kanha ji maharaj : प्रकृति का हम जितना दोहन करेंगे वह भी उतना ही हमारा शोषण करेगी : कान्हा जी महाराज
▪️ लोकेश वर्मा, मलकापुर
श्रीमद्भागवत महापुराण के पंचम दिवस की कथा में श्री धाम वृंदावन से पधारे कथा प्रवक्ता कान्हा जी महाराज ने भगवान कृष्ण की दिव्य बाल लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि मायावादी, भगवान को निराकार बताते हैं जबकि भगवान साकार हैं। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण से आप कोई भी संबंध बना सकते हो, कोई भगवान कृष्ण को भाई मानता है, कोई पिता तो कोई पति पर अन्य देवी देवता से आप का सेवक व भगवान के अलावा और कोई संबंध नहीं होता। कान्हा जी महाराज ने आगे कहा कि भगवान कृष्ण ने गीता में भी कहा है हजारों हजार में कोई बिरला मनुष्य ही कृष्ण को जानने का प्रयास करता है।
भगवान विष्णु ने अभी तक तेईस अवतारों को धारण किया
जब-जब इस पृथ्वी पर असुर एवं राक्षसों के पापों का आतंक व्याप्त होता है तब-तब भगवान विष्णु किसी न किसी रूप में अवतरित होकर पृथ्वी के भार को कम करते हैं। वैसे तो भगवान विष्णु ने अभी तक तेईस अवतारों को धारण किया। इन अवतारों में उनके सबसे महत्वपूर्ण अवतार श्रीराम और श्रीकृष्ण के ही माने जाते हैं। श्रीकृष्ण का जन्म क्षत्रिय कुल में राजा यदुकुल के वंश में हुआ था।

श्मशान भूमि इतनी सुंदर तो मंदिर और लोग कैसे होंगे
कान्हा जी महाराज ने कथा में कहा कि मलकापुर गांव तीर्थ नजर आता है। मां मांचना के पावन तट पर बसा गांव जहां के मोक्षधाम से उठने का मन ना करें उस गांव के मंदिर और लोग कैसे होंगे। जैसा मलकापुर के मोक्षधाम में सघन वन लगा है यहां जो सेवा प्रकल्प चलते हैं वैसा ही भाव नदी के किनारे बसे ग्रामों में होना चाहिए। जैसे हमारे जीवन में पुत्र और पुत्रियां जरूरी है वैसे ही देव वृक्ष भी हमारे जीवन के अभिन्न अंग हैं। कथा में संकल्प लीजिए कि हम अपने जीवन में एक एक वृक्ष लगाएंगे।
नदियों के पुनर्जीवन को लेकर गंभीरता जरुरी
कथा के दौरान कान्हा महाराज ने मां मांचना पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि बैतूल शहर की जीवनदायिनी बीस बरस पहले बारह महीने प्रवाहित होती थी। परंतु अब होली के पहले ही धार बहना बंद हो जाती है। इसका कारण वृक्ष की कटाई और नदी से रेत का अवैध उत्खनन है। आगे कहा कि अभी बीस रुपए लीटर पानी बिक रहा है। जरा सावधान हो जाओ आने वाले समय में हमारे जीवन का क्या दुर्भाग्य होगा जरा उस पर विचार जरूर करें।
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गोवर्धन पर्वत को उठाकर इंद्र के अभिमान को चूर किया
कान्हा जी ने श्रीकृष्ण जी की जीवन गाथा का विस्तारपूर्वक विवरण करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लेते ही कर्म का चयन किया था। नन्हें कृष्ण ने जन्म के छठे दिन ही पूतना का वध कर दिया, सातवें दिन शक्ताशुर को मौत की नींद सुला दिया। तीन महीने के थे तब कान्हा ने व्योमासुर को मार गिराया। प्रभु ने बाल्यकाल में ही कालिया वध किया और सात वर्ष की आयु में गोवर्धन पर्वत को उठाकर इंद्र के अभिमान को चूर-चूर किया। गोकुल में गोचरण किया तथा गीता का उपदेश देकर हमें कर्मयोग का ज्ञान सिखाया। प्रत्येक व्यक्ति को कर्म के माध्यम से जीवन में अग्रसर रहना चाहिए। नीचे क्लिक कर सुनें आज की कथा…
काली कमली वाला मेरा यार है… पर झूम उठे भक्त
कथा के बीच में काली कमली वाला मेरा यार है…..राधिका गोरी से बिरज की छोरी से… जैसे भजनों से पूरा पांडाल गूंज उठा सभी भक्तगण भावविभोर होकर के झूम उठे। वृंदावन से पधारे संगीत कलाकार भोले शास्त्री, किशनजी, मोहनलालजी, राजा जी, शशांक, वशिष्ट, दीपक शास्त्री, विप्रदेव शास्त्री आदि ने सुंदर भजनों की प्रस्तुति दी। कथा के यजमान राकेश, नवनीत, अनित महतो ने गोवर्धन गिरिराज का पूजन किया। कथा से जुड़े बद्रीप्रसाद वर्मा ने बताया कि कल की कथा में महरास, गोपी उधव संवाद, रुकमणी मंगल लीलाओं का वर्णन होगा।



