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IAS Success Story: पहले IPS फिर बनीं IAS, 23 साल की दिव्या तंवर ने विधवा मां को तंगहाली से निकालकर दी इज्जत की जिंदगी

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IAS Success Story: पहले IPS फिर बनीं IAS, 23 साल की दिव्या तंवर ने विधवा मां को तंगहाली से निकालकर दी इज्जत की जिंदगी
Source: Credit – Social Media

IAS Success Story: यूपीएससी (आईएएस) सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है। इस परीक्षा में सफलता बहुत कम अभ्यर्थियों को मिलती है। इस परीक्षा का सिलेबस बहुत ज्‍यादा होता और इसकी तैयारी में बहुत समय लगता है। जीवन में कुछ विपरीत परिस्थितयों के कारण इस परीक्षा की तैयारी कुछ लोग छोड़ देते हैं।

अगर आप भी किसी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं और जीवन में कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं तो आपको दिव्या तंवर की कहानी जरूर पढ़ना चाहिए, जिससे आपको यह पता चल जाए कि कठिन परिश्रम और पक्‍के इरादों से आप कुछ भी हासिल कर सकते हैं। तो आइए जानते  हैं आईपीएस दिव्या तंवर की सक्सेस स्टोरी (IPS Divya Tanwar Biography)।

हरियाणा के महेंद्रगढ़ की रहने वाली दिव्या तंवर यूपीएससी परीक्षा के हर उम्मीदवार के लिए प्रेरणा हैं। उनकी मां बेशक कम पढ़ी-लिखी थीं, लेकिन उन्होंने अपनी बेटी को पढ़ाई करके आगे बढ़ते रहने के लिए हमेशा प्रेरित किया। दिव्या ने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी करने के लिए किसी कोचिंग का सहारा नहीं लिया था।

संसाधन के नाम पर न लैपटॉप, न आई फोन न कोई वाई फाई कनेक्शन और न कोचिंग में देने की मोटी-मोटी फीस थी। लेकिन, दिव्या ने अपने स्कूल में एक एसडीएम को देखकर तय कर लिया था कि मैं अपनी मम्मी के लिए वही रुतबा, शोहरत हासिल करूंगी जो एक अफसर की मां को मिलते होंगे। दिव्या ने पिता के जाने के बाद तीन बच्चों की परवरिश करने वाली मां के लिए सच में यह करके दिखा दिया।

पिता की मौत के बाद बिखरी जिंदगी (IAS Success Story)

आईपीएस दिव्या तंवर ने नवोदय विद्यालय (Navodaya Vidayala) महेंद्रगढ़ से स्कूली शिक्षा हासिल की है। उनके घर की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं थी। स्कूलिंग के दौरान पिता की मौत होने से उनके परिवार पर परेशानियों का पहाड़ टूट पड़ा था। दिव्या पढ़ाई में होशियार थीं और इसीलिए उनकी मां बबीता तंवर ने कभी उनकी पढ़ाई में रुकावट नहीं आने दी।

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मेहनत से लिया नवोदय में दाखिला

दिव्या ने अपनी प्राथमिक शिक्षा निम्बी जिले के मनु स्कूल से की और बाद में परीक्षा पास कर नवोदय विद्यालय में दाखिला लिया। उन्होंने अपना ग्रेजुएशन बीएससी में गवर्नमेंट पीजी कॉलेज से किया है। दिव्या अक्सर बच्चों को पढ़ाया भी करती थीं। उनका मानना है कि परीक्षा पास करने में किस्मत से ज्यादा मेहनत का रोल होता है। यदि किसी ने ठान लिया कि यह करना है तो वह मेहनत के दम पर वह हासिल कर ही लेता है।

10 घंटे करती थी पढ़ाई (IAS Success Story)

दिव्या का घर बहुत छोटा है, लेकिन उन्होंने वहीं रहकर तैयारी की। तैयारी के लिए उन्होंने किसी कोचिंग का सहारा नहीं लिया और सेल्फ स्टडी की मदद से अपने लक्ष्य को हासिल किया। अगर बात उनकी पढ़ाई की हो तो वे रोज 10 घंटे पढ़ती थी और घर से कभी बाहर नहीं जाती थी। खाना, पढ़ना और सोना, बस यही उनकी तैयारी का शेड्यूल रहा। दिव्या अपनी मां को अपनी सफलता का क्रेडिट देती हैं जिन्होंने अपनी बेटी का हाथ हमेशा थामे रखा और कभी पिता की कमी महसूस नहीं होने दी। उनकी मां ने खुद मजदूरी की, लेकिन दिव्या की तैयारी में कोई समस्या पैदा नहीं होने दी।

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कॉलेज के बाद की तैयारी (IAS Success Story)

दिव्या की मां ने सिलाई-कढ़ाई और मजदूरी करके अपने तीनों बच्चों, दिव्या, तनीषा और साहिल को उनके पैरों पर खड़े होने लायक बनाया। दिव्या ने बीएससी पास करने के बाद यूपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी। अपने घर के एक छोटे से कमरे में 10 घंटे पढ़ाई करके उन्हें सिविल सेवा परीक्षा (Civil Services Exam) की तैयारी की थी।

पहले अटेंप्ट में हुईं पास (IAS Success Story)

आईपीएस दिव्या तंवर ने 21 साल की उम्र में 2021 में अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास कर ली थी (Youngest IPS Officer)। इसमें 438वीं रैंक हासिल कर वह आईपीएस ऑफिसर बन गईं (IPS Divya Tanwar Rank)। दिव्या के कई दोस्तों व रिश्तेदारों को भी यह जानकारी नहीं थी कि वे बंद कमरे में यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रही थीं।

उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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