महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में भी बेचे जा रहे हैं बैतूल के जैविक उत्पाद

बैतूल जिले के कृषक जैविक खेती में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ अब वे प्रदेश से बाहर भी अपने जैविक उत्पाद बेच रहे हैं। बैतूल के समीप के ग्राम सोहागपुर के कृषक स्वदेश चौधरी जैविक खेती अपनाने वाले जिले के प्रमुख कृषक हैं। वे अपनी 25 एकड़ जमीन में से 5 एकड़ में जैविक खेती कर रहे हैं।
श्री चौधरी बताते हैं कि वे पिछले 12 वर्षों से जैविक खेती कर रहे हैं। उनके जैविक उत्पाद मप्र राज्य जैविक प्रमाणीकरण संस्था भोपाल से पंजीकृत हैं। इस पांच एकड़ जमीन में से साढ़े चार एकड़ में वे जैविक गेहूं, चावल एवं मूंगफली की पैदावार करते हैं एवं आधे एकड़ में जैविक धनिया, तुवर, मटर, चना, मेथी और लहसुन की फसल लेते हैं।
श्री चौधरी के अनुसार उन्हें रबी सीजन में लगभग 50 क्विंटल जैविक गेहूं एवं खरीफ सीजन में इतने ही चावल का उत्पादन प्राप्त होता है। यह जैविक गेहूं एवं चावल स्थानीय बाजार के साथ-साथ उनके द्वारा दूसरे राज्यों छत्तीसगढ़ के रायपुर, महाराष्ट्र के नागपुर, तेलंगाना के हैदराबाद में अपने स्थायी ग्राहकों को भी विक्रय किया जाता है।
जिला मुख्यालय पर स्थापित किए गए जैविक हाट बाजार का भी श्री चौधरी द्वारा उपयोग किया जा रहा है। वे इस हाट बाजार में अपने जैविक उत्पादों की दुकान लगाकर गेहूं, चावल एवं अन्य जैविक उत्पाद बेचते हैं।
श्री चौधरी बताते हैं कि इन सभी जैविक उत्पादों से उन्हें लगभग 7 लाख रुपए की वार्षिक आय होती है, जिसमें उन्हें लगभग 2 लाख रुपए लागत निकालने के बाद लगभग 5 लाख रुपए का वार्षिक लाभ मिल रहा है। इस तरह श्री चौधरी के लिए जैविक खेती आर्थिक आय का मजबूत साधन बन रही है।



