Gig Workers Social Security: गिग वर्कर्स को मिलेगा बीमा, स्वास्थ्य और मातृत्व लाभ, जानिए नए श्रम कानून में कितनी सामाजिक सुरक्षा
Gig Workers Social Security: नए साल की शुरुआत आमतौर पर ऑनलाइन ऑर्डर और फूड डिलिवरी के सबसे व्यस्त दिनों में गिनी जाती है, लेकिन इसी दौरान देश के कई हिस्सों में गिग वर्कर्स की हड़ताल ने ध्यान खींच लिया। फूड और क्विक कॉमर्स कंपनियों के सामने ऑर्डर का दबाव था, वहीं डिलिवरी से जुड़े हजारों कामगार अपने अधिकारों को लेकर सड़कों पर उतर आए। इस पूरे घटनाक्रम में जहां कंपनियों के मालिक सफाई दे रहे हैं, वहीं राजनीतिक दल भी इस मुद्दे को भुनाने में पीछे नहीं हैं। ऐसे माहौल में यह समझना जरूरी हो जाता है कि मौजूदा श्रम कानून गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को वास्तव में कौन-कौन सी सुरक्षा देते हैं और उन अधिकारों को पाने की प्रक्रिया क्या है।
हड़ताल के पीछे की वजह और मौजूदा विवाद
देश के अलग-अलग राज्यों में गिग वर्कर्स के एक वर्ग ने जेप्टो, स्विगी, ब्लिंकिट और जमैटो जैसे प्लेटफॉर्म्स पर काम करने की शर्तों को लेकर असंतोष जताया है। कामगारों का आरोप है कि लंबे समय तक काम कराने के बावजूद उन्हें पर्याप्त भुगतान, बीमा और सामाजिक सुरक्षा नहीं मिल रही है। इसी बीच जमैटो के संस्थापक दीपिंदर गोयल की ओर से सफाई भी आई, लेकिन इससे असंतोष पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। हड़ताल के समय को लेकर भी सवाल उठे, क्योंकि नए साल पर क्विक कॉमर्स कंपनियों के यहां ऑर्डर सामान्य दिनों की तुलना में कहीं ज्यादा होते हैं। इस परिस्थिति ने विवाद को और गहरा कर दिया।
राजनीतिक दलों को एंट्री का मिला मौका
गिग वर्कर्स की इस नाराजगी ने राजनीतिक दलों को भी मौका दे दिया। कुछ नेताओं ने इसे श्रमिक शोषण का मुद्दा बताया तो कुछ ने कंपनियों को कटघरे में खड़ा किया। बयानबाजी के इस दौर में असली सवाल यह है कि कानून क्या कहता है और कामगारों के पास अपने हक के लिए कौन से रास्ते उपलब्ध हैं।
नए श्रम कानूनों की पृष्ठभूमि
केंद्र सरकार ने पुराने श्रम कानूनों की जगह हाल के वर्षों में चार श्रम संहिताएं पेश की हैं। इन संहिताओं में पहली बार गिग वर्क, प्लेटफॉर्म वर्क और एग्रीगेटर जैसे शब्दों को कानूनी परिभाषा दी गई है। यह बदलाव इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि देश में करोड़ों लोग ऐप आधारित काम से जुड़े हैं, जिनके लिए पहले कोई स्पष्ट कानूनी ढांचा नहीं था।
गिग वर्कर्स के लिए मुख्य अधिकार
नई श्रम संहिताओं के तहत गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की व्यवस्था की गई है। सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 के अनुसार केंद्र सरकार समय-समय पर ऐसी योजनाएं अधिसूचित करेगी, जिनका लाभ इन कामगारों को मिल सके। इसमें जीवन और विकलांगता सुरक्षा, दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य और मातृत्व लाभ, वृद्धावस्था में सहायता और बच्चों के लिए क्रेच जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इसके अलावा सरकार जरूरत के अनुसार अन्य लाभ भी तय कर सकती है।
सामाजिक सुरक्षा कोष की व्यवस्था
इन कानूनों में लगभग 40 करोड़ असंगठित कामगारों, जिनमें गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स भी शामिल हैं, के लिए एक सामाजिक सुरक्षा निधि बनाने का प्रावधान है। इस कोष का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कामगारों को बुनियादी सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिल सके, चाहे वे किसी भी प्लेटफॉर्म से जुड़े हों।
ईएसआईसी और यूएएन का विकल्प
नए नियमों के तहत तकनीक आधारित प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले श्रमिकों को कर्मचारी राज्य बीमा निगम यानी ईएसआईसी से जुड़ने का अवसर दिया गया है। इसके साथ ही ईएसआईसी, ईपीएफओ और असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए एक यूनिवर्सल अकाउंट नंबर तय किया गया है। यह नंबर आधार से जुड़ा होगा और पूरे देश में मान्य रहेगा।
ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण क्यों जरूरी
सरकारी योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा का लाभ पाने के लिए गिग वर्कर्स का ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य है। इसके लिए न्यूनतम उम्र 16 वर्ष तय की गई है। पहचान और पते के प्रमाण के तौर पर आधार कार्ड जरूरी है। इसके साथ आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर होना चाहिए ताकि ओटीपी के जरिए सत्यापन हो सके। बैंक खाते का विवरण भी देना होता है, जिससे किसी भी योजना की राशि सीधे खाते में भेजी जा सके। कामगार को यह भी स्वयं घोषित करना होता है कि वह गिग या प्लेटफॉर्म वर्कर के रूप में काम कर रहा है।
रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया बेहद आसान
ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण की प्रक्रिया को आसान रखा गया है। कामगार को आधिकारिक पोर्टल पर जाकर आधार नंबर से लॉगिन करना होता है। इसके बाद व्यक्तिगत जानकारी, काम के प्रकार और बैंक डिटेल भरनी होती है। जो लोग खुद ऑनलाइन फॉर्म नहीं भर सकते, वे नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर या सुविधा केंद्र की मदद ले सकते हैं।
टोल फ्री हेल्पलाइन जारी
पंजीकरण या पोर्टल से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए सरकार ने 14434 नंबर की टोल-फ्री हेल्पलाइन जारी की है। यह सेवा कई भाषाओं में उपलब्ध है और रविवार को भी काम करती है, जिससे ज्यादा से ज्यादा कामगारों तक जानकारी पहुंच सके।
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रजिस्ट्रेशन के बाद मिलने वाले लाभ
पंजीकरण पूरा होने के बाद कामगार को एक डिजिटल कार्ड दिया जाता है, जिसमें उसका यूनिवर्सल अकाउंट नंबर होता है। यह कार्ड देशभर में मान्य रहता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि अगर कोई कामगार एक राज्य से दूसरे राज्य में काम करने जाता है, तो भी उसका खाता और लाभ सुरक्षित रहते हैं। इसके अलावा दुर्घटना बीमा, वृद्धावस्था पेंशन और भविष्य में आने वाली शिक्षा, आवास या कौशल विकास से जुड़ी योजनाओं का लाभ भी इसी के जरिए मिल सकेगा।
योजनाओं की फंडिंग कैसे होगी
श्रम संहिताओं में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इन योजनाओं का खर्च कैसे उठाया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकारें आंशिक या पूर्ण योगदान कर सकती हैं। साथ ही एग्रीगेटर्स यानी प्लेटफॉर्म कंपनियों से भी योगदान लिया जाएगा। यह योगदान उनके वार्षिक टर्नओवर का 1 से 2 प्रतिशत होगा, जो गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को दी जाने वाली राशि के अधिकतम 5 प्रतिशत तक सीमित रहेगा। इसके अलावा कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व निधि या अन्य स्रोतों से भी फंड जुटाने का प्रावधान है।
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