Jal Mahotsav : एमपी के इस जिले में ढोल ढमाकों के साथ जल संरचनाओं पर पहुंच कर ग्रामीण करते हैं बोरी बंधान
In this district of MP, villagers reach water structures with drums and tie sacks.

बैतूल। विद्या भारती जनजाति शिक्षा व भारत भारती के माध्यम से बैतूल जिले के 315 ग्रामों में इस वर्ष वर्षाकाल के बाद नदी-नालों के बहते पानी को रोकने हेतु जनभागीदारी से बोरी बन्धान बनाये जायेंगे। बैतूल जिला पहाड़ी क्षेत्र में होने से अच्छी वर्षा के बावजूद ग्रीष्मकाल में पानी की कमी आती है। इस हेतु पानी रोकने के ये छोटे-छोटे उपाय अत्यन्त कारगर होते हैं।
विद्या भारती के एकल विद्यालय के माध्यम से आमजन को साथ लेकर वर्षा के पूर्व 75 पहाड़ियों पर 60 हजार से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण किया गया है, जिसके माध्यम से करोड़ों लीटर वर्षाजल धरती के पेट में गया है। अब वर्षा के बाद बोरी बन्धान के माध्यम से पानी रोकने का कार्य किया जायेगा।

जिले में प्रतिवर्ष पानी रोको अभियान का यह कार्यक्रम जल महोत्सव के रूप में मनाया जाता है। जिसके अन्तर्गत ग्राम-ग्राम में नदी-नालों पर बोरी बन्धान के माध्यम से बहते पानी को रोककर भूजल स्तर बढ़ाने के लिए सामुदायिक प्रयास किये जाते हैं। एक बोरी बन्धान में संरक्षित जल से 20 से 30 एकड़ की सिंचाई भी हो जाती है तथा बन्धान के आसपास के क्षेत्र में भूजल स्तर में वृद्धि होती है।
विद्या भारती जनजाति व भारत भारती शिक्षा संस्थान के माध्यम से दो दशक से भी अधिक समय से चल रहे इस आयोजन से अब आमजन जुड़ने लगा है। इसीलिए बोरी बन्धान के ये आयोजन अब जल महोत्सव के रूप में मनाये जाते हैं। इसके अन्तर्गत ग्रामीण जन पूर्व तैयारी कर ढोल-ढमाकों के साथ नदी पर जाते हैं। नदी का पूजन कर खाली बोरियों में नदी की रेत भरकर व बोरियों के बीच में काली मिट्टी डालकर बहते पानी को रोकते हैं।
इसकी पूर्व तैयारी हेतु भारत भारती में दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में जल महोत्सव की रूपरेखा तय की गई। जिसमें जिले के प्रमुख कार्यकर्ताओं द्वारा बोरी बन्धान के स्थान चिन्हित किये गये। आगामी 15 दिनों में ग्रामों की जलशक्ति टोली के कार्यकर्ताओं की बैठकों का आयोजन होगा। कार्यशाला में भारत भारती के सचिव मोहन नागर, जनजाति शिक्षा के जिला प्रमुख नागोराव सिरसाम, सह जिला प्रमुख बाजीराम यादव सहित जिले की जलशक्ति टोलियों के संकुल व उपसंकुल प्रमुख उपस्थित थे।
कार्यकर्ताओं ने तय किया कि 15 अक्टूबर के बाद बोरी बन्धान के कार्य प्रारम्भ कर दिये जायेंगे। कार्यशाला में यह भी विचार किया गया कि नदी-नालों पर बने स्टॉप डेम समय से बन्द हो, इस हेतु स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों का ध्यान दिलाया जाएं।



