गांव में की स्कूली पढ़ाई, दीवारों पर अर्थ लिखकर सीखी इंग्लिश, मौत से भी जूझी; इस तरह एक सामान्य परिवार की बेटी टॉप कर बनी IAS ऑफिसर- IAS surbhi gautam success story

IAS surbhi gautam success story: यूपीएससी (UPSC) की परीक्षा दुनियाभर की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। इस परीक्षा को पास कर IAS बनने का सपना तमाम लोग देखते हैं। कई लोग मजबूरी और अभावों को पीछे धकेलते हुए अफसर बनकर भी दिखाते हैं। ऐसी ही कहानी सुरभि की है।
एमपी के सतना जिले के अमदरा गांव की रहने वाली सुरभि गौतम (surbhi gautam) की कहानी भी प्रेरणा देने वाली है। सुविधाओं के अभाव में पढ़ने वाली सुरभि के जीवन में कई उतार चढ़ाव आए, लेकिन उन्होंने सबका डटकर मुकाबला किया और पूरे देश में टॉपर (IAS surbhi gautam) भी बनी।
गांव में पढ़ा स्कूल
सुरभि ने अपनी स्कूली शिक्षा अपने गांव के स्कूल से पूरी की। जब पांचवीं कक्षा का रिजल्ट आया तो सुरभि ने गणित में सौ में से सौ अंक हासिल किये। शिक्षिका ने सुरभि को बुलाकर उनकी पीठ थपथपाई और कहा, ‘तुम्हें गणित में 100 फीसदी अंक मिले हैं। मैंने आज तक किसी को बोर्ड परीक्षा में सौ में से सौ अंक प्राप्त करते नहीं देखा। आप भविष्य में बहुत अच्छा करेंगी।’ इससे सुरभि का हौसला और बढ़ा और उन्होंने अपनी कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में 93.4 फीसदी नंबर प्राप्त किए। उन्होंने गणित और विज्ञान में 100-100 नंबर हासिल किए थे। सुरभि ने अपने अच्छे नंबरों के कारण कक्षा 10वीं और 12वीं में राज्य की मेरिट लिस्ट में जगह बनाई।

मौत से भी लड़ी
स्कूल की पढ़ाई के बीच सुरभि के जोड़ों में बार-बार दर्द उठने लगा, शुरुआती दिनों तक इस दर्द को नजरअंदाज किया लेकिन धीरे-धीरे दर्द पूरे शरीर में फैल गया और एक दिन सुरभि बिस्तर की ऐसी हालत हो गई कि वह बिस्तर से उठ नहीं पाईं।
सुरभि की तबीयत खराब होने के बाद गांव में अच्छे डॉक्टर न होने की वजह से माता-पिता उन्हें जबलपुर लेकर गए। वहां डॉक्टरों ने बताया कि सुरभि को ‘रूमैटिक फीवर’ है। यह ज्यादा समय तक नजरंदाज किया जाए तो व्यक्ति की मृत्यु हो सकती है। इस बीमारी में हृदय को सबसे अधिक नुकसान पहुंचता है। डॉक्टर ने सुरभि को 15 दिन पर इन्जेक्शन लेने की सलाह दी, गांव में कुशल डॉक्टर न होने की वजह से हर 15 दिन पर उनके माता-पिता सुरभि को लेकर जबलपुर जाते थे। इस दौरान सुरभि की सेहत अच्छी नहीं थी लेकिन पढ़ाई से मुंह नहीं मोड़ा।

दीवारों पर अर्थ लिख सीखी अंग्रेजी
सुरभि ने 12वीं कक्षा पूरी करने के बाद राज्य इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा भी अच्छे नंबरों के साथ पास की। उन्होंने भोपाल के एक इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में दाखिला लिया। हालांकि, वह खराब अंग्रेजी बोलने के कारण एक हीन भावना से पीड़ित थी, लेकिन उन्होंने इसे अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। सुरभि ने अपनी अंग्रेजी सुधारने के लिए खुद से अंग्रेजी में बात करना शुरू किया और हर दिन कम से कम 10 शब्दों के अर्थ सीखीं। सुरभि दीवारों पर अर्थ लिखती थीं और उन्हें दिन में कई बार दोहराती थीं। उन्होंने कहीं से भी सुने वाक्यांशों और शब्दों को सुना और उन्हें सीखा और अपनी अंग्रेजी सुधारने के लिए काम किया।

यूपीएससी समेत कई परीक्षाओं को किया क्रैक
सुरभि को कॉलेज में प्लेसमेंट के दौरान टीसीएस कंपनी में नौकरी मिल गई, लेकिन उन्होंने ज्वाइन नहीं किया। उसके बाद उन्होंने लगातार कई प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे BARC, ISRO, GTE, SAIL, MPPSC, SSC, FCI और दिल्ली पुलिस परीक्षा में भाग लिया और उन सभी को क्रैक किया।



