Betul Samachar: राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारत की सांस्कृतिक परम्परा व जीवन मूल्यों की पोषक : इन्दर सिंह परमार
Betul Samachar: National Education Policy nurtures India's cultural tradition and life values: Inder Singh Parmar
भारत भारती संस्था के प्राथमिक विद्यालय के अमृत भवन का लोकार्पण

Betul Samachar (बैतूल)। भारत भारती शिक्षा समिति जामठी, बैतूल में भारत बीपीसीएल के सहयोग से निर्मित भारत भारती प्राथमिक विद्यालय अमृत भवन एवं शिशु वाटिका का लोकार्पण राज्य शिक्षा मंत्री इन्दरसिंह परमार के मुख्य आतिथ्य में एवं सांसद दुर्गादास उइके की अध्यक्षता में संपन्न हुआ।
इस अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार से भवन का वास्तु पूजन, हवन किया गया जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सेवा प्रमुख पराग अभ्यंकर, भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड के सीएसआर सहायक प्रबंधक सायन चटर्जी, सरस्वती विद्या प्रतिष्ठान भोपाल के सहसचिव निलाभ तिवारी, पूर्व सांसद एवं कुशभाऊ ठाकरे न्यास के अध्यक्ष हेमन्त खण्डेलवाल, आमला विधायक डॉ. योगेश पण्डाग्रे, जनजाति शिक्षा के राष्ट्रीय सहसंयोजक बुधपाल सिंह ठाकुर, विभाग समन्वयक सुनील दीक्षित सहित जिले के प्रमुख जनप्रतिनिधि, शासकीय व शिक्षा विभाग के अधिकारी, सामाजिक व शैक्षिक संस्थाओं के पदाधिकारी, भारत भारती शिक्षा समिति के पदाधिकारी एवं 300 से अधिक अभिभावक एवं ग्रामीण जन सम्मिलित रहे।
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इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री परमार ने कहा कि शिक्षा देश को एक दिशा प्रदान करती है। इस क्षेत्र में किये गये योगदान को पुण्य माना जाता है। भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन से सहयोग से विद्यालय भवन निर्माण कार्य पूर्ण हुआ है। इस हेतु वे धन्यवाद के पात्र हैं। श्री परमार ने कहा कि कार्पोरेट सेक्टरों को अधोसंरचना के कार्यों में सहयोग करना चाहिए।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बारे में विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा परंपरा को पुनर्स्थापित करने का कार्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति करेगी। इस प्रकार की शिक्षा नीति बनाने की आवश्यकता इसलिए महसूस हुई कि वर्तमान शिक्षा में भारतीय परंपरा, हमारे सांस्कृतिक मूल्यों का लोप हुआ और उनकी अनदेखी की गई। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में हमारे वैदिक ज्ञान, संस्कृति, व्यहारिक ज्ञान, रोजगारपरक शिक्षा पर बल दिया गया है। शिक्षा को बोझरहित करने का प्रयास किया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारत की सांस्कृतिक परम्परा व जीवन मूल्यों की पोषक है।

अब हम गुलामी के इतिहास के स्थान पर पुस्तकों में शौर्य और भारत के गौरव का इतिहास पढ़ेगें। अंग्रेजी शासनकाल में से चली आ रही शिक्षा प्रणाली ने हमारे इतिहास को एक अलग तरीके से प्रस्तुत किया जिससे वर्तमान पीढी को भारत का गौरवशाली इतिहास जानने का अवसर नहीं मिल सका। भारत के लोग कभी निरक्षर नहीं रहे। हमारे यहाँ सात लाख गुरूकुल थे जिनमें जीवन मूल्यों, रोजगार, कृषि, जीव विज्ञान, शिल्पकारी, आध्यात्म नैतिक शिक्षा दी जाती थी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में इन तत्वों का समावेश किया गया है।
भारत भारती विद्यालय इन गुणों एवं गतिविधियों का केन्द्र बनेगा, ऐसा मेरा विश्वास है। शिक्षा के क्षेत्र में इन्ही प्रयासों से भारत आत्म निर्भर बनेगा। श्री परमार ने कहा कि प्रदेश सरकार हमारा विद्यालय हमारा कोष योजना जनभागीदारी के सहयोग से प्रारंभ करने जा रही है। जिससे विद्यालयों की सामान्य आवश्यकताऐं स्थानीय माध्यम से पूरी की जा सकेंगी।
कार्यक्रम के प्रारंभ में माँ सरस्वती की वन्दना और पूजन किया गया। अपने स्वागत भाषण में भारत भारती शिक्षा समिति के सचिव मोहन नागर ने कहा कि भारत भारती परिसर में ग्राम्य विकास के विभिन्न आयाम संचालित हैं। जिसमें जैविक खेती, परंपरागत कृषि प्रशिक्षण, जैविक खाद निर्माण, देशी नस्ल की गौशाला, औषधी निर्माण, पर्यावरण संरक्षण आदि गतिविधियाँ वर्ष भर संचालित रहती हैं। हमारे बहुआयामी प्रकल्पों का लाभ जनसामान्य को मिले इस हेतु यह एक शिक्षा केन्द्र के रूप में भी महत्व रखता है।
प्राथमिक विद्यालय भवन के द्वितीय तल के निर्माण के बाद क्षेत्र के 52 ग्रामों के बच्चों को स्नेहिल वातावरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी। इस हेतु भारत पेट्रेालियम कार्पोरेशन ने हमें सहयोग प्रदान किया है। इस निर्माण कार्य के पूर्ण हो जाने से 800 से 1000 बालक-बालिकाऐं यहाँ अध्ययन कर पाएंगे।

भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन के सहायक प्रबंधक सायन चटर्जी ने कहा कि हमारा कार्पोरेशन संपूर्ण भारत में सामाजिक उत्तरदायित्व के कार्यों में विशेषकर शिक्षा के क्षेत्र में वित्तीय सहयोग करता है। हम केवल साधन मात्र हैं। देश के विकास में सहयोग तो ऐसे विद्यालयों में पढकर यहाँ के विद्यार्थी करेंगे। हम उन्हेें सुविधाऐें दे सकते हैं।
इस अवसर पर अध्यक्षीय उद्बोधन में क्षेत्रीय सांसद श्री उइके ने कहा कि मां सरस्वती के इस प्रांगण में अमृत भवन के निर्माण पर मुझे अत्यंत प्रसन्नता है। हमारे यहाँ शिक्षालयों में गुरू-शिष्य के एकाकार होने की परंपरा रही है। प्राचीन काल में गुरूकुलों में संपूर्ण शिक्षित व्यक्ति का निर्माण होता था। मैकाले शिक्षा पद्धति ने हमारी तंत्र को दूषित किया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लागू हो जाने से देश का बहुमुखी विकास होगा।
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कार्यक्रम में विद्यालय भवन के निर्माण में सहयोगी कर्मचारियों का सम्मान किया गया जिसमें भवन कान्ट्रेक्टर विद्यासागर प्रसाद, मूर्तिकार ओमकार शास्त्री, चित्रकार हरिहर जी, विद्यालय के पूर्व प्रधानाचार्य राजेश पाटिल और अमर धुर्वे का अतिथियों द्वारा शाल-श्रीफल से सम्मान किया गया। साथ ही प्राथमिक विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई हस्तलिखित पत्रिका का विमोचन किया गया। कार्यक्रम का संचालन जीतेन्द्र तिवारी ने किया और आभार प्रदर्शन प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य वैभव जोशी ने किया।



