Ladli Behna Yojana 1500 Rupees: दिवाली से पहले लाडली बहना योजना की सूची में होगी छंटनी, सिर्फ पात्र बहनों को मिलेंगे 1500 रुपये
Ladli Behna Yojana 1500 Rupees: मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना देश भर में छा चुकी है। लाड़ली बहनों को अब दिवाली के बाद मिलने वाली किश्त का बेसब्री से इंतजार है। इस किश्त से योजना की राशि 1250 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये की जानी है। यह किश्त लाड़ली बहनों को ट्रांसफर होगी, उसके पहले सूची से बड़ी संख्या में लाड़ली बहनों को हटाए जाने की तैयारी है।
हालांकि सरकार के इस कदम से पात्र लाड़ली बहनों को चिंता करने की कोई जरुरत नहीं है। इस सूची से केवल उन महिलाओं को हटाया जाएगा, जो कि योजना के लिए पात्र नहीं हैं। सरकार ने साफ कर दिया है कि बढ़ी हुई राशि केवल उन्हीं महिलाओं को दी जाएगी, जो तय किए गए मानकों पर खरी उतरती होंगी। इसके लिए योजना की पूरी सूची का Audit कराया जाएगा और जिनके नाम गलत तरीके से जुड़ गए हैं, उन्हें बाहर कर दिया जाएगा।
इस तरह से हटाए जाएंगे अपात्रों के नाम
योजना का मकसद है कि पात्र महिलाएं ही इससे लाभ उठा सकें। सरकार का मानना है कि अब तक सूची में कई ऐसे नाम भी दर्ज हो गए हैं, जिन्हें यह लाभ नहीं मिलना चाहिए था। इसलिए सबसे पहले महिलाओं से स्वयं अपील की जाएगी कि अगर वे पात्रता की शर्तें पूरी नहीं करतीं तो खुद ही योजना से नाम वापस लें। इसके बाद विभाग की टीमें घर-घर जाकर जांच करेंगी और अपात्र पाए जाने वालों के नाम हटा दिए जाएंगे।

लाड़ली बहना योजना में राशि वृद्धि का वादा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह घोषणा की थी कि दिवाली के बाद से लाडली बहनों को हर महीने 1500 रुपये मिलेंगे। भाई दूज के बाद से महिलाओं के खातों में यह राशि जमा होना शुरू हो जाएगी। योजना की शुरुआत 2023 में हुई थी, जब महिलाओं को हर महीने 1000 रुपये मिलते थे।
इसके बाद अक्टूबर 2023 में इसे बढ़ाकर 1250 रुपये किया गया। अब इसे और आगे बढ़ाते हुए 1500 रुपये करने का निर्णय लिया गया है। सरकार की मंशा केवल इसी सीमा पर रुकने की नहीं है। आने वाले समय में यह राशि 3000 रुपये प्रतिमाह तक पहुंचाई जाएगी।
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लाखों महिलाएं योजना से जुड़ीं
मध्य प्रदेश की यह योजना Direct Benefit Transfer यानी DBT प्रणाली पर आधारित है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक लगभग 1.26 करोड़ महिलाएं लाडली बहना योजना का हिस्सा हैं। यह प्रदेश की अब तक की सबसे बड़ी DBT योजना है। हर महीने सरकार को इस योजना पर लगभग 1550 करोड़ रुपये खर्च करना पड़ता है।

योजना में अपात्रों को बाहर करने की प्रक्रिया
योजना की शुरुआत से ही सरकार ने स्पष्ट कर दिया था कि केवल पात्र परिवारों को ही इसका लाभ दिया जाएगा। लेकिन जांच में पाया गया कि कई महिलाएं गलत जानकारी देकर योजना में शामिल हो गईं। प्रशासन ने हाल ही में एक बड़े Audit के दौरान करीब 1.63 लाख महिलाओं के नाम सूची से हटाए। इनमें ज्यादातर मामले ऐसे थे, जहां परिवार की आय या अन्य शर्तें पात्रता मानक से मेल नहीं खा रही थीं।
महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने भी इस मामले पर बयान देते हुए कहा कि योजना में तय किए गए नियमों के अनुसार ही कार्रवाई की जाती है। यदि कोई महिला पात्रता की कसौटी पर खरी नहीं उतरती तो उसका नाम हटाना जरूरी है, ताकि योजना का लाभ सही लोगों तक पहुंचे।
किन्हें मिलेगा लाभ, किन्हें नहीं
लाडली बहना योजना के लिए कई Eligibility Conditions तय की गई हैं।
- पहली शर्त यह है कि महिला और उसके परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। अगर परिवार की आय इससे ज्यादा है तो वे योजना से बाहर हो जाएंगे।
- दूसरी शर्त यह है कि परिवार का कोई भी सदस्य Income Tax न भरता हो। यदि घर का कोई व्यक्ति करदाता है तो पूरी परिवार को योजना से बाहर कर दिया जाएगा।
- तीसरी अहम शर्त यह है कि परिवार का कोई सदस्य सरकारी नौकरी में नहीं होना चाहिए। चाहे वह नियमित हो या संविदा कर्मचारी, अगर परिवार का कोई भी व्यक्ति सरकारी सेवा में है या पेंशन प्राप्त कर रहा है तो योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
- इसके अलावा परिवार के पास चार पहिया वाहन (Tractor को छोड़कर) नहीं होना चाहिए। यदि किसी भी सदस्य के नाम पर कार या अन्य वाहन दर्ज है, तो वह परिवार पात्रता सूची से बाहर हो जाएगा।
- भूमि स्वामित्व पर भी शर्तें लागू होती हैं। यदि किसी परिवार के पास 5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि है, तो वे योजना के लिए पात्र नहीं होंगे।
- योजना से बाहर करने वाली एक और शर्त यह है कि यदि कोई महिला पहले से किसी अन्य सरकारी योजना से प्रति माह 1000 रुपये से अधिक की सहायता ले रही है, तो उसे लाडली बहना योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
- राजनीतिक और जनप्रतिनिधि पदों पर आसीन परिवारों को भी योजना से दूर रखा गया है। सांसद, विधायक, निर्वाचित जनप्रतिनिधि और सरकारी बोर्ड या निगमों में पदाधिकारी रहे परिवार इस योजना का लाभ नहीं उठा सकते। हालांकि पंचायत स्तर पर चुने गए वार्ड पंच और उपसरपंच इस नियम से बाहर रखे गए हैं।
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