MP DA Update: एमपी कर्मचारियों को मिलेगा 3% डीए? बजट 2026 से पहले सरकारी महकमे में बढ़ी हलचल
MP DA Update: स्वास्थ्य बीमा, टैक्स राहत, पदोन्नति और नई भर्तियों पर सरकार से ठोस फैसलों की उम्मीद

MP DA Update: मध्य प्रदेश का बजट 18 फरवरी 2026 को पेश होना है। बजट से पहले ही प्रदेश के कर्मचारी संगठनों ने अपनी प्रमुख मांगें सार्वजनिक कर दी हैं। महंगाई भत्ता, स्वास्थ्य बीमा, पदोन्नति, टैक्स राहत और नई भर्तियों जैसे मुद्दों पर कर्मचारियों की नजर टिकी है। इस बार कर्मचारी केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्पष्ट और ठोस निर्णय चाहते हैं।
दोनों स्तरों पर वसूला जा रहा टैक्स
राज्य कर्मचारियों का 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता पिछले आठ महीनों से लंबित है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच यह राशि तुरंत जारी की जानी चाहिए। कर्मचारी प्रतिनिधि अशोक पांडे का कहना है कि केंद्र सरकार के बराबर डीए दिया जाए और देरी खत्म की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि कर्मचारियों से केंद्रीय और राज्य, दोनों स्तर पर कर वसूला जा रहा है।
इस दोहरी कर व्यवस्था को समाप्त कर एक समान कर प्रणाली लागू की जानी चाहिए। इसके साथ ही दैनिक वेतनभोगी, स्थाईकर्मी और अंशकालीन कर्मचारियों को नियमित करने तथा उन्हें कलेक्टर दर से वेतन देने की मांग भी उठाई गई है। राज्य में सातवें वेतनमान आयोग की प्रक्रिया शुरू करने की अपेक्षा भी जताई गई है।
कैशलेस इलाज और अग्रिम राशि बढ़ाने की मांग
- मंत्रालयीन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक ने स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना कई वर्षों से लंबित है, जबकि कर्मचारी प्रीमियम देने को तैयार हैं। इसके बावजूद योजना लागू नहीं हो सकी है।
- त्योहार अग्रिम और अनाज अग्रिम की राशि बढ़ाने की मांग भी सामने आई है। वर्तमान में यह राशि 4 हजार रुपये है, जिसे बढ़ाकर 10 हजार रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है। कर्मचारियों का कहना है कि पिछले दस वर्षों में इस राशि में कोई वृद्धि नहीं हुई है।
- पदोन्नति प्रक्रिया भी लंबे समय से रुकी हुई बताई जा रही है। समयमान वेतनमान के साथ उच्च पदनाम देने की मांग दोहराई गई है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को प्रोफेशनल टैक्स से छूट देने की बात भी प्रमुखता से उठाई गई है।
नियमित पद लगातार हो रहे हैं कम
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष राजकुमार पटेल ने कहा कि प्रोफेशनल टैक्स से राहत का वादा अब तक पूरा नहीं हुआ है। समयमान वेतनमान के आदेश भी सभी कर्मचारियों तक समान रूप से नहीं पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं, लेकिन नई नियुक्तियां बहुत कम हो रही हैं। आउटसोर्सिंग व्यवस्था के कारण नियमित पदों में कमी आ रही है, जिससे रोजगार के अवसर घट रहे हैं।
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स्वास्थ्य बीमा और पेंशन पर भी जोर
तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने कहा कि हर बजट और कैबिनेट बैठक से कर्मचारियों को उम्मीद रहती है, लेकिन ठोस नतीजे सामने नहीं आते। उन्होंने कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा योजना को तुरंत लागू करने, पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने और नए कर्मचारियों की वेतन कटौती की समीक्षा करने की मांग की है। पुलिस, वन, नापतौल और अन्य जनसेवा विभागों में खाली पद जल्द भरने पर भी जोर दिया गया है। उनका कहना है कि चतुर्थ श्रेणी के हजारों पद पहले ही समाप्त किए जा चुके हैं, जिससे रोजगार के अवसर कम हुए हैं।
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