MP Rural Housing CSEB: कम लागत, ज्यादा मजबूती: मध्यप्रदेश में नए तरीके से बनेंगे पीएम ग्रामीण आवास
MP Rural Housing CSEB: मध्यप्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में आवास निर्माण को ज्यादा टिकाऊ, सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक नई पहल करने जा रही है। प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत अब परंपरागत ईंटों की जगह विशेष तकनीक से तैयार किए गए ब्लाक का उपयोग किया जाएगा। इससे न केवल निर्माण लागत घटेगी, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों की बचत भी होगी और ग्रामीण परिवारों को मजबूत व आरामदायक घर मिल सकेंगे।
सीएसईबी तकनीक से बनेंगे नए आवास
प्रदेश में अब जलवायु के अनुकूल संपीड़ित स्थिर मिट्टी के ब्लाक, यानी सीएसईबी तकनीक से प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास बनाए जाएंगे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने सभी ब्लाकों में कम से कम 50 घर इसी पद्धति से बनाने का लक्ष्य तय किया है। इस तकनीक में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मिट्टी का उपयोग किया जाता है, जिसमें थोड़ी मात्रा में सीमेंट या चूना मिलाकर ब्लाक तैयार किए जाते हैं। इसके बाद पकी हुई ईंटों की जरूरत नहीं पड़ती।
पारंपरिक ईंटों वाले घरों के मुकाबले कम लागत
सीएसईबी से बने मकानों की लागत पारंपरिक ईंटों से बनने वाले घरों की तुलना में कम आती है। अधिकारियों के अनुसार इस तकनीक से बने आवासों में 20 से 30 प्रतिशत तक कम ऊर्जा की खपत होती है। इससे न सिर्फ निर्माण के समय खर्च घटता है, बल्कि घर लंबे समय तक ठंडे और आरामदायक भी रहते हैं। इसी वजह से इसे जलवायु अनुकूल विकल्प माना जा रहा है।
पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद
इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसका पर्यावरण पर नकारात्मक असर नहीं पड़ता। ईंट भट्टों की जरूरत कम होने से प्रदूषण घटेगा और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होगा। सीएसईबी तकनीक में परंपरागत निर्माण ज्ञान और आधुनिक तकनीक का संतुलन देखने को मिलता है।
अन्य राज्यों और देशों में हो चुका है उपयोग
अधिकारियों ने बताया कि सीएसईबी तकनीक का इस्तेमाल देश के कुछ राज्यों और कई अन्य देशों में पहले से किया जा रहा है। त्रिपुरा में इस तकनीक से आवास बनाए जा चुके हैं, जहां घरों की छतें बांस से तैयार की गई हैं। इन छतों की उम्र करीब 75 वर्ष तक मानी जाती है, जिससे मकान लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं।
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पीएम जनमन योजना में भी दिखेगा नवाचार
मध्यप्रदेश के 24 जिलों में पीएम जनमन योजना के तहत कुल 1.85 लाख आवास स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 1.34 लाख से अधिक मकान बनकर तैयार हो चुके हैं, जबकि करीब 51 हजार आवास अभी अधूरे हैं। सरकार का लक्ष्य है कि इन सभी मकानों को मार्च 2026 तक पूरा कर लिया जाए। आने वाले समय में इन योजनाओं के तहत बनने वाले घरों में भी सीएसईबी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
स्वसहायता समूहों को मिलेगा रोजगार
सीएसईबी ब्लाक बनाने के लिए स्थानीय स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहित किया जाएगा। इनमें अधिकतर ग्रामीण महिलाएं शामिल होंगी। ब्लाक निर्माण से उन्हें रोजगार मिलेगा, उनकी आय बढ़ेगी और कौशल का विकास होगा। इससे समूह आर्थिक रूप से मजबूत होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा मिलेगी।
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