खेती किसानी

Soil Nutrient Deficiency Betul: बैतूल की मिट्टी में जिंक, सल्फर और नाइट्रोजन की भारी कमी, 70% सैंपल फेल

Soil Nutrient Deficiency Betul: मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में किसान भाइयों को सतर्क होने की आवश्यकता है। दरअसल, जिले में धीरे-धीरे धरती की सेहत बिगड़ती जा रही है। यहां मिट्टी परीक्षण में एक चौंकाने वाला परिणाम सामने आया है। बैतूल जिले की मिट्टी में जिंक-सल्फर और नाईट्रोजन की भारी कमी सामने आई है।

जमीन में इन पोषक तत्वों की कमी चिंता का कारण बनी हुई है। जमीन के पोषक तत्वों को ध्यान में रखते हुए खेती नहीं हुई तो आने वाले दिनों में इसका विपरीत प्रभाव देखने को मिलेगा। जानकारों के अनुसार यह स्थिति रासायनिक खादों के अंधाधुंध उपयोग किए जाने से बन रही है।

100 में से 70 सैंपल हो रहे फेल (Soil Nutrient Deficiency Betul)

मिट्टी परीक्षण केन्द्र से मिली जानकारी के मुताबिक मिट्टी के 100 सैंपलों में से 70 प्रतिशत सैंपलों में जिंक-सल्फर और नाईट्रोजन की कमी पाई गई है। बैतूल की मिट्टी में सबसे ज्यादा पोटाश की मात्रा पाई गई है। मिट्टी में संतुलित मात्रा में पोषक तत्व पाए जाने पर फसल की अच्छी पैदावार होती है।

किसी भी तत्व की अधिकता ठीक नहीं (Soil Nutrient Deficiency Betul)

किसी भी पोषक तत्व की अधिकता फसलों के लिहाज से ठीक नहीं है। जिले की मिट्टी में पोटाष की अधिकता पाई गई है, जो चिंता का कारण बनते जा रही है। रासायनिक उर्वरकों का बिना विशेषज्ञ और जांच के अंधाधुंध प्रयोग किया जा रहा है। साल-दर-ासाल धरती में घटते पोषक तत्वों से फसल उत्पादन पर भी इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है।

बिना मिट्टी परीक्षण के खाद का उपयोग (Soil Nutrient Deficiency Betul)

कृषि के क्षेत्र में अधिकतर किसान बिना मिट्टी परीक्षण के बोनी करते हैं। ऐसे में फसल उत्पादन पर भी इसका असर पड़ने लगा है। किसान मिट्टी परीक्षण किए बिना अंदाज से रासायनिक उर्वकों का सबसे ज्यादा उपयोग करते हैं।

संतुलन बिगड़ने से फसलों पर विपरीत प्रभाव (Soil Nutrient Deficiency Betul)

पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ने से फसलों पर भी विपरीत प्रभाव देखने को मिलता है। किसानों को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। अधिक उत्पादन के पीछे दौड़ते हुए किसानों को रासायनिक उर्वरकों का उपयोग संतुलित मात्रा में करना चाहिए।

4 महीने में 2200 सैंपलों की जांच (Soil Nutrient Deficiency Betul)

प्राप्त जानकारी के मुताबिक बैतूल बाजार मिट्टी परीक्षण केन्द्र पर अप्रैल से लेकर अब तक इस चार माह के भीतर में 2200 सैंपलों की जांच हुई है। इन सैंपलों की जांच में पोटाश की अधिकता पाई गई है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है, मिट्टी में किसी भी पोषक तत्व की अधिकता अच्छी नहीं है। किसान मिट्टी परीक्षण के बाद ही आवश्यकतानुसार खेतों में उर्वरकों का उपयोग करें। (Soil Nutrient Deficiency Betul)

इनका कहना….

4 महीने के भीतर लगभग 2200 मिट्टी सैंपलों की जांच हुई, जिसमें जिंक-सल्फर और नाईट्रोजन पोषक तत्वों कमी पाई है। 70 प्रतिशत सैंपलों में पोटाष की मात्रा अधिक पाई है।
– चन्द्रशेखर चौधरी, सहायक भू सर्वेक्षण अधिकारी, बैतूल

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs):

❓ बैतूल जिले की मिट्टी में कौन-कौन से पोषक तत्वों की कमी पाई गई है?

👉 मिट्टी परीक्षण में जिंक (Zinc), सल्फर (Sulphur) और नाइट्रोजन (Nitrogen) की भारी कमी पाई गई है, जो फसलों की सेहत के लिए गंभीर चिंता का विषय है।


❓ मिट्टी परीक्षण के कितने सैंपल फेल हुए हैं?

👉 बैतूल जिले में 100 में से 70 प्रतिशत सैंपल फेल पाए गए हैं, जिनमें पोषक तत्वों की असंतुलित मात्रा पाई गई।


❓ कौन सा तत्व बैतूल की मिट्टी में अधिक मात्रा में पाया गया है?

👉 परीक्षण में पोटाश (Potash) की मात्रा सबसे अधिक पाई गई है, जो भी फसलों के लिए संतुलन बिगाड़ सकती है।


❓ रासायनिक उर्वरकों का अंधाधुंध उपयोग क्यों नुकसानदायक है?

👉 बिना परीक्षण के उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ता है, जिससे फसल उत्पादन पर नकारात्मक असर पड़ता है।


❓ किसानों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

👉 किसानों को बोनी से पहले मिट्टी परीक्षण कराना चाहिए और केवल ज़रूरत अनुसार उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए, ताकि मिट्टी की सेहत बनी रहे। (Soil Nutrient Deficiency Betul)


❓ कितने सैंपलों की जांच अब तक की जा चुकी है?

👉 अप्रैल से जुलाई 2025 के बीच 2200 मिट्टी सैंपलों की जांच बैतूल मिट्टी परीक्षण केंद्र पर की गई है। (Soil Nutrient Deficiency Betul)

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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