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Urban Challenge Fund: अब शहरों के विकास को लगेंगे पंख, लोगों को मिलेंगी ज्यादा सुविधाएँ, एक लाख करोड़ का ‘शहरी चुनौती कोष’ मंजूर

Urban Challenge Fund के तहत बाजार से 50% राशि जुटाना अनिवार्य, जल-स्वच्छता से लेकर शहरी पुनर्विकास तक बड़े प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा

Urban Challenge Fund: अब शहरों के विकास को लगेंगे पंख, लोगों को मिलेंगी ज्यादा सुविधाएँ, एक लाख करोड़ का ‘शहरी चुनौती कोष’ मंजूर
Urban Challenge Fund: अब शहरों के विकास को लगेंगे पंख, लोगों को मिलेंगी ज्यादा सुविधाएँ, एक लाख करोड़ का ‘शहरी चुनौती कोष’ मंजूर

Urban Challenge Fund: देश के शहरों के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने शहरी चुनौती कोष को हरी झंडी दे दी है। इस नई पहल के जरिए आने वाले वर्षों में शहरों में बुनियादी ढांचे पर बड़े पैमाने पर निवेश होगा। खास बात यह है कि अब केवल सरकारी अनुदान पर निर्भर रहने के बजाय बाजार से संसाधन जुटाकर विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा। इससे शहरों को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेगा।

केंद्रीय मंत्रिमंडल की हरी झंडी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में शहरी चुनौती कोष को स्वीकृति दी गई। इस कोष के तहत केंद्र सरकार कुल एक लाख करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता उपलब्ध कराएगी। यह राशि सीधे अनुदान के रूप में नहीं दी जाएगी, बल्कि परियोजना की कुल लागत का 25 प्रतिशत हिस्सा केंद्र की ओर से सहायता के रूप में प्रदान किया जाएगा।

इस योजना की एक अहम शर्त यह है कि किसी भी परियोजना की कुल लागत का कम से कम 50 प्रतिशत भाग बाजार से जुटाया जाना अनिवार्य होगा। यदि यह शर्त पूरी होती है, तभी 25 प्रतिशत केंद्रीय सहायता मिलेगी। बाकी राशि राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, शहरी स्थानीय निकायों या अन्य स्रोतों से जुटाई जाएगी।

चार लाख करोड़ के निवेश का लक्ष्य

सरकार का अनुमान है कि इस व्यवस्था से अगले पांच वर्षों में शहरी क्षेत्रों में लगभग चार लाख करोड़ रुपये का कुल निवेश संभव हो सकेगा। यह मॉडल पारंपरिक अनुदान आधारित ढांचे से अलग है। अब ध्यान बाजार से संसाधन जुटाने, सुधारों को लागू करने और परिणामों पर आधारित विकास पर रहेगा। इसे भारत के शहरी विकास दृष्टिकोण में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

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शहरी विकास का यह रहेगा मॉडल

शहरी चुनौती कोष के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाले शहरी बुनियादी ढांचे के निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए बाजार वित्त, निजी क्षेत्र की भागीदारी और नागरिकों को केंद्र में रखकर सुधारों को प्राथमिकता दी जाएगी।

इस कोष का उद्देश्य ऐसे शहरों का निर्माण करना है जो लचीले हों, आर्थिक रूप से उत्पादक हों, सभी वर्गों को साथ लेकर चलें और जलवायु परिवर्तन के अनुकूल हों। सरकार चाहती है कि आने वाले समय में यही शहर देश की आर्थिक प्रगति के मुख्य आधार बनें।

पांच साल तक चलेगा प्रोजेक्ट

यह कोष वित्त वर्ष 2025-26 से लागू होगा और वित्त वर्ष 2030-31 तक सक्रिय रहेगा। आवश्यकता पड़ने पर इसकी कार्यान्वयन अवधि को वित्त वर्ष 2033-34 तक बढ़ाया जा सकता है। यह पहल बजट 2025-26 में घोषित उस दृष्टि को जमीन पर उतारने की दिशा में कदम है, जिसमें शहरों को विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने, रचनात्मक पुनर्विकास करने और जल व स्वच्छता से जुड़ी परियोजनाओं को प्राथमिकता देने की बात कही गई थी।

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बाजार से जुटानी होगी आधी राशि

इस कोष के तहत किसी भी परियोजना के लिए कम से कम आधी राशि बाजार स्रोतों से जुटानी होगी। इसमें नगरपालिका बांड, बैंकों से ऋण और सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल शामिल होंगे। परियोजना की शेष राशि राज्य सरकारें, केंद्र शासित प्रदेश, शहरी स्थानीय निकाय या अन्य वैध स्रोतों से उपलब्ध कराएंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य शहरों को वित्तीय रूप से अधिक जिम्मेदार और सक्षम बनाना है।

खुली और प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया से चयन

परियोजनाओं का चयन खुली और प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। ऐसी परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी जिनका प्रभाव व्यापक हो और जो सुधारों पर आधारित हों। इस चुनौती प्रणाली के माध्यम से केवल उन्हीं प्रस्तावों को समर्थन मिलेगा जो स्पष्ट लक्ष्यों और ठोस परिणामों के साथ प्रस्तुत किए जाएंगे।

निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा

सरकार ने इस कोष के जरिए निजी निवेश को आकर्षित करने की भी योजना बनाई है। इसके लिए जोखिम को साझा करने की स्पष्ट रूपरेखा तैयार की जाएगी और सेवा मानकों को मानकीकृत किया जाएगा। इससे निजी कंपनियों को शहरी परियोजनाओं में निवेश करने में अधिक विश्वास मिलेगा।

5,000 करोड़ का समर्पित कोष

शहरी स्थानीय निकायों की ऋण क्षमता बढ़ाने के लिए 5,000 करोड़ रुपये का एक अलग प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य उन शहरों को मदद देना है जो पहली बार बाजार से वित्त जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। इसमें टियर-II और टियर-III शहरों सहित कुल 4223 शहरों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे शहरी निकायों को भरोसेमंद परिसंपत्ति वर्ग के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।

छोटे शहरों के लिए ऋण चुकौती गारंटी

पूर्वोत्तर और पर्वतीय राज्यों के सभी शहरों तथा अन्य राज्यों के एक लाख से कम आबादी वाले शहरी निकायों के लिए विशेष ऋण गारंटी योजना को मंजूरी दी गई है। इस योजना के तहत पहली बार लिए गए ऋण पर 7 करोड़ रुपये या कुल ऋण राशि का 70 प्रतिशत, जो भी कम हो, तक की केंद्रीय गारंटी दी जाएगी। यदि पहला ऋण समय पर चुका दिया जाता है तो अगली बार 7 करोड़ रुपये या ऋण राशि के 50 प्रतिशत तक की गारंटी प्रदान की जाएगी। इस व्यवस्था से छोटे शहरों में पहली बार कम से कम 20 करोड़ रुपये की परियोजनाएं शुरू हो सकेंगी। आगे चलकर 28 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं को भी समर्थन मिल सकेगा।

डिजिटल निगरानी की रहेगी व्यवस्था

परियोजनाओं और सुधारों की निगरानी के लिए आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय एक एकीकृत डिजिटल पोर्टल का उपयोग करेगा। इसके माध्यम से पूरी प्रक्रिया कागजरहित होगी और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। कोष की अगली किश्त जारी करने से पहले यह देखा जाएगा कि संबंधित सुधारों को लागू किया गया है या नहीं।

विकास केंद्र के रूप में विकसित होंगे शहर

इस कोष के तहत कई प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा। शहरों को विकास केंद्र के रूप में विकसित करने, आर्थिक गलियारों और पारगमन आधारित योजनाओं को बढ़ावा देने, हरित क्षेत्रों के विस्तार और शहरी गतिशीलता को बेहतर बनाने पर जोर रहेगा। शहरों के रचनात्मक पुनर्विकास के अंतर्गत केंद्रीय व्यावसायिक जिलों और विरासत क्षेत्रों का नवीनीकरण, ब्राउनफील्ड क्षेत्रों का पुनर्जीवन और जलवायु अनुकूल बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा। पूर्वोत्तर और पर्वतीय राज्यों में भीड़भाड़ कम करने के लिए शहरों से बाहर नए विकास क्षेत्रों की योजना बनाई जाएगी।

जल और स्वच्छता को प्राथमिकता

जल आपूर्ति, सीवरेज नेटवर्क और वर्षा जल निकासी प्रणालियों के उन्नयन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच अवसंरचना के बेहतर तालमेल, जल ग्रिड के निर्माण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को भी शामिल किया गया है। पुराने कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण और स्वच्छता सेवाओं को मजबूत करना भी इस योजना का हिस्सा होगा।

इन शहरों को मिलेगा योजना का लाभ

इस कोष में वे सभी शहर शामिल होंगे जिनकी अनुमानित जनसंख्या 2025 में 10 लाख या उससे अधिक है। इसके अलावा वे राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानियां भी शामिल होंगी जो ऊपर की श्रेणी में नहीं आतीं। एक लाख से अधिक आबादी वाले प्रमुख औद्योगिक शहर भी इस योजना के दायरे में आएंगे।

इसके साथ ही पर्वतीय और पूर्वोत्तर राज्यों के सभी शहरी स्थानीय निकाय तथा एक लाख से कम आबादी वाले छोटे शहर ऋण गारंटी योजना के तहत सहायता पाने के पात्र होंगे। सिद्धांत रूप से सभी शहर इस कोष के अंतर्गत शामिल किए गए हैं।

सुधारों के आधार पर मिलेगा पैसा

इस योजना के तहत धनराशि जारी करना सुधारों से जोड़ा गया है। इसमें शासन और डिजिटल सुधार, बाजार और वित्तीय सुधार, सेवा वितरण में दक्षता, शहरी नियोजन और हरित अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में बदलाव शामिल हैं। प्रत्येक परियोजना के लिए स्पष्ट प्रदर्शन संकेतक तय किए जाएंगे। तीसरे पक्ष से सत्यापन कराया जाएगा और संचालन तथा रखरखाव की निरंतर व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

रिजल्ट पर रहेगा सरकार का जोर

परियोजनाओं का मूल्यांकन इस आधार पर होगा कि वे आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय दृष्टि से कितने प्रभावी परिणाम देती हैं। राजस्व बढ़ाना, निजी निवेश आकर्षित करना, रोजगार सृजन, सुरक्षा और समावेशिता में सुधार जैसे पहलुओं को महत्व दिया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि शहरी चुनौती कोष के माध्यम से बड़े पैमाने पर निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा, शहरी शासन मजबूत होगा और देश के शहर भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित हो सकेंगे। यह पहल भारत के शहरी परिदृश्य को नई दिशा देने की क्षमता रखती है।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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