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Kawad Yatra : 51 जोड़ों ने किया पार्थिव पूजन एवं रुद्राभिषेक, माचना का जल लेकर निकले कांवड़िए

Kavad Yatra: 51 couples performed earth worship and Rudrabhishek, unbroken ritual by taking water of Machna

Kawad Yatra : 51 जोड़ों ने किया पार्थिव पूजन एवं रुद्राभिषेक, माचना का जल लेकर निकले कांवड़िए ▪️ लोकेश वर्मा, मलकापुर (बैतूल)

Kawad Yatra : सावन के महीने में शिव आराधना का बड़ा महत्व है। इस दौरान जगह-जगह कांवड़ियों की लम्बी कतारें बम-बम भोले के जयकारे लगाते हुए दिखती हैं। हर साल श्रावण मास में लाखों की तादाद में कांवड़िए सुदूर स्थानों से निकलकर पवित्र नदियों के जल से भरी कांवड़ लेकर पदयात्रा करके अपने गांव वापस लौटते हैं।

आज श्रावण मास के षष्ठम सोमवार एवं अधिकमास की शिवरात्रि के अवसर पर जिला मुख्यालय के समीप ग्राम मलकापुर में जीवनदायिनी माचना नदी से जल भरकर कांवड़ यात्रा (Kawad Yatra) निकाली गई जो ग्राम के मुख्य मार्गों से बोल बम का जयघोष करती हुई शिव मंदिर पहुंची। जिसमें छोटे-छोटे बच्चे, बूढ़े, जवान और महिलाएं कांवड़िए बनकर सम्मिलित हुए। जहां पर प्रसिद्ध भागवताचार्य पंडित नेतराम शर्मा एवं ज्योतिषाचार्य संस्कार शर्मा के पांडित्य में पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं रूद्र अभिषेक के साथ हवन, पूजन एवं भंडारा संपन्न हुआ।

Kawad Yatra : 51 जोड़ों ने किया पार्थिव पूजन एवं रुद्राभिषेक, माचना का जल लेकर निकले कांवड़िएपार्थिव शिवलिंग का यह है महत्व (Kawad Yatra)

पं. नेतराम शर्मा ने बताया कि शिव महापुराण के अनुसार पार्थिव शिवलिंग की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और कष्टों का निवारण होता है तथा सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है। कलयुग में मोक्ष प्राप्ति के लिए और व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण के लिए मिट्टी के शिवलिंग को उत्तम बताया गया है। कहा जाता है कि जो भी भक्त मिट्टी का शिवलिंग बनाकर पार्थिव शिवलिंग का पूजन और रुद्राभिषेक करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और विशेष फल की प्राप्ति होती है। शिवपुराण में पार्थिव शिवलिंग का विशेष महत्व है।

Kawad Yatra : 51 जोड़ों ने किया पार्थिव पूजन एवं रुद्राभिषेक, माचना का जल लेकर निकले कांवड़िएशिवलिंग का निर्माण कर शिव रुद्राभिषेक एवं पूजन

ग्राम मलकापुर में पार्थिव पूजन के संयोजक मुन्नालाल विश्वकर्मा ने बताया कि ग्राम के 51 जोड़ों को एक साथ मंदिर परिसर में पंडित जी ने पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कराकर विधि विधान से पूजन अर्चन प्रारम्भ करवाया। सर्वप्रथम प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के आह्वान एवं कार्तिकेय, मां पार्वती के ध्यान पश्चात श्री शिवपरिवार गण पूजन, पार्थिव पूजन एवं शिवरुद्राभिषेक, रुद्राअष्टकम पाठ के साथ सम्पूर्ण विधिविधान से विभिन्न प्रकार की औषधियों से सम्पूर्ण वैदिक मंत्रों से अभिषेक तत्पश्चात् उत्तम स्वास्थ्य के लिए यज्ञ एवं महा आरती शिव मंदिर मलकापुर में सम्पन्न हुई। जिसमें ग्राम के सैकड़ों शिव भक्त सम्मिलित हुए एवं प्रसादी ग्रहण की।

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