Negligence : खेल के साथ प्यास बुझाने का प्रशिक्षण पाने मजबूर खिलाड़ी, हैंडपंप है खराब तो जुगाड़ के सहारे निकाल रहे पानी
• उत्तम मालवीय, बैतूल
भारत में टैलेंट की कमी नहीं है। क्रिएटिविटी के कई नमूने भारत में देखने को मिलते रहते हैं। कुछ लोग संसाधन की कमी पर अपना हुनर ऐसा इस्तेमाल करते हैं। जिसे देखने के बाद लोगों को यकीन नहीं होता कि ऐसी भी कोई चीज बनाई जा सकती थी। बैतूल जैसे आदिवासी जिले में भी टैलेंट की कमी नहीं है। वही कुछ टैलेंट मजबूरी के चलते सामने लाना पड़ता है। इसका एक उदाहरण लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में दिखा।
स्टेडियम में कई दिनों से खराब पड़े हैंडपंप से पानी निकालने के लिए खिलाड़ियों ने अपना जुगाड़ू दिमाग लगाया और हैंडपंप ने पानी उगल दिया। बता दें कि हैंडपंप की चैन टूटने की वजह से हैंड पंप काम नहीं कर रहा था, जिसके चलते खिलाड़ी पानी के लिए काफी परेशान थे। जब किसी ने इसे सुधारने की सुध नहीं ली तो मजबूरी में खिलाड़ियों ने अपना हुनर दिखाया और टूटी हुई चैन में लोहे की सब्बल फंसा कर हैंडपंप से पानी निकाल लिया। अब प्रतिदिन ये खिलाड़ी सब्बल की मदद से पानी निकाल कर अपनी प्यास बुझा रहे हैं। (नीचे दी गई लिंक पर क्लिक करके वीडियो में देखें कि खिलाड़ी किस तरह जुगाड़ से हैंडपंप से पानी निकालने को मजबूर हैं)
https://youtube.com/shorts/nJH7hheOm8I?feature=share
अव्यवस्था के बीच हो रहा खेल प्रशिक्षण शिविर
खिलाड़ियों का कहना है कि स्टेडियम में भारी लापरवाही और अव्यवस्था के बीच खेल प्रशिक्षण शिविर चल रहा है। स्टेडियम में ट्यूबवेल की मोटर खराब पड़ी है। हैंडपंप के यह हाल है। महीनों से झाडू नहीं लगती। पूरे मैदान में कचरा बिखरा है। ऐसे में शिविर हो रहा है और प्रतियोगिताएं भी होती हैं। अनसुनी का आलम यह है कि गर्मी में भी ठूंठ बने हैंडपंपों की मरम्मत कराने तक का नपा के पास समय नहीं है।

एक तरफ जहां इन खिलाड़ियों ने जैसे-तैसे अपना टैलेंट दौड़ा कर अपनी प्यास बुझा ली, लेकिन इसी बीच नगर पालिका के दावों की भी पोल खुल गई है।खिलाड़ी नगर पालिका को शिकायत करके हैंडपंप ठीक कराने की मांग कर चुके हैं लेकिन अभी तक जिम्मेदारों को फुर्सत नहीं मिल रही है। यह तो बानगी है नगर पालिका की हीलाहवाली की पोल खोलने के लिए। कमोबेश ऐसे ही हालात पालिका क्षेत्र के अन्य हैंडपंपों के हैं, जो शो पीस बने हुए हैं।



