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सिमटते जंगलों के बीच जनजाति समुदाय की आजीविका हाट बाजार

बैतूल। देश दुनिया और दिखावे से दूर शांत दुनिया, प्रकृति की गोद में जीवन यापन करने वाली जनजाति समाज की वृद्धाओं की आजीविका हाट बाजार ही है। वे पाढर, भैंसदेही, भीमपुर, चिचोली, शाहपुर आदि के सुदूर ग्रामीण अंचलों से अपनी बेल बागुड़ में फैली हुई जैविक देशी लौकी, कुम्हड़ा, तोरई, करेला, कद्दू , बल्लर, बेल, टमाटर के साथ ही ताजी हरी साग- सब्जी लिए हाथों में बटले, बाकड़े पहने आदिम संस्कृति गुदना और निश्छल हंसी लिए सुबह की बस से सदर बाजार आती हैं।

यहाँ वे अपनी वनोपज को बिना व्यापारी के सीधे ग्राहक को विक्रय कर अपनी आजीविका की सामग्री खरीद कर अपने गांव लौटती हैं। खास बात यह है कि जिस समय ये पहाड़ी सब्जियां बाजार में आना बंद होती है, उस समय सब्जियों के दाम आसमान में पहुंच जाते हैं।

नोट: सदर बाजार आए तो अपनी पॉकेट का और मोबाइल का जरूर ध्यान रखें।

(रविवार सदर बाजार बैतूल में घूमते- घूमते: लोकेश वर्मा)

उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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