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एकता और आत्मनिर्भरता की मिसाल : नहीं ली शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने सुध तो ग्रामीण खुद ही कर रहे सड़क को दुरुस्त

Example of unity and self-reliance एकता और आत्मनिर्भरता की मिसाल : नहीं ली शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने सुध तो ग्रामीण खुद ही कर रहे सड़क को दुरुस्त▪️ नवील वर्मा, शाहपुर

आजादी के 75 साल बाद (75 years after independence) भी आज भी कई गांव ऐसे हैं जिन्हें पक्की सड़क तक मुहैया नहीं हो पाई है। ग्रामीण जनप्रतिनिधियों और शासन-प्रशासन से गुहार लगा-लगा कर थक चुके हैं। लेकिन, उनकी मांग पूरी नहीं हो रही।

ऐसा ही एक अभागा गांव है तारमखेड़ा (Taramkheda village)। हालांकि, यहां के ग्रामीण इसके बावजूद मायूस या निराश नहीं हुए बल्कि एक अनूठा निर्णय उन्होंने लिया। अपने हाथों में उन्होंने गैची-फावड़े थामे और निकल पड़े इस सड़क को दुरुस्त कर आवाजाही के लायक बनाने के लिए। पिछले 4 दिनों से तारमखेड़ा के हर घर से एक सदस्य इस श्रमदान में हिस्सा ले रहा है।

सभी की यही कोशिश है कि सड़क को इस लायक बना दिया जाए जिससे उससे वाहनों की आवाजाही हो सके। इस श्रमदान में जगदीश पुंजाम, लादुराम यादव, साबू उइके, मनोहरी उइके, साहब उइके, राजू उइके, रामप्रसाद उइके, पंचम उइके, रतन उइके, संतोष उइके सहित अन्य ग्रामीण हिस्सा ले रहे हैं।

ग्रामीण बताते हैं कि तारमखेडा से खोयरा गांव (Taramkheda to Khoyra Village) तक आज तक पक्की सड़क नहीं बनी है। इस 6-7 किलोमीटर लंबी सड़क का अधिकांश हिस्सा पहाड़ी है। जिस पर चढ़ाई बहुत अधिक है। रास्ता खस्ताहाल होने और बारिश में दलदल होने से कार और एंबुलेंस जैसे वाहन तो इससे निकल ही नहीं सकते।

ट्रैक्टर से ही जैसे-तैसे भवन निर्माण सामग्री और कृषि सामग्री लाते हैं। अकेला ट्रैक्टर भी यहां ट्रॉली नहीं खींच पाता। ऐसे में दूसरे ट्रैक्टर से टोचन करके ट्रैक्टर ट्रॉली निकालना पड़ता है। यह सामग्री जरूरी भी है, जिसे लाने के लिए बारिश खत्म होने का इंतजार भी नहीं किया जा सकता। इसके अलावा ग्रामीणों को इसी रोड से ढोढरामऊ साप्ताहिक बाजार (Dhodharamau weekly market) और सभी शासकीय कार्यों के लिए शाहपुर जाना होता है। यहां वीडियो में देखें कैसे ग्रामीण श्रमदान कर बना रहे सड़क…

तारमखेड़ा की पंचायत खापा (Khapa Panchayat) है वहीं राशन दुकान डाबरी में है। इन दोनों जगह भी इसी रोड से जाना होता है। आस-पास के दर्जनों गांवों के लोगों की आवाजाही भी इसी रास्ते से होती है। सभी को रोज खराब सड़क के कारण परेशानियों से जूझना पड़ता है।

सबसे बड़ी बात यह है कि तारमखेड़ा में प्रसिद्ध हनुमान मंदिर (Famous Hanuman Temple in Taramkheda) है। वहां हर शनिवार और मंगलवार को श्रद्धालुओं का मेला लगा रहता है। इन भक्तों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस सड़क का कुछ हिस्सा नर्मदापुरम जिले में आता है वहीं बैतूल जिले का भी यह आखरी छोर है। यही कारण है कि इस सड़क की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा।

एकता और आत्मनिर्भरता की मिसाल : नहीं ली शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने सुध तो ग्रामीण खुद ही कर रहे सड़क को दुरुस्त

यही वजह है कि हमने खुद ही इसे सुधारने का निर्णय लिया। निर्णय के अनुसार हर घर से एक सदस्य रोज श्रमदान कर रहा है। सड़क में जहां जरूरत पड़ रही वहां पत्थर डालकर इसे ठीक कर रहे हैं ताकि ट्रैक्टर जैसे वाहन तो निकल सके और बाइक भी आ जा सके। इससे परेशानी से थोड़ी तो राहत मिलेगी।

उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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