मुलताई-पट्टन क्षेत्र में 3 और बांधों की जोर शोर से उठ रही मांग, गांव-गांव में सभाओं के जरिए किया जा रहा किसानों को जागरूक

बैतूल। जिले का सबसे बड़ा पारसडोह डैम आठनेर क्षेत्र में है। इस डैम के बनने पर भी उस क्षेत्र के कई गांव के किसान सिंचाई के लिए पानी से वंचित हैं। ऐसे में अब उस क्षेत्र में 3 और बांध बनाए जाने की मांग जोर पकड़ती जा रही है। इन बांधों के लिए गांव-गांव में आम सभाओं के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जल्द ही इस मांग के मुखर रूप से उठने के आसार हैं।
इसी सिलसिले में आज ग्राम मासोद के बाजार चौक में एक सभा हुई। इसमें सिरडी, पीपलपानी, साईखेड़ा, वायगांव, पीपलढाना, मासोद, जामगांव, दातोरा, चिचखेडा, देवझिरी, खेड़ीरामोसी, सांवगी, एवं आष्टा के किसान शामिल हुए। सभा में मकरध्वज सूर्यवंशी ने मुख्य रूप से संबोधित किया। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के जितने भी किसान पारसडोह परियोजना की नहर से वंचित रह गए हैं या क्षेत्र के ऐसे गांव जिन्हें पानी की समस्या के कारण फसलों का लाभ नहीं मिल रहा है, उन किसान भाइयों के लिए किसान समिति के पदाधिकारियों द्वारा भोपाल जाकर शासन से 3 अलग जगहों पर नये बांध बनाने की मांग की गई है।
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उन्होंने बताया कि कवडिया में वर्धा नदी पर वर्धा-टू बांध की मांग है। जिसकी फाईल वल्लभ भवन पहुंच चुकी है। वह शासन के पास ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है। इससे ग्राम, पाबल, पट्टन, ईसापुर, झिरी, तरूड, आमनाथ, तिवरखेड़, वंडली की लगभग 4 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होगी।
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एक बांध नागाढाना और गेहूंबारसा के पास माडू नदी पर बन सकता है। जिसे मुलताई जल संसाधन विभाग सर्वे कराकर शासन को प्रस्ताव भेजने को तैयार हो गया है। जिससे क्षेत्र की 5 से 6 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होगी।
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अंभोरा नदी पर खेड़ीरामोसी और सांवगी के बीच में डैम बनाने की भी मांग की है। जिसके विषय में ग्राम, आष्टा, सांवगी खेड़ीरामोसी, दातोरा, मासोद, वायगाव, साईखेड़ा, सिरडी के सरपंचों से एक वर्ष पूर्व ही प्रस्ताव पारित करवाकर, सासंद की अनुशंसा करवाकर भोपाल में डॉ. हेमंत देशमुख के मार्गदर्शन से जल संसाधन मंत्री तुलसाराम सिलावट के द्वारा पत्र जारी करवा कर मुलताई जलसंसाधन को भेज कर रिपोर्ट मंगाई गई थी।
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इस नये डैम के बनने से ग्राम आष्टा, सावंगी, खेड़ीरामोसी, चिचखेडा, देवझिरी, दातोरा, मासोद, वायगांव, पीपलढाना, साईखेड़ा, सिरडी, पीपलपानी की लगभग 6 से 7 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होगी। मुलताई जल संसाधन विभाग के द्वारा यहाँ पानी की (इल्ड) आवक की कमी बताई जा रही है।
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विभाग द्वारा हवाला दिया गया है कि यहां डैम बनाने से पारसडोह 100 वर्षों में से 75 वर्ष ही भरेगा। इसलिए यहां डैम नहीं बनाने की बात कही है। जिससे इन 10 गांव के किसानों मे रोष व्यापत है। किसानों के द्वारा चेतावनी दी गई है कि सरकार ने यहां डैम नहीं बनवाया तो हम 10 गांव के किसान सरकार के खिलाफ आंदोलन करेंगे।
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