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Khatu Dham Foot Pilgrimage: बैतूल से खाटू धाम तक 901 KM पदयात्रा: रोहित ठाकुर की आस्था की मिसाल

Khatu Dham Foot Pilgrimage: बैतूल। कलयुग में श्रीकृष्ण के अवतार के रूप में पूजे जाने वाले बाबा श्याम के नाम पर जब आस्था जागती है, तो राहें खुद ब खुद आसान हो जाती हैं। ग्राम भडूस के रोहित ठाकुर ने इसी आस्था के सहारे 901 किलोमीटर की बैतूल से श्री खाटू धाम तक की पदयात्रा पूरी कर भक्ति की मिसाल कायम की।

रोहित ने साबित कर दिया कि जब मन में धर्म और आस्था की ज्वाला हो, तो कोई भी डगर कठिन नहीं होती। पूरे 23 दिनों तक धूप-बारिश की परवाह किए बिना, केवल नाम और निशान के सहारे खाटू धाम की ओर बढ़ते इस युवा भक्त की यह पदयात्रा अब गांव-गांव में भक्ति की प्रेरणा बन चुकी है।

बाबा के परम श्रद्धालु हैं रोहित ठाकुर (Khatu Dham Foot Pilgrimage)

रोहित ठाकुर खाटूश्याम बाबा के परम श्रद्धालु हैं। उन्होंने लगातार दूसरी बार बाबा के निशान के साथ पदयात्रा कर भक्ति का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया है। गांव भडूस से बाबा का ध्वज लेकर निकले रोहित ठाकुर ने रास्ते में हर पड़ाव पर बाबा का पूजन और दर्शन कर अपनी आस्था को और अधिक दृढ़ किया। इटारसी, भोपाल, ब्यावरा, खिलचीपुर, कोटा होते हुए अंत में राजस्थान स्थित खाटूधाम पहुंचकर बाबा के चरणों में निशान चढ़ाया गया। इस निशान यात्रा के अंत में उन्होंने बाबा के चरणों में चंडी (ध्वज) अर्पित किया।

जब तक शरीर में प्राण, तब तक यात्रा (Khatu Dham Foot Pilgrimage)

उनका कहना है कि जब तक शरीर में प्राण हैं, यह यात्रा निरंतर जारी रहेगी। भक्ति से सराबोर इस पदयात्रा में रोहित ठाकुर ने हर दिन सुबह बाबा के नाम का जाप कर यात्रा शुरू की और रात को आरती व कीर्तन के साथ विश्राम किया। रास्ते में मिले सैकड़ों श्रद्धालु उनके सेवा भाव से अभिभूत हुए और बाबा के जयकारों से वातावरण गुंजायमान होता रहा।

यात्रा नहीं, आत्मा-परमात्मा का मिलन (Khatu Dham Foot Pilgrimage)

राष्ट्रीय हिंदू सेना के प्रदेश अध्यक्ष दीपक मालवीय ने कहा कि रोहित ठाकुर जैसे युवाओं की भक्ति वर्तमान युग में आशा की वह किरण है जो समाज को धर्म, सेवा और संस्कारों से जोड़ती है। यह यात्रा केवल एक पदयात्रा नहीं, यह आत्मा और परमात्मा के मिलन की वह यात्रा है जहां शरीर थक सकता है, पर आत्मा और श्रद्धा थकती नहीं।

खाटू बाबा स्वयं बन जाते पथ प्रदर्शक (Khatu Dham Foot Pilgrimage)

उन्होंने कहा कि खाटू बाबा की कृपा जिन पर होती है, वे स्वयं पथ प्रदर्शक बन जाते हैं और रोहित ठाकुर जैसे युवा बाबा के दिव्य पथ के प्रतीक हैं। दीपक मालवीय ने यह भी कहा कि जब कोई युवा भक्त अपने संकल्प, सेवा और साधना के साथ बाबा के चरणों में पहुंचता है, तो वह केवल अपना ही नहीं, पूरे समाज का मार्ग आलोकित करता है। ऐसे भक्तों की भक्ति देखकर यह विश्वास और दृढ़ होता है कि हिंदू धर्म की जड़ें आज भी उतनी ही सशक्त और जीवंत हैं।

यात्रा का हर क्षण बना प्रेरक प्रसंग (Khatu Dham Foot Pilgrimage)

खाटूधाम की इस आध्यात्मिक पदयात्रा में रोहित ठाकुर के जीवन का हर क्षण एक प्रेरक प्रसंग बन गया। यात्रा के दौरान जब उन्हें भारी बारिश में आगे बढ़ना पड़ा, तब उन्होंने केवल बाबा का नाम लेकर कठिन राहो को पार किया। कभी जंगल क्षेत्र में ठहरने की नौबत आई, मगर रोहित ने बाबा का कीर्तन किया और उसी जगह भक्ति के भाव में विश्राम किया। जब उनकी तबीयत हल्की खराब हुई, तब भी उन्होंने बिना रुके यात्रा जारी रखी और बाबा से प्रार्थना करते हुए आगे बढ़ते रहे। रास्ते में कई श्रद्धालुओ ने उन्हें देखकर जय श्री श्याम का जयघोष किया, जिसे सुनकर वे भावविभोर हो गए।

बाबा की प्रेरणादायक कथाओं ने दी ऊर्जा (Khatu Dham Foot Pilgrimage)

पदयात्रा में रोहित ने रास्ते में मिलने वाले हर मंदिर में सिर नवाया और बाबा के दर्शन हेतु रुककर पूजा की। इस यात्रा में उन्हें कई बार भूखे-प्यासे भी रहना पड़ा, मगर हर बार बाबा की लीलाओं और प्रेरणादायक कथा ने उन्हें ऊर्जा दी। बाबा खाटूश्याम की कथा का वर्णन करते हुए रोहित ने बताया कि महाभारत काल में जब घमासान युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण ने वीर बर्बरीक से उनका शीश मांगा, तो बर्बरीक ने उसे बिना झिझक समर्पित कर दिया। श्रीकृष्ण ने तब उसे वरदान दिया कि कलियुग में तू मेरे नाम खाटूश्याम से पूजित होगा।

उनकी भक्ति में किया जाता समर्पण (Khatu Dham Foot Pilgrimage)

यही कारण है कि बाबा खाटूश्याम को शीश का दानी कहा जाता है, और उनकी भक्ति में केवल मांगा नहीं जाता, समर्पित किया जाता है। रोहित ठाकुर की यह यात्रा भी उसी समर्पण का उदाहरण बनी है, जिसमें उन्होंने अपने शरीर, समय, श्रम और संकल्प को बाबा के चरणों में अर्पित कर दिया। उनका यह भक्ति मार्ग आज के युवाओं को धर्म, आस्था और साधना की शक्ति का अहसास कराता है।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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