि उपयोग के अनुसार ढालकर इस नई संहिता का हिस्सा बनाया गया है। अधिकृत परीक्षण संस्थानों के जरिए इस मानक को लागू किया जाएगा, जिससे देशभर में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों का एक समान मूल्यांकन संभव हो सकेगा।
इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों की यह है खासियत
इलेक्ट्रिक कृषि ट्रैक्टरों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनमें डीजल इंजन की जगह इलेक्ट्रिक मोटर का इस्तेमाल होता है। इससे खेतों में काम करते समय किसी तरह का धुआं नहीं निकलता। शोर भी काफी कम होता है, जिससे किसानों को लंबे समय तक काम करने में परेशानी नहीं होती। इन ट्रैक्टरों में कम चलने वाले पुर्जे होते हैं, जिससे इनके खराब होने की संभावना भी कम रहती है। इंजन ऑयल, फिल्टर और ईंधन से जुड़ी कई झंझटें इनमें नहीं होतीं, जिससे रखरखाव आसान और सस्ता हो जाता है।
कम खर्च में हो सकेगा ज्यादा काम
इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर किसानों के लिए आर्थिक रूप से भी फायदेमंद माने जा रहे हैं। डीजल की तुलना में बिजली की लागत कम होती है, जिससे रोजमर्रा के खर्च में बचत होती है। इसके अलावा, कम रखरखाव की जरूरत होने से मरम्मत पर होने वाला खर्च भी घटता है। ऊर्जा दक्षता के मामले में भी ये ट्रैक्टर आगे हैं। बैटरी से मिलने वाली ऊर्जा का सीधा उपयोग मोटर में होता है, जिससे कम ऊर्जा में अधिक काम संभव हो पाता है।
पर्यावरण और सेहत के लिए बेहतर
डीजल ट्रैक्टरों से निकलने वाला धुआं खेतों में काम करने वाले किसानों की सेहत पर बुरा असर डालता है। इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर इस समस्या को काफी हद तक खत्म कर देते हैं। टेलपाइप उत्सर्जन पूरी तरह समाप्त होने से वायु प्रदूषण कम होता है और खेती से जुड़ा कार्बन उत्सर्जन भी घटता है। इसके साथ ही, डीजल की खपत कम होने से जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटती है। इससे डीजल उत्पादन में लगने वाले प्राकृतिक संसाधनों की बचत भी होती है।
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इसलिए था इनका जरूरी मानकीकरण
देश में इलेक्ट्रिक कृषि ट्रैक्टरों का उपयोग धीरे-धीरे बढ़ रहा है। ऐसे में इनके परीक्षण और मूल्यांकन के लिए कोई एक समान व्यवस्था न होने से कई तरह की चुनौतियां सामने आ रही थीं। अलग-अलग तरीकों से जांच होने पर प्रदर्शन और सुरक्षा को लेकर भ्रम की स्थिति बन सकती थी। इसी जरूरत को देखते हुए भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के यंत्रीकरण और प्रौद्योगिकी विभाग ने इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों के मानकों को प्राथमिकता देने का अनुरोध किया। इसके बाद भारतीय मानक ब्यूरो ने यह मानक तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की।
मानक को बनाने में कई संस्थानों का योगदान
इस मानक को बनाने में कई प्रमुख हितधारकों की भागीदारी रही। इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर निर्माता, परीक्षण और प्रमाणन एजेंसियां, अनुसंधान और शैक्षणिक संस्थान तथा कृषि अभियांत्रिकी और इलेक्ट्रिक गतिशीलता के विशेषज्ञों ने इसमें सहयोग दिया। भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, आईसीएआर के केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान भोपाल, केंद्रीय कृषि मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान बुदनी, ट्रैक्टर एवं यंत्रीकरण संघ नई दिल्ली, ऑटोमोटिव अनुसंधान संघ पुणे और अखिल भारतीय किसान संगठन जैसे संस्थानों के प्रतिनिधियों ने इस मानक को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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भविष्य की खेती की ओर बढ़ाए कदम
आईएस 19262: 2025 की अधिसूचना भले ही स्वैच्छिक हो, लेकिन इसे कृषि क्षेत्र में उभरती तकनीकों के लिए एक मजबूत आधार माना जा रहा है। यह पहल भारत के मानकीकरण ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित हो रहे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और कृषि मशीनीकरण के रुझानों के अनुरूप है।
नई परीक्षण संहिता से मिलने वाला डेटा भविष्य में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों के लिए अलग से स्वीकृति मानदंड और गुणवत्ता मूल्यांकन योजनाएं तैयार करने में सहायक होगा। इससे निर्माता बेहतर और सुरक्षित उत्पाद विकसित कर पाएंगे और किसानों का भरोसा भी बढ़ेगा। आने वाले समय में जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर खेतों में आम होंगे, खेती का चेहरा बदलता नजर आएगा। कम लागत, कम प्रदूषण और आधुनिक तकनीक के साथ इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर भारतीय कृषि को एक नई दिशा देने की क्षमता रखते हैं।
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