Khedla Shiv Mandir: पांच माह बाद शिवरात्रि पर भक्तों को दर्शन देंगे भोलेनाथ, सावन मास से जलमग्न थे महादेव
Khedla Shiv Mandir: Bholenath will give darshan to the devotees on Shivratri after five months, Mahadev was submerged in the month of Sawan

▪️लोकेश वर्मा, मलकापुर (बैतूल)
Khedla Shiv Mandir: मध्यप्रदेश के बैतूल जिला मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित प्राचीन शिव मंदिर खेड़ला किला में सावन मास से भोलेनाथ जलमग्न थे। बीते अक्टूबर मास से भोलेनाथ का गर्भ गृह लगभग 8 फीट जलमग्न था जो कि अभी तक भी जलमग्न ही था। भोलेनाथ का यह प्राकृतिक जलाभिषेक 10 वर्ष बाद हुआ।
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मध्यप्रदेश का यह अतुलनीय हजारों वर्ष पुराना प्राचीन शिव मंदिर है, जो कि भूमि तल के नीचे स्थित है। यह मंदिर इतना विशिष्ट है कि भूमि तल के नीचे होने के बाद भी शिवलिंग पर चढ़ाया जल और वर्षा काल से गर्भ गृह में भरा जल अपने आप पुन: धरती में चला गया। प्रकृति की गोद में बसे इस प्राचीन शिव मंदिर में प्राचीन काल से प्रति सावन मास में प्रकृति स्वयं भगवान भोलेनाथ का जल अभिषेक करती आ रही है। वर्ष 2012 की मूसलाधार बारिश में भी मंदिर की घंटियों तक गर्भ गृह सावन मास से महाशिवरात्रि तक पूरी तरह जलमग्न था। गर्भ गृह जलमग्न होने से भक्त श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ की बाहर से ही पूजा-अर्चना कर रहे हैं।

राजा इल के खुदवाए तालाब से आता है पानी
मंदिर के गर्भ गृह में रावण बाड़ी के पास स्थित तालाब से पानी आता है। गोंड राजा इल ने तालाब खुदवाया था। राजा देवी के भक्त थे। वे तंत्र मंत्र साधना के साथ-साथ सूर्य साधना के भी ज्ञाता थे। राजा ने साधु, संतों और महात्माओं के आदेश देने पर राज्य में सूखा और अकाल के निदान, सूर्य के तप को कम करने तथा राज्य में कभी पानी की कमी नहीं आए, इन उद्देश्यों से किले के सामने वर्तमान में रावणबाड़ी में 22 हेक्टेयर का तालाब खुदवाया था। बरसात में तालाब में पानी भर जाने से भोलेनाथ का गर्भ गृह भी जलमग्न हो जाता है।
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लगता है महाशिवरात्रि पर मेला(Khedla Shiv Mandir)
प्राचीन शिव मंदिर में वर्षों पुरानी परंपरा अनुसार मेला लगता है। आसपास के ग्रामीण अंचलों के साथ-साथ जिले भर से आए भक्त भोलेनाथ बाबा की पूजा अर्चना करते हैं और मेले का आनंद उठाते हैं। भक्तों के लिए जगह-जगह भंडारे प्रसादी का आयोजन अनेक समितियां एवं ग्रामवासी बड़े ही भाव से करते हैं।
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10 फरवरी को खुलेगा मंदिर का गर्भगृह
प्राचीन शिव मंदिर खेड़ला किला के पुजारी शिवम साबले ने बताया कि सावन से जलमग्न गर्भ गृह का पानी दो दिन पूर्व प्राकृतिक रूप से पूरी तरह से धरती में समा चुका है। 10 फरवरी को पांच नदियों के रुद्राभिषेक के साथ गर्भ गृह खोल दिया जाएगा। अभिषेक के लिए मां ताप्ती का जल 8 फरवरी को कावड़ यात्री खेड़ी घाट से पैदल लाएंगे। तत्पश्चात पं. राजू जोशी के पांडित्य में 10 फरवरी शुक्रवार को 5 घंटे का सहस्त्रधारा भव्य रुद्राभिषेक किया जाएगा। जिसके पश्चात गर्भ गृह एवं मंदिर की रंगाई-पुताई के बाद महाशिवरात्रि पर आम दर्शनार्थ के लिए पूर्ण रूप से भक्तों हेतु गर्भगृह खोल दिया जाएगा।
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प्रति सोमवार लगता है भक्तों का तांता (Khedla Shiv Mandir)
प्रति सोमवार भगवान भोलेनाथ के दर्शन हेतु सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहता है। यहां प्रतिदिन सुबह और शाम को आरती की जाती है। प्रति सोमवार शाम 7 बजे होने वाली महाआरती में आसपास के एक दर्जन ग्राम के लगभग 3 सैकड़ों भक्त शामिल होते हैं। साथ ही भक्तों द्वारा आरती के पश्चात भंडारे का आयोजन भी किया जाता है। आरती में आनंद के बाद भोलेनाथ के भक्त प्रसाद ग्रहण करते हैं।



