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Mahashivratri In Ujjain: महाशिवरात्रि के रंग में रंगा उज्जैन का महाकाल मंदिर, अलग-अलग रूपों में दूल्हा बने बाबा दे रहे भक्तों को दर्शन

Mahashivratri In Ujjain: Mahakal temple of Ujjain painted in the colors of Mahashivaratri, Baba in different forms giving darshan to the devotees

होगी चार प्रहर में पूजा अर्चना, सतत 44 घंटे मंदिर के पट खुले रहेंगे, 21 लाख दीयो से जगमगाएगा उज्जैन, बनेगा रिकॉर्ड

Mahashivratri In Ujjain: महाशिवरात्रि के रंग में रंगा उज्जैन का महाकाल मंदिर, अलग-अलग रूपों में दूल्हा बने बाबा दे रहे भक्तों को दर्शन• लोकेश वर्मा, उज्जैन से

Mahashivratri In Ujjain: ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में महाशिवरात्रि पर शिव विवाह की मंगल बेला आ गई है।महाशिवरात्रि दीपोत्सव को “शिव ज्योति अपर्णम् 2023” का नाम दिया गया है। पर्व पर 21 लाख दीप प्रज्ज्वलित कर गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड बनाया जाएगा। उज्जैन में महाशिवरात्रि पर 21 लाख दीये प्रज्ज्वलित करने की योजना है। यह संपूर्ण आयोजन जीरो वेस्ट के सिद्धांत पर होगा। मंदिर, घाट और शहर के प्रमुख स्थलों साज-सज्जा हुई है।

उज्जैन में शिव ज्योति अपर्णम् में क्षिप्रा नदी के घाटों सहित शहर के मंदिर, समस्त व्यावसायिक स्थल और घर-घर में दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। विद्युत साज-सज्जा के साथ प्रमुख स्थानों पर रंगोली और साज-सज्जा के अन्य उपक्रम भी होंगे। क्षिप्रा नदी के तट पर केदारेश्वर घाट पर 3 लाख 10 हजार, सुनहरी घाट पर 1 लाख 75 हजार, दत्त अखाड़ा पर 4 लाख 50 हजार, राम घाट से बंबई धर्मशाला पर 2 लाख 50 हजार, बंबई धर्मशाला से नरसिंह मंदिर तक 3 लाख 75 हजार और भूखी माता मंदिर की ओर माली घाट पर 4 लाख 75 हजार दीप प्रज्ज्वलित करने की योजना है। इस कार्य में लगभग 20 हजार स्वयं-सेवकों की भागीदारी होगी। दीपोस्सव में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी उज्जैन आएंगे।

Mahashivratri In Ujjain: महाशिवरात्रि के रंग में रंगा उज्जैन का महाकाल मंदिर, अलग-अलग रूपों में दूल्हा बने बाबा दे रहे भक्तों को दर्शन

ऐसे होंगे बाबा महाकाल के दर्शन (Mahashivratri In Ujjain)

शुक्रवार मध्यरात्रि 2.30 बजे मंदिर के पट खुलेंगे। इसके बाद भस्म आरती होगी। शनिवार तड़के चार बजे से आम दर्शन का सिलसिला शुरू हो जाएगा, जो 19 फरवरी की रात 11 बजे पट बंद होने तक सतत 44 घंटे चलेगा। इस दौरान गर्भगृह में भगवान महाकाल की चार प्रहर होने वाली पूजा-अर्चना का क्रम चलता रहेगा। अधिकतम 50 मिनट में भक्तों को सुविधा पूर्वक भगवान महाकाल के दर्शन शिवरात्रि पर हो जाएंगे ऐसी व्यवस्था महाकाल मंदिर प्रशासन ने की है।

महाकाल दर्शन करने आने वाले भक्त शुक्रवार रात से कर्कराज पार्किंग के सामने बैरिकेड से दर्शन की कतार में लगेंगे। यहां से पैदल चलते हुए गौंड बस्ती के पास से चारधाम मंदिर पहुंचेंगे। यहां से त्रिवेणी संग्रहालय, महाकाल महालोक होते हुए मानसरोवर द्वार से मंदिर में प्रवेश करेंगे। इसके बाद महाकाल टनल से होते हुए मंदिर परिसर में पहुंचेंगे। परिसर में चार अलग-अलग द्वारों से दर्शनार्थियों को कार्तिकेय व गणेश मंडप में प्रवेश दिया जाएगा। भक्त चलायमान व्यवस्था से महाकाल दर्शन करते हुए बाहर निकल जाएंगे। यह संपूर्ण मार्ग करीब तीन किलो मीटर लंबा है।

कब-कब होगी भगवान की पूजा

  • शुक्रवार रात 2.30 बजे पट खुलने के बाद भगवान महाकाल की भस्म आरती होगी।
  • शनिवार सुबह 7.30 बजे नित्य आरती होगी।
  • दोपहर 12 बजे तहसील की ओर से शासकीय पूजा होगी।
  • दोपहर तीन बजे से शनि प्रदोष की विशेष पूजा व रुद्र पाठ होगा।
  • शाम छह बजे से सिंधिया व होलकर स्टेट की ओर से पूजा की जाएगी।
  • शाम 7:30 बजे से नित्य संध्या आरती होगी।
  • रात 11 बजे से महानिषा काल में महाकाल की महापूजा शुरू होगी, जो रातभर चलेगी।
  • रविवार तड़के चार बजे भगवान के शीश सेहरा सजाया जाएगा।
  • सुबह छह बजे सेहरा आरती होगी।
  • दोपहर 12 बजे दिन में एक बार होने वाली भस्म आरती होगी।
  • दोपहर दो बजे भोग आरती के बाद शिवरात्रि महापर्व संपन्न होगा।
  • सतत 44 घंटे दर्शन के बाद रविवार रात 11 बजे मंदिर के पट बंद होंगे

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महाकाल लोक क्या है, जानें खासियत

उज्जैन में महाकाल लोक बनकर तैयार है महाकाल लोग को महाकाल कारिडोर के नाम से भी जाना जाता है। उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में नवनिर्मित कार्य दूर और इसके विहंगम दृश्यों से भक्तों की नजर नहीं हटती इसका कोना-कोना एक-एक इंच देखने योग्य है। रुद्रसागर के आसपास बना लोक में एक कमल तालाब भी बनाया गया है महाकाल लोक भारत की एक संस्कृति गाथा का एक नया उद्गम है। महाकाल लोक में 108 स्तंभ लगाए गए हैं। इस स्थान पर भगवान 200 से ज्यादा मूर्तियां स्थापित हैं। जो भगवान के अलग-अलग रूपों को दर्शाते हैं।

यहां बीचों एक कमल कुंड बनाया गया है। जहां 24 घंटे आकर्षक फव्वारों से भगवान भोलेनाथ का अभिषेक होता है। महाकाल लोक में पौराणिक कथाओं पर आधारित मूर्तियां हैं। इसमें शिव पुराण, त्रिपुरासुर वध, शिव पुराण और शिव तांडव स्वरूप की विभिन्न कहानियों को दर्शाने वाली मूर्तियां, भित्ति चित्र और शास्त्र बाईं और दाईं ओर फैले हुए हैं।

महाकाल लोक कॉरिडोर का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 11 अक्टूबर 2022 को 20.33 हेक्टेयर में 316 करोड़ की लागत से किया गया है।

लोक का क्या मतलब होता है?

हिन्दू मान्यता के अनुसार देवलोक, भू-लोक व पाताल लोक माने जाते हैं। हिंदू धार्मिक ग्रंथों में “लोक” संबंधित जानकारी हमें मिलती है। “लोक” संस्कृत भाषा का एक शब्द है, जिसका अर्थ ‘संसार’ होता है। लोक का मतलब होता है।

भू-लोक- पृथ्वी को भू-लोक कहा जाता है। भू-लोक में हम सभी प्राणी रहते हैं।

पाताल लोक- हिन्दू धर्म के अनुसार पृथ्वी के नीचे पाताल लोक है। सात प्रकार के पाताल लोक विष्णु पुराण के अनुसार हैं।

देवलोक : ऐसी मान्यता है कि देवलोक या स्वर्ग लोक में उस स्थान को कहा जाता है, जहां हिन्दु देवी और देवताओं का वास रहता है।

महाकाल लोक की खासियत

महाकाल लोक में भगवान शिव, देवी सती और दूसरे धार्मिक किस्सों से जुडी करीब 200 से ज्यादा मूर्तियां बनाई गयी है।

महाकाल लोक में 26 फीट ऊंचा नंदी द्वार मुख्य आकर्षण का केंद्र है। महाकाल लोक में 108 स्तंभ लगाए गए हैं। यह महाकाल क्षेत्र विस्तार का पहला चरण है।

पूर्व में मंदिर का क्षेत्रफल 2.82 हेक्टेयर था, जो परियोजना पूर्ण होने के पश्चात बढ़कर 20.33 हेक्टेयर हो गया है और इसे 47 हेक्टेयर करने का प्रस्ताव है।

महाकाल कॉरिडोर में देश का पहला नाइट गार्डन भी बनाया गया है। यहां भगवान शिव, शक्ति और अन्य धार्मिक घटनाओं से जुड़ी मूर्तियां स्थापित की गई हैं।

बड़ी-बड़ी प्रतिमाएं लगाई गई हैं (Mahashivratri In Ujjain)

यहां 9 फीट की 19 प्रतिमाएं लगायी गयी है, जिसमें- यक्ष, यक्षिणी, सिंह, बटुक भैरव, सती, पार्वती, ऋषि भृंगी, विष्णु, नंदीकेश्वर, शिवभक्त रावण, श्रीराम, परशुराम, अर्जुन, सती, ऋषि शुक्राचार्य, शनिदेव और ऋषि दधिचि शामिल है। 10 फीट की 8 प्रतिमाएं लगाई गयी हैं जिसमें लेटे हुए गणेश, हनुमान शिव अवतार, सरस्वती, लक्ष्मी, पार्वती, लकुलेश, पार्वती के साथ खेलते गणेश को दर्शाया गया है।

11 फीट की 17 प्रतिमाएं हैं जिनमे प्रवेश द्वार पर गणेश, अर्धनारीश्वर, अष्ट भैरव, ऋषि भारद्वाज, वशिष्ठ, विश्वामित्र, गौतम, कश्यप और जमदग्नी हैं।

15 फीट ऊंची 23 प्रतिमाएं लगाई गयी हैं जिसमे शिव नृत्य, 11 रुद्र, महेश्वर अवतार, अघोर अवतार, काल भैरव, शरभ अवतार, खंडोबा अवतार, वीरभद्र द्वारा दक्ष वध, शिव बरात, मणिभद्र, गणेश व कार्तिकेय के साथ पार्वती, सूर्य, कपालमोचक शिव। 18 फीट की 8 प्रतिमाएं है जिनमे नटराज, गणेश, कार्तिकेय, दत्तात्रेय अवतार, पंचमुखी हनुमान, चंद्रशेखर महादेव की कहानी, शिव और सती और समुद्र मंथन दृश्य शामिल हैं।

महाकाल लोक के बनने के बाद यह एकमात्र ऐसा मंदिर बन गया है, जहां श्रद्धालु दर्शन के साथ शिव से जुड़ी हर कहानी जान सकते हैं। इसे बनाते समय पर्यावरण का भी विशेष ध्यान रखा गया है। महाकालेश्वर मंदिर परिसर के विस्तार एवं सुंदरीकरण के लिए बनी 700 करोड़ की परियोजना “श्री महाकाल लोक योजना” बढ़ाकर 1174 करोड़ की हो गई है।

 

उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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