बाल विवाह रोकने कंट्रोल रूम बना, संयुक्त टीम गठित; माता-पिता के साथ केटरर्स और लॉन संचालक को भी होगी सजा

शादियों का सीजन शुरू हो चुका है। इस दौरान बाल विवाह होने की संभावनाएं भी बनी रहती है। अक्षय तृतीया पर इसकी सबसे ज्यादा संभावना रहती है। इसे देखते हुए प्रशासन भी अलर्ट हो गया है। बाल विवाह रोकने प्रशासन द्वारा जिला स्तरीय कंट्रोल रूम बनाया गया है। वहीं संयुक्त टीम भी गठित की गई है।
उल्लेखनीय है कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के प्रावधान के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु की लड़की एवं 21 वर्ष से कम आयु का लड़का नाबालिग की श्रेणी में आता है। इनका विवाह बाल विवाह के अपराध की श्रेणी में माना गया है। अक्षय तृतीया के अवसर पर 3 मई को बाल विवाह रोकने के लिए जिला स्तरीय कंट्रोल रूम जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास कार्यालय में बनाया गया है।
बाल विवाह की रोकथम के लिए अनुविभागीय राजस्व अधिकारी की अध्यक्षता में परियोजना अधिकारी, बीएमओ, बीईओ, पुलिस निरीक्षक तथा चाइल्ड लाइन ईकाई की संयुक्त टीम भी गठित की गई है। महिला एवं बाल विकास अधिकारी संजय जैन ने बताया कि समस्त सामूहिक विवाहों का आयोजन करने वाली समिति के अध्यक्षों व कार्यकर्ताओं को वर-वधू के उम्र का प्रति परीक्षण अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल की अंकसूची, आंगनबाड़ी केन्द्र के रिकॉर्ड से किया जाएगा। इन दस्तावेजों के अभाव में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी मेडिकल प्रमाण पत्र को मान्य किया जाएगा।
यदि किसी व्यक्ति को बाल विवाह की शिकायत प्राप्त होती है तो वह जिला स्तरीय कंट्रोल रूम नंबर 07141-230305, वन स्टॉप सेंटर के दूरभाष नंबर 07141-234829 या चाइल्ड हेल्प लाइन नंबर 1098 अथवा बाल संरक्षण अधिकारी के मोबाइल नंबर 7746023605 अथवा नजदीकी थाना या उस परियोजना क्षेत्र के लिए गठित टीम परियोजना अधिकारी, सुपरवाइजर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सरपंच, सचिव, ग्राम कोटवार को शिकायत की जा सकती है। शिकायत गोपनीय रहेगी।
बाल विवाह होने पर इतनी सजा का प्रावधान
बाल विवाह सम्पन्न कराने वाले अभिभावक, माता-पिता, केटरर्स, मैरिज लॉन संचालकों को भी अधिनियम के तहत दो वर्ष का कारावास या एक लाख रुपए तक जुर्माने या दोनों ही प्रकार से दंडित किए जाने का प्रावधान है। कलेक्टर अमनबीर सिंह बैंस द्वारा बाल विवाह रोकने में समाज के सभी वर्गों से शासन को सहयोग करने की अपील की गई है।



