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Moong pesticide contamination: मध्यप्रदेश में मूंग पर बड़ा खुलासा: 3 गुना ज्यादा कीटनाशक, स्वास्थ्य के लिए खतरा

Moong pesticide contamination: मध्यप्रदेश में किसानों के विरोध के बाद भले ही जहरीली न मानकर मूंग की धड़ल्ले से खरीदी कर ली गई, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। मूंग का जहरीली न होने के दावें झूठे हैं। वास्तविकता यह है कि इसमें तय सीमा से 3 गुना अधिक कीटनाशक पाया गया है। यह खुलासा प्रदेश के एक मीडिया संस्थान द्वारा मान्यता प्राप्त लैब में मूंग के सैंपल की जांच कराए जाने पर हुआ है।

मूंग की हकीकत सामने लाने के लिए दैनिक भास्कर ने सरकारी खरीदी के दौरान नर्मदापुरम, रायसेन और खंडवा के खरीदी केंद्रों से आधा-आधा किलोग्राम मूंग के सैंपल लिए। इन 136 सैंपलों की जांच राष्ट्रीय परीक्षण और अंशांकन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (NABL) मान्यता प्राप्त लैब में कराई गई। इस लैब से जो रिपोर्ट सामने आई है, उसने सभी को न केवल चौका दिया बल्कि जनस्वास्थ्य को लेकर चिंतित भी कर दिया।

रिपोर्ट में क्या बात आई सामने (Moong pesticide contamination)

जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि रायसेन और नर्मदापुरम में कीटनाशक की मात्रा तय सीमा से 3.5 गुना और खंडवा में 2.8 गुना अधिक हैं। यह मूंग उत्पादन के बड़े केंद्र हैं। जांच रिपोर्ट में जानकारी दी गई है कि क्लोरान्ट्रानिलीप्रोल कीटनाशक की सीमा 0.01 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम होनी चाहिए, लेकिन नर्मदापुरम-रायसेन में यह 0.035 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम और खंडवा में 0.028 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम है।

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शरीर को क्या पहुंचाता नुकसान (Moong pesticide contamination)

बताया जाता है कि यह कीटनाशक लंबे समय तक शरीर में जाने पर मांसपेशियों और हृदय को नुकसान पहुंचा सकता है। वैज्ञानिक रिपोर्ट और एक्सपर्ट मानते हैं कि हमारी थाली में धीमा जहर परोसा जा रहा है। यह कीटनाशक वैसे तो प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन इसके अत्यधिक उपयोग ने मूंग को जहरीला बना दिया है। भारत में यह कई फसलों में पंजीकृत कीटनाशक के रूप में सूचीबद्ध है।

लालच के चलते मूंग बनी जहरीली (Moong pesticide contamination)

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने इसके लिए अलग-अलग अधिकतम अवशेष सीमा (MRL) तय की है। मूंग के अधिक और जल्द उत्पादन के लालच व जल्दबाजी में इसके बेतहाशा उपयोग से यह फसल जहरीली हो गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे क्लास यू (U) में रखा है। यानी यह तुरंत जानलेवा नहीं होता, लेकिन तय सीमा से ज्यादा लंबे समय तक खाने पर यह शरीर में जमा होकर गंभीर नुकसान करता है। इसका मुख्य इस्तेमाल चाय बागानों में कीट नियंत्रण के लिए किया जाता है।

Moong purchased at MSP

विशेषज्ञों का इस बारे में क्या कहना (Moong pesticide contamination)

भोपाल के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ. प्रणव रघुवंशी इस बारे में कहते हैं कि तय सीमा से अधिक क्लारान्ट्रानिलीप्रोल वाला मूंग अगर थोड़ी मात्रा में और कम समय तक खाया जाए तो उल्टी, पेट दर्द, सिरदर्द और चक्कर आ सकते हैं। ज्यादा मात्रा में और लंबे समय तक खाने से दिल, मांसपेशियों और नर्वस सिस्टम पर गंभीर असर पड़ता है, जिससे कमजोरी और थकान हो सकती है।

अभी भी गलत जानकारी दे रही सरकार (Moong pesticide contamination)

मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश में मूंग की खरीदी कर चुकी है। ऐसे में अब अपने निर्णय को सही साबित करने के लिए अभी भी सरकार की ओर से गलत जानकारी दी जा रही है। इससे सीधे-सीधे जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंहार ने इस संबंध में जब विधानसभा में सवाल उठाया तो सरकार ने दावा किया था कि प्रदेश में बिक रही मूंग में जहर नहीं है।

पहले इंकार, फिर कर ली खरीदी (Moong pesticide contamination)

गौरतलब है कि सबसे पहले खुद राज्य सरकार ने ही प्रदेश में उत्पादित की जा रही मूंग को जहरीली बताकर समर्थन मूल्य पर खरीदी करने से इंकार कर दिया था। इसके बाद जब किसानों की ओर से दबाव बढ़ा तो वोट बैंक बचाने खरीदी कर डाली। हालांकि इसकी जांच करवा कर आम जनता के सामने वस्तुस्थिति लाने की कोई जरुरत नहीं समझी। यही वजह है कि लोग भी बिना कोई सतर्कता बरतें यह मूंग खरीद कर उपयोग कर रहे हैं। इससे सीधे-सीधे उनकी सेहत से खिलवाड़ हो रहा है। (Moong pesticide contamination)

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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