Betul Samachar: कोरोना ने छीन लिए माता-पिता, नहीं मिली कोई मदद, गांव वाले कर रहे भाई-बहन का पालन पोषण
Betul Samachar: Corona took away the parents, did not get any help, the villagers are taking care of the siblings

पिता पिता घोष से चलने वाला प्रेम का प्रशासन है
पिता पिता रोटी है कपड़ा है मकान है
पिता पिता छोटे से परिंदे का बड़ा आसमान है
पिता पिता प्रदर्शित अनंत प्यार होता है तो बच्चों को इंतजार है
पिता से ही बच्चों के ढेर सारे सपने हैं
पिता है तो बाजार के खिलौने अपने पिता से ही मां की बिंदी और सुहाग है
पिता परमात्मा की भक्ति है…
▪️ प्रकाश सराठे, रानीपुर
Betul Samachar: स्वर्गीय रवि व्यास की पिता पर लिखी कविता निश्चिंतपुर में एकदम सही चरितार्थ हो रही है। यह इसलिए कि 2 वर्ष पूर्व अप्रैल 2020 में ग्राम पंचायत नूतनडगा के गांव निश्चिंतपुर में कोरोना काल के समय में रविंद्र धामी और उनकी पत्नी सुभाषिनी धामी की मौत हो गई। इसके बाद से 16 वर्ष की रिनीता धामी और 8 वर्ष के अनुज धामी गांव की मदद पर जी रहे हैं। गांव के सभी लोग खाद्य सामग्री सहित अन्य सामान दोनों भाई-बहन को उपलब्ध कराने का कार्य करते हैं। मानव सेवा एकता और अखंडता की मिसाल यदि कहीं देखनी है तो बैतूल जिले के घोड़ाडोंगरी ब्लॉक के पुनर्वास कैंप चोपना के निश्चिंतपुर गांव में देखी जा सकती है।

गांव के सभी लोग अपने-अपने स्तर पर दोनों भाई-बहन की मदद करते हैं। वर्तमान समय में बांस और मेखम के मकान में यह दोनों भाई-बहन रहकर जैसे-तैसे अपनी जीविका काट रहे हैं। यह प्रतिनिधि रविवार को इनके गांव पहुंचा तो 16 वर्षीय निरिता धामी फूट-फूट कर रो पड़ी कि इस दुनिया में उसका कोई नहीं है। गांव के सहारे दोनों भाई-बहन का पालन-पोषण हो रहा है। उन्होंने प्रदेश के मामा शिवराज सिंह चौहान से मदद की आस लगा कर रखी है।
महिला बाल विकास ने माता-पिता के काल के गाल में समाने के बाद से अभी तक गांव के उत्तम बाला, अनिलचंद साना, निर्माण दास, गुरु दास, रंजीत गोलदार के माध्यम से गांव के जन सहयोग से इन दोनों भाई-बहन को खाद्य सामग्री पहुंचाने का काम करते हैं। 16 वर्षीय रिनीता कक्षा बारहवीं की छात्रा है और वह चोपना हाई स्कूल में पढ़ाई कर रही है। उसने जिला महिला बाल विकास को लिखित आवेदन देकर शासन से सहयोग की मांग की, लेकिन अधिकारियों ने उसे सिर्फ गुमराह करने का काम किया है।

छोटी सी छोटी जरूरत का गांव के लोग रखते हैं ध्यान (Betul Samachar)
निश्चिंतपुर गांव के उत्तम बाला बताते हैं कि गांव की लोगों की मदद से खाद्य सामग्री तो पहुंचा दी जाती है, लेकिन बच्चों को रहने के लिए मकान नहीं है। यदि प्रशासन इन बच्चों को मकान की सुविधा उपलब्ध कराएं तो ज्यादा बेहतर होगा। उन्होंने बताया कि 2 माह पहले अजगर-सांप रात के समय में इनके घर में घुस गया था। गांव वालों ने बड़ी मदद करके उस सांप को घर से बाहर निकाला। केवल बास मेंखम के सहारे यह दोनों भाई-बहन इस झोपड़ी में अपनी जीविका गुजार रहे हैं। ऐसे में प्रशासन यदि इनकी मदद करें तो इनकी जीविका चल जाएगी। उत्तम बाला ने उनके लिए सरकारी नौकरी की व्यवस्था करने की मांग भी रखी है, लेकिन प्रशासन ने इनके आवेदन और निवेदन को नजरअंदाज कर रखा है। इससे भी दुखद पहलू तो यह कि गांव के लोगों द्वारा कई बार कलेक्टर से मुलाकात भी की गई, लेकिन नतीजा सिफर ही निकला है।



